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गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने दिखाए हैरतअंगेज करतब
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गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने योगासन से रोमांचित किया
बड़गांव। पिछले दो दिनों से दल्हेड़ी में मनाए जा रहे आर्य समाज के वार्षिकोत्सव का सोमवार को समापन हो गया। इस अवसर पर वैदिक गुरुकुल के बच्चों ने योगासन किया, जबकि आचार्यों ने प्रवचन के माध्यम से सद्मार्ग पर चलने को प्रेरित किया।
वैदिक गुरुकुल दल्हेड़ी में सोमवार को वार्षिकोत्सव के समापन अवसर पर पंडित कल्याणवेदी ने आर्य ने भजनों के माध्यम से दहेज प्रथा व नशा खोरी के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों में नैतिक गुणों का विकास करें तो सामाजिक बुराइयां स्वत: खत्म हो जाएंगी। डा धीरज आर्य ने कहा कि हमें अपने बच्चों के भविष्य के लिए वैदिक शिक्षा व संस्कार देने होंगे। वैदिक शिक्षा ही संस्कारों को बचा सकती है। इस मौके पर गुरुकुल दल्हेड़ी के ब्रह्मचारियों ने योगासन करते हुए अपने करतब दिखाए। प्रिया आर्या व रितेश आर्य ने भ्रूण हत्या को अभिशाप बताते हुए भजन प्रस्तुत किया। आचार्यों ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का शुभारंभ नकुड़ से आये आचार्य रणवीर ने यज्ञ के साथ किया। अध्यक्षता डा. महेशचंद आर्य ने की। संरक्षक रणवीर आर्य, किरणपाल आर्य, राजकुमार आर्य, कुलबीर आर्य, रामधन आर्य, सिंहराज आर्य, मा. रामधन आर्य, कुलदीप आर्य, मा प्रदीप आदि ने भाग लिया।
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बड़गांव। पिछले दो दिनों से दल्हेड़ी में मनाए जा रहे आर्य समाज के वार्षिकोत्सव का सोमवार को समापन हो गया। इस अवसर पर वैदिक गुरुकुल के बच्चों ने योगासन किया, जबकि आचार्यों ने प्रवचन के माध्यम से सद्मार्ग पर चलने को प्रेरित किया।
वैदिक गुरुकुल दल्हेड़ी में सोमवार को वार्षिकोत्सव के समापन अवसर पर पंडित कल्याणवेदी ने आर्य ने भजनों के माध्यम से दहेज प्रथा व नशा खोरी के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों में नैतिक गुणों का विकास करें तो सामाजिक बुराइयां स्वत: खत्म हो जाएंगी। डा धीरज आर्य ने कहा कि हमें अपने बच्चों के भविष्य के लिए वैदिक शिक्षा व संस्कार देने होंगे। वैदिक शिक्षा ही संस्कारों को बचा सकती है। इस मौके पर गुरुकुल दल्हेड़ी के ब्रह्मचारियों ने योगासन करते हुए अपने करतब दिखाए। प्रिया आर्या व रितेश आर्य ने भ्रूण हत्या को अभिशाप बताते हुए भजन प्रस्तुत किया। आचार्यों ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का शुभारंभ नकुड़ से आये आचार्य रणवीर ने यज्ञ के साथ किया। अध्यक्षता डा. महेशचंद आर्य ने की। संरक्षक रणवीर आर्य, किरणपाल आर्य, राजकुमार आर्य, कुलबीर आर्य, रामधन आर्य, सिंहराज आर्य, मा. रामधन आर्य, कुलदीप आर्य, मा प्रदीप आदि ने भाग लिया।
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