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सरकारी तंत्र की सुस्ती से बढ़ी झोलाछापों की फौज
Updated Thu, 29 Jun 2017 12:27 AM IST
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सरकारी तंत्र की सुस्ती से बढ़ी झोलाछाप डॉक्टरों की फौज
सहारनपुर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से हाल ही में देहाती इलाकों में झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ हुई कार्रवाई से ऐसे डॉक्टरों के साथ ही ग्रामीणों में बेचैनी की स्थिति है। दरअसल, झोलाछाप चिकित्सकों के मामले में दो कड़वे सच हैं। पहला तो यह कि फर्जी डिग्री और फर्जी नामों के सहारे ऐसे चिकित्सक इलाज की बजाय मरीजों की जिंदगी खतरे में डालते हैं। दूसरा यह कि देहाती इलाकों और कस्बों में 60 फीसदी मरीजों की सेहत इन्हीं के भरोसे है। वजह यह कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक तो क्या फार्मेसिस्ट तक नहीं मिलते।
मरीजों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर झोलाछाप चिकित्सक कम होने की बजाय बढ़ते जा रहे हैं। याद दिलाएं कि पिछले साल के सर्वे में 2000 से अधिक झोलाछाप चिह्नित हुए थे। इतना ही नहीं, बिना डिग्री डिलीवरी, मनमाने ढंग से भ्रूण परीक्षण, डिग्री किसी की, चिकित्सा किसी की, फार्मेसिस्ट से चिकित्सक बनने जैसे कई खुलासे हुए थे। मगर इतने झोलाछाप सक्रिय होने पर भी स्वास्थ्य विभाग अब उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से कतरा रहा है। कुछ दिन पहले मुजफ्फराबाद में छापेमारी की मगर, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने से पहले झोलाछाप निकल चुके थे। सहारनपुर के देहात इलाकों में झोलाछापों की भरमार है और बरसात का मौसम आने के बाद बुखार के प्रकोप को बढ़ाने में इनकी भी बड़ी भूमिका होती है। कारण, देेहात में बुखार के ज्यादातर झोलाछापों के भरोसे रहते हैं और सही इलाज नहीं मिल पाने के कारण मौत तक के मामले सामने आते हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता समझ से परे है।
400 डॉक्टर चाहिएं मगर 300 भी नहीं
जिला अस्पताल से लेकर अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में ही रोजाना 5000 से 7000 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें से 600 से 700 रोगी गंभीर श्रेणी के होते हैं। यदि झोलाछापों के यहां जाने वाले मरीज जोड़े जाएं तो यह आंकड़ा 10000 ओपीडी से ऊपर जा सकता है। इतने मरीजों को कवर करने के लिए कम से कम 400 डॉक्टरों की जरूरत है। लेकिन उपलब्ध 300 भी नहीं हैं। करीब 250 सरकारी चिकित्सकों से ही काम चलाया जा रहा है। इनमें भी हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन, प्रसूति रोग विशेषज्ञ, कैंसर विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन जैसे विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। कई साल पहले ट्रॉमा सेंटर तक बनाया जा चुका है। मगर उसे भी विशेषज्ञ नहीं मिले हैं।
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झोलाछापों को चिन्हित किया जा चुका है और उनके खिलाफ कार्रवाई की रूपरेखा भी बनाई गई है। जिला स्तर पर टीमों का गठन किया जा रहा और वह ब्लाक स्तर पर छापेमारी की जाएगी।
- बीएस सोढ़ी, सीएमओ
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सहारनपुर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से हाल ही में देहाती इलाकों में झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ हुई कार्रवाई से ऐसे डॉक्टरों के साथ ही ग्रामीणों में बेचैनी की स्थिति है। दरअसल, झोलाछाप चिकित्सकों के मामले में दो कड़वे सच हैं। पहला तो यह कि फर्जी डिग्री और फर्जी नामों के सहारे ऐसे चिकित्सक इलाज की बजाय मरीजों की जिंदगी खतरे में डालते हैं। दूसरा यह कि देहाती इलाकों और कस्बों में 60 फीसदी मरीजों की सेहत इन्हीं के भरोसे है। वजह यह कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक तो क्या फार्मेसिस्ट तक नहीं मिलते।
मरीजों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर झोलाछाप चिकित्सक कम होने की बजाय बढ़ते जा रहे हैं। याद दिलाएं कि पिछले साल के सर्वे में 2000 से अधिक झोलाछाप चिह्नित हुए थे। इतना ही नहीं, बिना डिग्री डिलीवरी, मनमाने ढंग से भ्रूण परीक्षण, डिग्री किसी की, चिकित्सा किसी की, फार्मेसिस्ट से चिकित्सक बनने जैसे कई खुलासे हुए थे। मगर इतने झोलाछाप सक्रिय होने पर भी स्वास्थ्य विभाग अब उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से कतरा रहा है। कुछ दिन पहले मुजफ्फराबाद में छापेमारी की मगर, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने से पहले झोलाछाप निकल चुके थे। सहारनपुर के देहात इलाकों में झोलाछापों की भरमार है और बरसात का मौसम आने के बाद बुखार के प्रकोप को बढ़ाने में इनकी भी बड़ी भूमिका होती है। कारण, देेहात में बुखार के ज्यादातर झोलाछापों के भरोसे रहते हैं और सही इलाज नहीं मिल पाने के कारण मौत तक के मामले सामने आते हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता समझ से परे है।
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400 डॉक्टर चाहिएं मगर 300 भी नहीं
जिला अस्पताल से लेकर अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में ही रोजाना 5000 से 7000 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें से 600 से 700 रोगी गंभीर श्रेणी के होते हैं। यदि झोलाछापों के यहां जाने वाले मरीज जोड़े जाएं तो यह आंकड़ा 10000 ओपीडी से ऊपर जा सकता है। इतने मरीजों को कवर करने के लिए कम से कम 400 डॉक्टरों की जरूरत है। लेकिन उपलब्ध 300 भी नहीं हैं। करीब 250 सरकारी चिकित्सकों से ही काम चलाया जा रहा है। इनमें भी हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन, प्रसूति रोग विशेषज्ञ, कैंसर विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन जैसे विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। कई साल पहले ट्रॉमा सेंटर तक बनाया जा चुका है। मगर उसे भी विशेषज्ञ नहीं मिले हैं।
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झोलाछापों को चिन्हित किया जा चुका है और उनके खिलाफ कार्रवाई की रूपरेखा भी बनाई गई है। जिला स्तर पर टीमों का गठन किया जा रहा और वह ब्लाक स्तर पर छापेमारी की जाएगी।
- बीएस सोढ़ी, सीएमओ