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जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट जाएगी कांग्रेस: मसूद
Updated Sat, 01 Dec 2018 12:09 AM IST
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सहारनपुर। पुनरीक्षण में मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम हटाने के मामले को कांग्रेस मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है। शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद ने कहा कि मामले में निर्वाचन आयोग और प्रशासन ने 15 दिन के भीतर जांच कर कार्रवाई नहीं कराई और न्याय नहीं मिला, तो पार्टी सुप्रीम कोर्ट जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह आंध्र प्रदेश में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे, वैसी ही साजिश उत्तर प्रदेश में भी की जा रही है।
शुक्रवार को चकरोता रोड पर कांग्रेस के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष जावेद साबरी के आवास पर प्रेसवार्ता के दौरान इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि नगर विधान सभा क्षेत्र के पोलिंग स्टेशन नंबर एक से 15, 18 से 21 तथा 23 के बीएलओ को प्रशासन द्वारा 100-100 फॉर्म नंबर 07 भरे हुए दिए गए हैं। जिनको देखने से प्रतीत होता है कि सभी फॉर्म एक ही हस्तलिपि से भरे गए हैं। आरोप है कि बीएलओ पर वोटों को निरस्त करने की संस्तुति वाली रिपोर्ट लगाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के फार्म 7 भरकर सौंपे गए हैं, वह अधिकांश अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित हैं और अपने अपने घरों पर रह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सहारनपुर के एक विधानसभा क्षेत्र में करीब 16 हजार मतदाताओं के नाम काटने की फार्म गलत ढंग से भरे गए हैं, यदि पूरे प्रदेश में यही खेल चलाया गया है तो यह संख्या 50 लाख से भी ज्यादा हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि एक सुपरवाइजर द्वारा उक्त फार्म के पैकेट बनाकर बीएलओ को सौंपे गए हैं। प्रशासन द्वारा नाम हटाने के आरोप को बेबुनियाद बताए जाने के सवाल पर इमरान मसूद ने कहा कि इससे पहले आंध्र प्रदेश में ऐसा हो चुका है। मसूद ने बताया कि वह मुख्य निर्वाचन आयोग से मिलने का समय लेंगे। उन्हें 15 दिन का समय दिया जाएगा। यदि निर्वाचन आयोग से न्याय नहीं मिलता है तो पार्टी सुप्रीम कोर्ट जाएगी। पत्रकार वार्ता में सहारनपुर देहात से कांग्रेस विधायक मसूद अख्तर, बेहट विधायक नरेश सैनी, कार्यवाहक जिलाध्यक्ष जावेद साबरी समेत अन्य कांग्रेस नेता भी मौजूद रहे।
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शुक्रवार को चकरोता रोड पर कांग्रेस के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष जावेद साबरी के आवास पर प्रेसवार्ता के दौरान इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि नगर विधान सभा क्षेत्र के पोलिंग स्टेशन नंबर एक से 15, 18 से 21 तथा 23 के बीएलओ को प्रशासन द्वारा 100-100 फॉर्म नंबर 07 भरे हुए दिए गए हैं। जिनको देखने से प्रतीत होता है कि सभी फॉर्म एक ही हस्तलिपि से भरे गए हैं। आरोप है कि बीएलओ पर वोटों को निरस्त करने की संस्तुति वाली रिपोर्ट लगाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के फार्म 7 भरकर सौंपे गए हैं, वह अधिकांश अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित हैं और अपने अपने घरों पर रह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सहारनपुर के एक विधानसभा क्षेत्र में करीब 16 हजार मतदाताओं के नाम काटने की फार्म गलत ढंग से भरे गए हैं, यदि पूरे प्रदेश में यही खेल चलाया गया है तो यह संख्या 50 लाख से भी ज्यादा हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि एक सुपरवाइजर द्वारा उक्त फार्म के पैकेट बनाकर बीएलओ को सौंपे गए हैं। प्रशासन द्वारा नाम हटाने के आरोप को बेबुनियाद बताए जाने के सवाल पर इमरान मसूद ने कहा कि इससे पहले आंध्र प्रदेश में ऐसा हो चुका है। मसूद ने बताया कि वह मुख्य निर्वाचन आयोग से मिलने का समय लेंगे। उन्हें 15 दिन का समय दिया जाएगा। यदि निर्वाचन आयोग से न्याय नहीं मिलता है तो पार्टी सुप्रीम कोर्ट जाएगी। पत्रकार वार्ता में सहारनपुर देहात से कांग्रेस विधायक मसूद अख्तर, बेहट विधायक नरेश सैनी, कार्यवाहक जिलाध्यक्ष जावेद साबरी समेत अन्य कांग्रेस नेता भी मौजूद रहे।
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