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कुआंखेड़ा के संगम में डुबकी लगाई
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श्रद्धालुओं ने कुआंखेडा के संगम में डुबकी लगाई
नानौता (सहारनपुर)। नानौता क्षेत्र के ग्राम कुआंखेड़ा में स्थित गंगा-यमुना के पवित्र संगम पर मकर संक्रांति के अवसर पर दूरदराज से श्रृद्धालुओं स्नान कर पुण्य कमाया तो वहीं संगम स्थल पर प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीणों में रोष व्याप्त रहा।
मंगलवार को मकर संक्रांति धार्मिक महत्व के दृष्टिगत काफी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के मां गंगा की आरती और हर-हर गंगे के जयघोष से संगम स्थल गुंजायमान हो गया। इस दौरान श्रृद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर फूल, दिये और पैसे संगम में प्रवाहित कर सुख समृद्धि की मनोकामनाएं कीं। मंदिरों और घरों में काली दाल से बनी खिचड़ी, तिल, गुड़ और मूंगफली का प्रसाद के रूप में वितरण किया गया।
सुविधाओं की कमी से श्रद्धालुओं में रोष
नानौता। संगम स्थल को बने करीब 11 वर्ष पूर्व हो गए हैं। इसके चलते ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि हरिद्वार, नासिक या प्रयागराज की तर्ज पर संगम स्थल पर महिलाओं के स्नान घाट, कपडे़ बदलने के लिए कक्ष, गर्मी और बरसात से बचने के लिए टीन शेड आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। लेकिन प्रशासन और सिंचाई विभाग की बेरुखी के कारण टीनशेड ही बनवाया गया और न ही महिलाओं के लिए वस्त्र बदलने के लिए कोई इंतजाम ही किए गए हैं। इसके चलते महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है। इतना ही नहीं बसों से यात्रा कर संगम पर स्नान के लिए वाले श्रद्धालुओं को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से करीब छह किलोमीटर की दूरी प्राईवेट या अपने वाहनों से करनी पड़ती है। कभी-कभी वाहन के अभाव में पैदल चलना पड़ता है। प्रशासन द्वारा संगम स्थल पर श्रृद्धालुओं के लिए वाहनों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
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इस संबंध में ग्राम प्रधान रमेश सैनी, पूर्व ग्राम प्रधान ओमबीर सिंह, पूर्व उपप्रमुख विजेंद्र पुंडीर, पूर्व समिति चेयरमैन कुलदीप सिंह, प्रमोद राणा, ठाकुर केहर सिंह, राजेंद्र कुमार, महेंद्र सिंह, रामबीर चौहान, प्रदीप कुमार, मदन सिंह, संजय सिंह आदि ने सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। एसडीएम संगीता गौतम का कहना है कि तहसील से इसके लिए कोई बजट नहीं है। यदि यह क्षेत्र ग्राम पंचायत में आता है तो इसमें पंचायत स्तर पर कार्य कराया जा सकता है। वे इस मामले को दिखवाएंगी।
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नानौता (सहारनपुर)। नानौता क्षेत्र के ग्राम कुआंखेड़ा में स्थित गंगा-यमुना के पवित्र संगम पर मकर संक्रांति के अवसर पर दूरदराज से श्रृद्धालुओं स्नान कर पुण्य कमाया तो वहीं संगम स्थल पर प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीणों में रोष व्याप्त रहा।
मंगलवार को मकर संक्रांति धार्मिक महत्व के दृष्टिगत काफी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के मां गंगा की आरती और हर-हर गंगे के जयघोष से संगम स्थल गुंजायमान हो गया। इस दौरान श्रृद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर फूल, दिये और पैसे संगम में प्रवाहित कर सुख समृद्धि की मनोकामनाएं कीं। मंदिरों और घरों में काली दाल से बनी खिचड़ी, तिल, गुड़ और मूंगफली का प्रसाद के रूप में वितरण किया गया।
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सुविधाओं की कमी से श्रद्धालुओं में रोष
नानौता। संगम स्थल को बने करीब 11 वर्ष पूर्व हो गए हैं। इसके चलते ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि हरिद्वार, नासिक या प्रयागराज की तर्ज पर संगम स्थल पर महिलाओं के स्नान घाट, कपडे़ बदलने के लिए कक्ष, गर्मी और बरसात से बचने के लिए टीन शेड आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। लेकिन प्रशासन और सिंचाई विभाग की बेरुखी के कारण टीनशेड ही बनवाया गया और न ही महिलाओं के लिए वस्त्र बदलने के लिए कोई इंतजाम ही किए गए हैं। इसके चलते महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है। इतना ही नहीं बसों से यात्रा कर संगम पर स्नान के लिए वाले श्रद्धालुओं को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से करीब छह किलोमीटर की दूरी प्राईवेट या अपने वाहनों से करनी पड़ती है। कभी-कभी वाहन के अभाव में पैदल चलना पड़ता है। प्रशासन द्वारा संगम स्थल पर श्रृद्धालुओं के लिए वाहनों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
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इस संबंध में ग्राम प्रधान रमेश सैनी, पूर्व ग्राम प्रधान ओमबीर सिंह, पूर्व उपप्रमुख विजेंद्र पुंडीर, पूर्व समिति चेयरमैन कुलदीप सिंह, प्रमोद राणा, ठाकुर केहर सिंह, राजेंद्र कुमार, महेंद्र सिंह, रामबीर चौहान, प्रदीप कुमार, मदन सिंह, संजय सिंह आदि ने सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। एसडीएम संगीता गौतम का कहना है कि तहसील से इसके लिए कोई बजट नहीं है। यदि यह क्षेत्र ग्राम पंचायत में आता है तो इसमें पंचायत स्तर पर कार्य कराया जा सकता है। वे इस मामले को दिखवाएंगी।