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फजीहत होने के बाद दारुल उलूम के मोहतमिम ने बदला बयान

Sat, 11 Aug 2018 12:40 AM IST
Updated Sat, 11 Aug 2018 12:40 AM IST
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फजीहत होने के बाद दारुल उलूम के मोहतमिम ने बदला बयान
फजीहत होने के बाद मोहतमिम ने बदला बयान
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देवबंद । दारुल उलूम वक्फ के सेमिनार में शामिल न होने वाले बयान को दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने वापस ले लिया है। इस्लामिक हल्कों में फजीहत होने के बाद शुक्रवार को मोहतमिम ने जारी किए दूसरे बयान में कहा कि वाकयात और दलील की रोशनी में यह बात साफ हो गई है कि किसी की वफात (मौत) या फिर कारनामों के जिक्र के लिए जो मजलिस की जाए वो नौहा (मातम) की श्रेणी में नहीं आते। इसलिए वह मौलाना सालिम कासमी की जिंदगी और सेवाओं पर होने वाले सेमिनार में शिरकत करेंगे।

दारुल उलूम वक्फ में सदर मोहतमिम व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना सालिम कासमी की जिंदगी और सेवाओं को लेकर दारुल उलूम वक्फ में हुज्जतुल इस्लाम एकेडमी की ओर से 12 अगस्त को दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन होना है। जिसमें शामिल होने के लिए दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी और सदर मुदर्रिस मौलाना मुफ्ती सईद अहमद पालनपुरी को दावतनामे भेजे गए थे। लेकिन दोनों उलमा ने सेमिनार को नौहा (मातम) की श्रेणी का बताते हुए इसे गैर शरई करार देकर इसमें शिरकत करने से इंकार कर दिया था। बाकायदा इसके लिए उन्होंने दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी को पत्र भेजकर माफी भी चाही थी। लेकिन शुक्रवार को दारुल उलूम के मोहतमिम ने अपने बयान को बदल दिया। मौलाना सुफियान के नाम जारी किए गए दूसरे पत्र में मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि किसी के निधन या कारनामों के जिक्र की खातिर अगर कोई मजलिस आयोजित की जाए तो वो नौहा और जहालियत की श्रेणी में नहीं आती। यह अलग बात है कि अगर कोई और शरई मामला हो तो इस तरह की मजलिस में शिरकत करने से बचा जाए। उन्होंने अपनी इस बदली हुई राय से मुफ्ती सईद को भी अवगत करा दिया है। कहा कि अगर मुफ्ती सईद भी अपनी राय बदल देते हैं तो यह बहुत बेहतर है वरना यह उनकी निजी राय मानी जाएगी और इसे अकाबिर देवबंद का मसलक नहीं कहा जाएगा। क्योंकि देवबंदियत शरीयत को मानने वाले और सुन्नत की परैवी करने वाले से अलग नहीं है। इसलिए मैं सेमिनार में शिरकत करुंगा। इसके साथ ही उन्होंने पत्र में यह भी लिखा है कि वह वीडियोग्राफी से बचने की कोशिश करते हैं। इसलिए दारुल उलूम वक्फ प्रबंधन से उम्मीद है कि वह इसका ख्याल रखेंगे। उधर, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी ने मुफ्ती अबुल कासिम के बदले बयान का स्वागत किया है।
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