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उन्नति के लिए समाज से बुराईयों का खात्मा जरूरी : अमरेश
Updated Sun, 05 Nov 2017 01:06 AM IST
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उन्नति के लिए समाज से बुराइयों का खात्मा जरूरी : अमरेश
देवबंद। गुरुकुल विद्यापीठ में वेद पारायण यज्ञ में दूसरे दिन वक्ताओं ने समाज, सभ्यता, समानता एवं वेद में योग विद्या पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि वेदानुकूल चलने पर ही मनुष्य श्रेष्ठ बनेगा।
शनिवार को कार्यक्रम में यज्ञ के ब्रह्मा स्वामी शांतनु महाराज, यजमान कुलदीप सिंह व उनकी पत्नी गीता, रामकुमार व उनकी पत्नी अंजू रहे। अमरेश आर्य व योगेश दत्त ने बताया कि महाभारत से पूर्व आर्यों का एक छत्र राज्य था। महाभारत के पश्चात ही मत मतांतर का उदय हुआ। ऋषि दयानंद ने आकर इन बुराइयों को दूर किया। जब तक हम समाज में फैली बुराइयों को दूर नहीं करेंगे तब तक उन्नति नहीं कर पाएंगे। गुरुदत्त आर्य ने कहा कि हम जात-पात को नहीं भूलेंगे तो समाज में उन्नति नहीं होगी। विद्वान वह होता है जो समाज की बुराई को दूर करने में विद्वता नहीं है। त्रिवेणी चीनी मिल के उपाध्यक्ष दीनानाथ मिश्र ने लोगों को वेद मार्ग पर चलने का आह्वान किया। जनेश्वर आर्य ने कहा कि किताबी ज्ञान से कोई विद्वान नहीं बनता। अनपढ़ भी विद्वान होता है। इस मौके पर डा. कांता त्यागी, बबली, मदनलाल, ब्रह्म सिंह पुंडीर, यशपाल चौधरी, राजकुमार जाटव, करण सिंह, तिलकराम, ब्रजपाल फौजी, रणबीर सिंह, अनूप सिंह, मांगेराम, रघुवीर सिंह, सुक्कड़, अशोक त्यागी, हरपाल धीमान आदि रहे।
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देवबंद। गुरुकुल विद्यापीठ में वेद पारायण यज्ञ में दूसरे दिन वक्ताओं ने समाज, सभ्यता, समानता एवं वेद में योग विद्या पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि वेदानुकूल चलने पर ही मनुष्य श्रेष्ठ बनेगा।
शनिवार को कार्यक्रम में यज्ञ के ब्रह्मा स्वामी शांतनु महाराज, यजमान कुलदीप सिंह व उनकी पत्नी गीता, रामकुमार व उनकी पत्नी अंजू रहे। अमरेश आर्य व योगेश दत्त ने बताया कि महाभारत से पूर्व आर्यों का एक छत्र राज्य था। महाभारत के पश्चात ही मत मतांतर का उदय हुआ। ऋषि दयानंद ने आकर इन बुराइयों को दूर किया। जब तक हम समाज में फैली बुराइयों को दूर नहीं करेंगे तब तक उन्नति नहीं कर पाएंगे। गुरुदत्त आर्य ने कहा कि हम जात-पात को नहीं भूलेंगे तो समाज में उन्नति नहीं होगी। विद्वान वह होता है जो समाज की बुराई को दूर करने में विद्वता नहीं है। त्रिवेणी चीनी मिल के उपाध्यक्ष दीनानाथ मिश्र ने लोगों को वेद मार्ग पर चलने का आह्वान किया। जनेश्वर आर्य ने कहा कि किताबी ज्ञान से कोई विद्वान नहीं बनता। अनपढ़ भी विद्वान होता है। इस मौके पर डा. कांता त्यागी, बबली, मदनलाल, ब्रह्म सिंह पुंडीर, यशपाल चौधरी, राजकुमार जाटव, करण सिंह, तिलकराम, ब्रजपाल फौजी, रणबीर सिंह, अनूप सिंह, मांगेराम, रघुवीर सिंह, सुक्कड़, अशोक त्यागी, हरपाल धीमान आदि रहे।
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