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वन रूम किचन के मंचन ने दर्शकों के मन पर छोड़ी छाप
Updated Tue, 28 Aug 2018 12:28 AM IST
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वन रूम किचन के मंचन ने दर्शकों के मन पर छोड़ी छाप
सहारनपुर। आईएमए भवन में रविवार की रात मंचित हुए वन रूम किचन नाटक के जरिए कलाकारों ने बड़े शहरों की जिंदगी को दर्शकों के सामने पेश किया। नाटक की कहानी और कलाकारों के दमदार अभिनय ने दर्शकों को देर रात तक नाटक के साथ बांधे रखा।
वन रूम किचन नाटक का लेखन एनएसडी के स्नातक इम्तियाज अहमद ने किया है। नाटक की कहानी एक बड़े शहर के वन रूम किचन फ्लैट में रहने वाले देश के अलग-अलग हिस्सों से आए युवाओं की कहानी है। इसमें ‘बड़े शहरों की भागमभाग और तमाम रिश्ते बेमानी नजर आते हैं’ को दिखाया गया है। एम फौजी के निर्देशन में आयोजित नाटक के पात्र शाहिद और दूसरे गोपाल को बड़े शहर का कल्चर पसंद नहीं आता है और वह शहर छोड़कर अपने गांव अपने शहर चले जाते हैं। तीसरा पात्र विशाल अपने प्यार लैला से धोखा खाकर वापस अपने शहर लौट जाता है। चौथा कैरेक्टर विकास बिना अपने घर वालों को बताए निलोफर नाम की लड़की से शादी कर वहीं बस जाता है। नाटक में दिखाया गया है कि लोग अंधी दौड़ में दौड़े जाते हैं। नाटक दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ने में सफल रहा। कलाकारों में एम मुजक्किर, शानू सिद्दीकी, अंकुश, इंद्रजीत जोशी, फरहान अख्तर, तान्या राजपूत, एलीशा रियाज, विशाल कुमार, अनुपमा पंडित, उमर फारूख, अब्दुल्ला रहे। मंच संचालन संदीप शर्मा ने किया। संगीत इश्तियाक अहमद ने दिया। इसमें प्रकश परिकल्पना एम फौजी, रविंद्र तेजान और विकास पाहवा की रही। एडीएम वित्त एवं राजस्व विनोद कुमार, कुलदीप धमीजा, रमा गुप्ता, सरदार अनवर, जावेद खान सरोहा, सरताज अहमद, दिनेश तेजान, प्रशांत राजन, निमिश भटनागर आदि मौजूद रहे।
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सहारनपुर। आईएमए भवन में रविवार की रात मंचित हुए वन रूम किचन नाटक के जरिए कलाकारों ने बड़े शहरों की जिंदगी को दर्शकों के सामने पेश किया। नाटक की कहानी और कलाकारों के दमदार अभिनय ने दर्शकों को देर रात तक नाटक के साथ बांधे रखा।
वन रूम किचन नाटक का लेखन एनएसडी के स्नातक इम्तियाज अहमद ने किया है। नाटक की कहानी एक बड़े शहर के वन रूम किचन फ्लैट में रहने वाले देश के अलग-अलग हिस्सों से आए युवाओं की कहानी है। इसमें ‘बड़े शहरों की भागमभाग और तमाम रिश्ते बेमानी नजर आते हैं’ को दिखाया गया है। एम फौजी के निर्देशन में आयोजित नाटक के पात्र शाहिद और दूसरे गोपाल को बड़े शहर का कल्चर पसंद नहीं आता है और वह शहर छोड़कर अपने गांव अपने शहर चले जाते हैं। तीसरा पात्र विशाल अपने प्यार लैला से धोखा खाकर वापस अपने शहर लौट जाता है। चौथा कैरेक्टर विकास बिना अपने घर वालों को बताए निलोफर नाम की लड़की से शादी कर वहीं बस जाता है। नाटक में दिखाया गया है कि लोग अंधी दौड़ में दौड़े जाते हैं। नाटक दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ने में सफल रहा। कलाकारों में एम मुजक्किर, शानू सिद्दीकी, अंकुश, इंद्रजीत जोशी, फरहान अख्तर, तान्या राजपूत, एलीशा रियाज, विशाल कुमार, अनुपमा पंडित, उमर फारूख, अब्दुल्ला रहे। मंच संचालन संदीप शर्मा ने किया। संगीत इश्तियाक अहमद ने दिया। इसमें प्रकश परिकल्पना एम फौजी, रविंद्र तेजान और विकास पाहवा की रही। एडीएम वित्त एवं राजस्व विनोद कुमार, कुलदीप धमीजा, रमा गुप्ता, सरदार अनवर, जावेद खान सरोहा, सरताज अहमद, दिनेश तेजान, प्रशांत राजन, निमिश भटनागर आदि मौजूद रहे।
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