{"_id":"5a0b39c44f1c1bd7538bd689","slug":"181510685124-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सऊदी अरब की तब्दीलियों को हम माने ये जरुरी नहीं: उलमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सऊदी अरब की तब्दीलियों को हम माने ये जरुरी नहीं: उलमा
Updated Wed, 15 Nov 2017 12:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
देवबंद (सहारनपुर)। सऊदी अरब में योग को खेल के रुप में अनिवार्य किए जाने के मामले में देवबंदी उलमा का कहना है कि सऊदी हुकूमत ने स्कूलों में वर्जिश को अनिवार्य किया है। योगा शिर्क (गलत) है इसलिए वहां की हुकूमत उसे कभी लागू नहीं कर सकती।
मंगलवार को फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि जैसा की खबरों में बताया जा रहा है कि सऊदी अरब के स्कूलों में किसी चीज को अनिवार्य किया गया है वो योगा नहीं बल्कि वर्जिश है। शरीयत के लिहाज से योग शिर्क है और सऊदी अरब अपने यहां शिर्क को कभी लागू नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वर्जिश सही है, लेकिन योगा इस्लामी नुकते नजर से गलत है। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि सऊदी अरब इस वक्त तब्दीली के दौर से गुजर रहा है और काफी बदलाव आ रहा है। शाह सलमान के बेटे मोहम्मद बिन सलमान वो अपने मुल्क में को एक मॉडर्न मुल्क के रुप में लाना चाहते हैं। दुनिया के नक्शे में वो जो तब्दीलियां कर रहे हैं जरूरी नहीं की हम भी उन्हें माने। हम सिर्फ शरीयत को मानते और उसी पर चलते हैं। इसलिए शरीयत में योगा की कोई गुंजाइश नहीं है। मौलाना वाजदी ने कहा कि सऊदी अरब इसकी इजाजत देता है या नहीं देता और योगा को खेल के रुप में देखता है या नहीं देखता यह हमारे लिए कोई अहमियत नहीं रखता। कहा कि सऊदी में और भी बहुत से चीजें हुई हैं और होने वाली हैं। लेकिन अगर वो शरीयत के अनुसार होंगी तो हम उसकी तारीफ करेंगे और अगर वो शरीयत के अनुसार नहीं होगी हम तस्दीक भी नहीं करेंगे।
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। सऊदी अरब में योग को खेल के रुप में अनिवार्य किए जाने के मामले में देवबंदी उलमा का कहना है कि सऊदी हुकूमत ने स्कूलों में वर्जिश को अनिवार्य किया है। योगा शिर्क (गलत) है इसलिए वहां की हुकूमत उसे कभी लागू नहीं कर सकती।
मंगलवार को फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि जैसा की खबरों में बताया जा रहा है कि सऊदी अरब के स्कूलों में किसी चीज को अनिवार्य किया गया है वो योगा नहीं बल्कि वर्जिश है। शरीयत के लिहाज से योग शिर्क है और सऊदी अरब अपने यहां शिर्क को कभी लागू नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वर्जिश सही है, लेकिन योगा इस्लामी नुकते नजर से गलत है। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि सऊदी अरब इस वक्त तब्दीली के दौर से गुजर रहा है और काफी बदलाव आ रहा है। शाह सलमान के बेटे मोहम्मद बिन सलमान वो अपने मुल्क में को एक मॉडर्न मुल्क के रुप में लाना चाहते हैं। दुनिया के नक्शे में वो जो तब्दीलियां कर रहे हैं जरूरी नहीं की हम भी उन्हें माने। हम सिर्फ शरीयत को मानते और उसी पर चलते हैं। इसलिए शरीयत में योगा की कोई गुंजाइश नहीं है। मौलाना वाजदी ने कहा कि सऊदी अरब इसकी इजाजत देता है या नहीं देता और योगा को खेल के रुप में देखता है या नहीं देखता यह हमारे लिए कोई अहमियत नहीं रखता। कहा कि सऊदी में और भी बहुत से चीजें हुई हैं और होने वाली हैं। लेकिन अगर वो शरीयत के अनुसार होंगी तो हम उसकी तारीफ करेंगे और अगर वो शरीयत के अनुसार नहीं होगी हम तस्दीक भी नहीं करेंगे।
विज्ञापन