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हाईवे के सहारे सियासी लाभ की तैयारी
Updated Tue, 11 Sep 2018 12:22 AM IST
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सहारनपुर। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के शिलान्यास के बहाने भाजपा वेस्ट यूपी के उप चुनाव में हुए नुकसान की भरपाई का इरादा रखती हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हाईवे का शिलान्यास करने के पीछे पार्टी की पूरी रणनीति यही है। भाजपा के सामने इस बार डबल चुनौती है। एक तो पश्चिम में खिसकते जनाधार को थामना और दूसरा एकजुट महागठबंधन से मुकाबला। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जानता है कि विकास को बड़ा मुद्दा बनाकर ही जीत की राह पर चला जा सकता हैं।
2014 के लोकसभा और 2017 में हुए विधानसभा में भाजपा वेस्ट यूपी में लोगों के सिर चढ़कर बोली थी। प्रदेश में योगी सरकार को एक साल बाद ही उप चुनाव में इलाके के लोगों ने करारा झटका भी दे दिया। उप चुनाव में कैराना संसदीय क्षेत्र और बिजनौर की विधानसभा सीट भाजपा के हाथों से निकल गई है। यह स्थिति तब थी, जब पूरी सरकार उप चुनाव जीतने को दिन-रात इन क्षेत्रों में डेरा डाले रही। खिसकते जनाधार को लेकर भाजपा की चिंता किसी से छिपी नहीं है। छह माह बाद लोकसभा चुनाव होने है। चुनाव से पहले दिल्ली-सहारनपुर हाईवे को फोरलेन का पासा फेंककर भाजपा वेस्ट यूपी के मतदाताओं को रिझाने का ताना-बाना बुना है। केन्द्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका शिलान्यास करेंगे। शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर पार्टी कार्यकर्ता हाईवे के फोरलेन निर्माण को जोर-शोर से प्रचारित करने में लगे है, ताकि हाईवे शिलान्यास का सियासी लाभ लिया जा सके। विपक्ष भी भाजपा की इस रणनीति को यह कहकर फेल करने में लगा है कि भाजपा को चुनाव से पहले ही इस हाईवे की याद आई है। 2014 में भाजपा ने हाईवे की दुर्दशा को लेकर वोट बटोरी थी। शिलान्यास के बहाने भाजपा वेस्ट यूपी में कितना सियासी लाभ ले पाती है, यह तो भविष्य के गर्भ में है, मगर यह तय है कि आने वाले दिनो में हाईवे निर्माण को लेकर भाजपा और विपक्ष में तलवारें खींचने वाली हैं।
शशिबाला ने उठाए सवाल
भाजपा को बाय कहने वाली पूर्व विधायक शशिबाला पुंडीर ने हाईवे के शिलान्यास को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सपा शासन में उपसा के द्वारा इस हाईवे पर काफी काम करा दिया था। पेड़ कट गए, जमीन का अधिग्रहण हो गया, अधिकांश पुलिया बन गई। अब सांसद राघव लखनपाल उसका फिर से शिलान्यास करा रहे हैं। भाजपा चुनाव नजदीक आते देख इस हाईवे को नेशनल हाईवे घोषित कराकर चुनावी लाभ लेने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कार्यक्रम के खर्च को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
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2014 के लोकसभा और 2017 में हुए विधानसभा में भाजपा वेस्ट यूपी में लोगों के सिर चढ़कर बोली थी। प्रदेश में योगी सरकार को एक साल बाद ही उप चुनाव में इलाके के लोगों ने करारा झटका भी दे दिया। उप चुनाव में कैराना संसदीय क्षेत्र और बिजनौर की विधानसभा सीट भाजपा के हाथों से निकल गई है। यह स्थिति तब थी, जब पूरी सरकार उप चुनाव जीतने को दिन-रात इन क्षेत्रों में डेरा डाले रही। खिसकते जनाधार को लेकर भाजपा की चिंता किसी से छिपी नहीं है। छह माह बाद लोकसभा चुनाव होने है। चुनाव से पहले दिल्ली-सहारनपुर हाईवे को फोरलेन का पासा फेंककर भाजपा वेस्ट यूपी के मतदाताओं को रिझाने का ताना-बाना बुना है। केन्द्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका शिलान्यास करेंगे। शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर पार्टी कार्यकर्ता हाईवे के फोरलेन निर्माण को जोर-शोर से प्रचारित करने में लगे है, ताकि हाईवे शिलान्यास का सियासी लाभ लिया जा सके। विपक्ष भी भाजपा की इस रणनीति को यह कहकर फेल करने में लगा है कि भाजपा को चुनाव से पहले ही इस हाईवे की याद आई है। 2014 में भाजपा ने हाईवे की दुर्दशा को लेकर वोट बटोरी थी। शिलान्यास के बहाने भाजपा वेस्ट यूपी में कितना सियासी लाभ ले पाती है, यह तो भविष्य के गर्भ में है, मगर यह तय है कि आने वाले दिनो में हाईवे निर्माण को लेकर भाजपा और विपक्ष में तलवारें खींचने वाली हैं।
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शशिबाला ने उठाए सवाल
भाजपा को बाय कहने वाली पूर्व विधायक शशिबाला पुंडीर ने हाईवे के शिलान्यास को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सपा शासन में उपसा के द्वारा इस हाईवे पर काफी काम करा दिया था। पेड़ कट गए, जमीन का अधिग्रहण हो गया, अधिकांश पुलिया बन गई। अब सांसद राघव लखनपाल उसका फिर से शिलान्यास करा रहे हैं। भाजपा चुनाव नजदीक आते देख इस हाईवे को नेशनल हाईवे घोषित कराकर चुनावी लाभ लेने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कार्यक्रम के खर्च को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
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