{"_id":"5a775dc84f1c1b8a268b8733","slug":"181517772232-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पश्चिम में राजनीतिक बारीकियों के विश्वविदयालय थे सांसद हुकूम सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पश्चिम में राजनीतिक बारीकियों के विश्वविदयालय थे सांसद हुकूम सिंह
Updated Mon, 05 Feb 2018 01:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पश्चिम में राजनीतिक बारीकियों के विश्वविद्यालय थे सांसद हुकुम सिंह
सहारनपुर। सियासत के माहिर खिलाड़ी रहे स्व. हुकुम सिंह के निधन ने राजनीति से जुड़े लोगों को सदमे में डाल दिया है। विधानसभा और लोकसभा में जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी बेबाक बात के लिए अलग पहचान रखने वाले सांसद हुकुम सिंह सभी के दिल में अलग स्थान रखते थे। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उनके साथी सांसद राघव लखनपाल शर्मा, हुकुम सिंह को राजनीति से लेकर हर क्षेत्र का इनसाइक्लोपीडिया मानते हैं। उनका कहना है कि विधानसभा से लेकर लोकसभा तक वे अपने जूनियर को हर कदम पर सिखाते और बताते थे। महज अपनी ही पार्टी के नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं को सिखाने में वे हिचकते नहीं थे। वे पूरे पश्चिम में राजनीतिक बारीकियों के विश्वविद्यालय के रूप में हमारे बीच थे।13 दिसंबर को सहारनपुर में विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान मौजूदा सांसद हुकुम सिंह की पारखी निगाहों ने अफसरों की कागजी हेराफेरी को पकड़ा था। उस बैठक का जिक्र करते हुए सांसद राघव बताते हैं कि कई बार उनके साथ ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया। अधिकारियों की अप टू डेट फरफॉरमेंस नहीं होने पर बाबू जी समझाते थे और अधिकारियों की कमी निकालकर उन्हें शर्मिंदा कर देते थे। अपने अनुभवों को विधानसभा से लेकर संसद तक में लोगों के बीच सांझा करते रहते थे। उन्होंने बताया कि किसानों और आम आदमी से जुड़े मुद्दे को लेकर वे हमेशा संवेदनशील रहते थे। अपनी ही सरकार में किसानों के भुगतान का मुद्दा उन्होंने संसद में उठाया था। वर्ष 2012 में विधानसभा में तत्कालीन मंत्री आजम खान के बोलने के बाद भाजपा की ओर से विधान मंडल दल के नेता हुकुम सिंह ने संसदीय भाषा में सरकार की घेराबंदी। सांसद राघव लखनपाल शर्मा बताते हैं कि अनुश्रवण समिति की बैठक में सांसद हुकुम सिंह सहारनपुर आते थे। उन्हें मैं हमेशा चेयरपर्सन के रूप में बैठाता था, मेरा मन रखने के लिए कुर्सी पर बैठते थे, मगर बैठक समाप्त करने के लिए वे हमेशा मुझे ही कहते थे। उस दौरान सभी दलों के लोग मौजूद होते थे और उस वक्त उनके बीच बाबूजी का सम्मान देखते ही बनता था।
विज्ञापन
सहारनपुर। सियासत के माहिर खिलाड़ी रहे स्व. हुकुम सिंह के निधन ने राजनीति से जुड़े लोगों को सदमे में डाल दिया है। विधानसभा और लोकसभा में जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी बेबाक बात के लिए अलग पहचान रखने वाले सांसद हुकुम सिंह सभी के दिल में अलग स्थान रखते थे। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उनके साथी सांसद राघव लखनपाल शर्मा, हुकुम सिंह को राजनीति से लेकर हर क्षेत्र का इनसाइक्लोपीडिया मानते हैं। उनका कहना है कि विधानसभा से लेकर लोकसभा तक वे अपने जूनियर को हर कदम पर सिखाते और बताते थे। महज अपनी ही पार्टी के नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं को सिखाने में वे हिचकते नहीं थे। वे पूरे पश्चिम में राजनीतिक बारीकियों के विश्वविद्यालय के रूप में हमारे बीच थे।13 दिसंबर को सहारनपुर में विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान मौजूदा सांसद हुकुम सिंह की पारखी निगाहों ने अफसरों की कागजी हेराफेरी को पकड़ा था। उस बैठक का जिक्र करते हुए सांसद राघव बताते हैं कि कई बार उनके साथ ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया। अधिकारियों की अप टू डेट फरफॉरमेंस नहीं होने पर बाबू जी समझाते थे और अधिकारियों की कमी निकालकर उन्हें शर्मिंदा कर देते थे। अपने अनुभवों को विधानसभा से लेकर संसद तक में लोगों के बीच सांझा करते रहते थे। उन्होंने बताया कि किसानों और आम आदमी से जुड़े मुद्दे को लेकर वे हमेशा संवेदनशील रहते थे। अपनी ही सरकार में किसानों के भुगतान का मुद्दा उन्होंने संसद में उठाया था। वर्ष 2012 में विधानसभा में तत्कालीन मंत्री आजम खान के बोलने के बाद भाजपा की ओर से विधान मंडल दल के नेता हुकुम सिंह ने संसदीय भाषा में सरकार की घेराबंदी। सांसद राघव लखनपाल शर्मा बताते हैं कि अनुश्रवण समिति की बैठक में सांसद हुकुम सिंह सहारनपुर आते थे। उन्हें मैं हमेशा चेयरपर्सन के रूप में बैठाता था, मेरा मन रखने के लिए कुर्सी पर बैठते थे, मगर बैठक समाप्त करने के लिए वे हमेशा मुझे ही कहते थे। उस दौरान सभी दलों के लोग मौजूद होते थे और उस वक्त उनके बीच बाबूजी का सम्मान देखते ही बनता था।