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बारीक धान की खरीदारी नहीं होने से किसान लुटने को मजबूर
Updated Sat, 27 Oct 2018 12:22 AM IST
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रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। सरकारी धान खरीद केन्द्रों पर बारीक धान की खरीदारी नहीं किए जाने पर किसान बिचौलियों के हाथों लुटने के लिए मजबूर है। किसानों का कहना है कि इस बार खेतों में मोटा धान काफी कम है। ऐसे में सरकार बारीक धान की खरीदारी नहीं कर रही है तो वह अपने धान को कहां पर बेचे।
सरकारी धान खरीद केन्द्रों पर मोटे धान को 1750 व 1770 रुपये प्रति कुंतल खरीदा जा रहा है। वह भी इस शर्त पर की धान साफ-स्वच्छ होना चाहिए। बता दें कि इस बार किसानों के पास मोटे धान का रकबा काफी कम है और बारीक धान जिसमें 1509, बासमती, तुडल, सरबती, साकेत आदि वैराइटी किसानों के खेतों में खड़ी है। बारीक धान की फसल को सरकारी धान खरीद केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों के समक्ष बड़ा संकट खड़ा हो गया है, पैसे में अभाव में किसान बिचौलियों के हाथों लुटने के लिए विवश है।
क्षेत्र के किसान नरेश पंवार का कहना है कि सरकार के सभी वादे खोखले साबित हो रहे हैं। सरकार किसानों की आय दो गुनी करने का राग अलाप रही है। जबकि किसानों की खून पसीने से तैयार की गई बारीक धान की फसल को सरकार नहीं खरीद रही है। सरकारी केंद्रों पर मात्र दिखावे के लिए मोटे धान को खरीदा जा रहा है। किसान अहसान का कहना है कि धान को लेकर किसान आज असमंजस की स्थिति में है। बारीक धान की खरीदारी बिचौलिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां सरकार बिचौलियां प्रथा को समाप्त करने की बात करती है, वहीं सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान बिचौलियों को अपना धान सस्ते दामों पर बेचने के लिए मजबूर है। किसान छोटन सिंह ने बताया कि धान केंद्र पर 1509 की खरीदारी नहीं की जा रही है, उसे अपना धान खेत में ही बिचौलिए को 2500 रुपये प्रति कुंतल बेचना पड़ा है जबकि इस धान का रेट तीन हजार रुपये प्रति कुंतल है।
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उधर, धान खरीद केंद्र के एसएमआई इरफान अली का कहना है कि सरकार का नियम है कि केंद्र पर मोटा धान ही खरीदा जाएगा। वह बारीक धान खरीदने के लिए बाध्य नहीं है। इसके अलावा यहां मंडी समिति में दो दशक पूर्व धान की खरीदारी लाइसेंसधारी आढ़तियों द्वारा जमकर की जाती थी, परंतु डेढ़ दशक से इस मंडी समिति से आढ़तियों ने अपना कारोबार बंद लिया और अपने प्रतिष्ठानों पर ताले लटका दिए। दो दशक पूर्व इस क्षेत्र में आधा दर्जन राइस मिल हुआ करती थी, आज सभी राइस मिलों पर ताले लटके हुए है।
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सरकारी धान खरीद केन्द्रों पर मोटे धान को 1750 व 1770 रुपये प्रति कुंतल खरीदा जा रहा है। वह भी इस शर्त पर की धान साफ-स्वच्छ होना चाहिए। बता दें कि इस बार किसानों के पास मोटे धान का रकबा काफी कम है और बारीक धान जिसमें 1509, बासमती, तुडल, सरबती, साकेत आदि वैराइटी किसानों के खेतों में खड़ी है। बारीक धान की फसल को सरकारी धान खरीद केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों के समक्ष बड़ा संकट खड़ा हो गया है, पैसे में अभाव में किसान बिचौलियों के हाथों लुटने के लिए विवश है।
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क्षेत्र के किसान नरेश पंवार का कहना है कि सरकार के सभी वादे खोखले साबित हो रहे हैं। सरकार किसानों की आय दो गुनी करने का राग अलाप रही है। जबकि किसानों की खून पसीने से तैयार की गई बारीक धान की फसल को सरकार नहीं खरीद रही है। सरकारी केंद्रों पर मात्र दिखावे के लिए मोटे धान को खरीदा जा रहा है। किसान अहसान का कहना है कि धान को लेकर किसान आज असमंजस की स्थिति में है। बारीक धान की खरीदारी बिचौलिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां सरकार बिचौलियां प्रथा को समाप्त करने की बात करती है, वहीं सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान बिचौलियों को अपना धान सस्ते दामों पर बेचने के लिए मजबूर है। किसान छोटन सिंह ने बताया कि धान केंद्र पर 1509 की खरीदारी नहीं की जा रही है, उसे अपना धान खेत में ही बिचौलिए को 2500 रुपये प्रति कुंतल बेचना पड़ा है जबकि इस धान का रेट तीन हजार रुपये प्रति कुंतल है।
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उधर, धान खरीद केंद्र के एसएमआई इरफान अली का कहना है कि सरकार का नियम है कि केंद्र पर मोटा धान ही खरीदा जाएगा। वह बारीक धान खरीदने के लिए बाध्य नहीं है। इसके अलावा यहां मंडी समिति में दो दशक पूर्व धान की खरीदारी लाइसेंसधारी आढ़तियों द्वारा जमकर की जाती थी, परंतु डेढ़ दशक से इस मंडी समिति से आढ़तियों ने अपना कारोबार बंद लिया और अपने प्रतिष्ठानों पर ताले लटका दिए। दो दशक पूर्व इस क्षेत्र में आधा दर्जन राइस मिल हुआ करती थी, आज सभी राइस मिलों पर ताले लटके हुए है।