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दो मुंह वाले सांपों की नहीं सता में जरूरत

Sat, 15 Sep 2018 12:31 AM IST
Updated Sat, 15 Sep 2018 12:31 AM IST
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दो मुंह वाले सांपों की नहीं सता में जरूरत
सहारनपुर। हिंसा में 464 दिन जेल में रहकर रिहा हुए भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण की भाजपा को लेकर तीखे तेवरों में कोई कमी नहीं आई है। दिन भर कार्यकर्ताओं के जश्न का हिस्सा बने रावण बहुजन समाज को जागरूक करने और उत्पीड़न करने वालों पर गरजते रहे। उन्होंने दो टूक कहा कि भाजपा दो मुंह वाले सांपों की पार्टी है, जिसने सामाजिक ढांचे को तोड़ने का प्रयास किया है। ऐसे सांपों की सत्ता में जरूरत नहीं है। भीम आर्मी प्रमुख रावण से अमर उजाला संवाददाता राकेश शर्मा ने राजनीति, संगठन और आगामी रणनीति को खुलकर बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश--
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सवाल--रासुका में अवधि से पहले योगी सरकार के रिहा कराने के फैसले को किस रुप में लेते हैं।
रावण---मै तो वजह कुछ नहीं कह सकता, क्योंकि उनकी दिली इच्छा हुई तो उठाकर बंद कर दिया था, उनकी इच्छा हुई छोड़ दिया। मै तो सरकार का अंग नहीं हूं, आम आदमी हूं। जब आदमी तानाशाह हो जाता है तो उसका जो मन आता है करता है। एससी एसटी एक्ट पर पूरा सवर्ण समाज विरोधी हो गया तो भाजपा सरकार ने सोचा कि दलित को रिझाने के लिए चंद्रशेखर को रिहा कर दो। ताकि दलितों को गुमराह कर उनका वोट हासिल किया जा सके। सरकार ने सोचा कि रावण को नवंबर में तो बाहर आना ही है। ऐसे में अभी रिहा करके दलितों को रिझा लो। हो सकता है कि उन्हें बाहर लाकर फिर से फंसा दिया जाए। उनकी मंशा तो वो ही जाने।
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सवाल-भीम आर्मी अराजनैतिक रहेगी या फिर चुनाव लड़ेगी
जवाब-भीम आर्मी पूरी तरह अराजनैतिक रहेगी। आगामी चुनाव में यदि मजबूत गठबंधन होता है तो भाजपा को हराने के लिए वह तत्पर खड़े रहेंगे। किसी भी सूरत में भाजपा को सत्ता में 2019 में वापसी नहीं करने देंगे। उनकी तो घर वापसी करा देंगे। भाजपा का मंत्रिमंडल और हमारे विश्वसनीय नेता मोदी जी बेचारे थक गए हैं। पांच साल बहुत काम किया है। उन्हें आराम की जरूरत है। नागरिक होने के चलते उनका दायित्व बनता है कि उन्हें आराम देने का काम करें। पांच साल आराम करें, फिर देख लेंगे दोबारा। भाजपा में दो मुंह वाले सांप ज्यादा हैं। ऐसी सत्ता पहली बार आई है, जिसने समाज को सबसे ज्यादा कमजोर किया है।
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सवाल-सियासी गलियारों में आपके चुनाव लड़ने का शोर है। क्या चुनाव लड़ने का प्लान है।
जवाब-चुनाव लड़ने की कोई तैयारी नहीं है। भीम आर्मी कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं करेगी। भीम आर्मी जल्द ही अपनी रणनीति तय कर सार्वजनिक करेगी। देश भर में मजबूत संगठन बनाने के साथ बहुजन समाज को जागरूक करने के लिए रैली और सभाएं आयोजित की जाएंगी। स्वर्गीय कांशीराम ने कहा कि वोट का अधिकार बिकने के लिए नहीं गुलामी से मुक्ति के लिए मिला है। बाबा साहेब ने भी संसद का रास्ता दिखाया है। बहुजन समाज के लोगों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में संसद पहुंचाने का काम किया जाएगा।

-सवाल-बसपा से रिश्तों को लेकर भीम आर्मी का क्या नजरिया रहेगा।
जवाब-बसपा बहुजन समाज की पार्टी है। बसपा प्रमुख मायावती मेरी बुआ हैं। वह उनका पूरा सम्मान करते हैं। व्यक्तिगत रूप से उनकी कोई लड़ाई नहीं है। बुआ ने लंबे संघर्ष के साथ समाज के लिए बहुत कुछ किया है। मै अपना काम कर रहा हूं। वो अपना काम कर रही हैं। भीम आर्मी किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं है। यह देश सबका है। सब सम्मान और प्यार से रहकर सामाजिक ढांचे को मजबूत बनाएं।


सवाल-वेस्ट यूपी में खासतौर पर सहारनपुर में राजपूत समाज से बढ़ी दूरियों को पाटने का प्रयास करेंगे।
जवाब - मै इसलिए प्रयास नहीं कर सकता हूं क्योंकि उसमें मेरा कोई रोल नहीं है। मेरा रोल तो सिर्फ दूधली में भाजपा सांसद द्वारा बिना अनुमति के शोभायात्रा को निकालने को लेकर हुआ था। उसी रंजिश में रासुका लगाई गई थी। शब्बीरपुर हिंसा के दौरान मैं मौके पर नहीं था। मैं तो डीएम के बुलावे पर गया था। उठाकर बंद करा दिया झूठे मुकदमों में। जेल भेजकर उनके 16 माह खराब करा दिए।
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