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असम में पंचायत प्रमाण पत्र की स्थिति का बहाल होना न्याय की जीत: मदनी
Updated Wed, 06 Dec 2017 12:02 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। असम के लाखों लोगों की नागरिकता से संबंधित महत्वपूर्ण मामले में पंचायत प्रमाण पत्र की स्थिति को बहाल किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जमीयत उलमा-ए-हिंद और असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने इसे न्याय की जीत बताया है।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी व असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष व सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने संयुक्त रुप से फैसले को न्याय की जीत और इतिहास में स्वर्णिम पल बताते हुए लाखों लोगों की नागरिकता के संरक्षण की गारंटी करार दिया है। उन्होंने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने न्याय के लिए लड़ाई में भाग लिया और इसके लिए व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि आसाम में हाईकोर्ट के फैसले की वजह से उन लोगों को गंभीर समस्या हो गई थी जो पंचायत प्रमाण पत्र को सहायक दस्तावेज के रुप में केवल इस बात को साबित करने के लिए प्रस्तुत कर रहे थे कि वे अमुक बेटी या बेटा हैं और शादी या किसी और वजह से अमुक गांव में स्थानांतरित हो गए हैं। उन्होंने बताया कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय के खिलाफ जमीयत की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में दो पीड़ितों की याचिका दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लगभग 48 लाख विवाहित महिलाओं को अपनी नागरिकता पर लटकी तलवार से राहत मिली है। साथ ही अदालत ने नागरिकता के संबंध में सरकार के दोहरे व्यवहार को भी खारिज कर दिया है और सरकार से कहा है कि असली और गैर असली नागरिकों को न बांटे। नागरिकता के लिए केवल एक कैटिगरी होगी वह भारत की नागरिकता है।
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जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी व असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष व सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने संयुक्त रुप से फैसले को न्याय की जीत और इतिहास में स्वर्णिम पल बताते हुए लाखों लोगों की नागरिकता के संरक्षण की गारंटी करार दिया है। उन्होंने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने न्याय के लिए लड़ाई में भाग लिया और इसके लिए व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि आसाम में हाईकोर्ट के फैसले की वजह से उन लोगों को गंभीर समस्या हो गई थी जो पंचायत प्रमाण पत्र को सहायक दस्तावेज के रुप में केवल इस बात को साबित करने के लिए प्रस्तुत कर रहे थे कि वे अमुक बेटी या बेटा हैं और शादी या किसी और वजह से अमुक गांव में स्थानांतरित हो गए हैं। उन्होंने बताया कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय के खिलाफ जमीयत की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में दो पीड़ितों की याचिका दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लगभग 48 लाख विवाहित महिलाओं को अपनी नागरिकता पर लटकी तलवार से राहत मिली है। साथ ही अदालत ने नागरिकता के संबंध में सरकार के दोहरे व्यवहार को भी खारिज कर दिया है और सरकार से कहा है कि असली और गैर असली नागरिकों को न बांटे। नागरिकता के लिए केवल एक कैटिगरी होगी वह भारत की नागरिकता है।
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