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रमजान में रकम तय कर कुरआन पाक सुनाना नाजायज: उलेमा
Updated Thu, 17 May 2018 09:28 PM IST
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उलमा बोले : कुरआन पाक सुनाना अल्लाह की इबादत और इबादत की कोई कीमत नहीं होती
फोटो संख्या 1
अमर उजाला ब्यूरो
देवबंद(सहारनपुर)। मुकद्दस रमजान माह की तरावीह में रकम तय करके कुरआन पाक सुनाना नाजायज है। देवबंदी उलमा का कहना है कि जो हाफिज इस तरह का मामला करते हैं वो गुनाह में शामिल होते हैं। क्योंकि कुरआन सुनाना एक इबादत है और इबादत की कोई कीमत नहीं होती।
पवित्र रमजान के महीने में लोग मस्जिदों, घरों और प्रतिष्ठानों पर तरावीह का इंतजाम करते हैं। जिसमें कुरआन पाक सुनाने के लिए एक हाफिज रखा जाता है। जो सुविधा के मुताबिक 10, 15 या 28 दिन में कुरआन पाक पूरा करता है। कुरआन पाक सुनना रमजान माह का एक बड़ा हिस्सा है, लेकिन कुछ जगह पर देखने में आया है कि लोग कुरआन पाक सुनाने के लिए हाफिज से रकम तय कर लेते हैं या फिर कहीं बाहर जाने के लिए हाफिज स्वयं पैसे की बात तय कर लेता है। इस तरह का अमल करने के मामले में फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि तरावीह में कुरआन सुनाने के नाम पर पैसे देने और लेने वाला दोनों ही अल्लाह के नजदीक बड़े मुजरिम होते हैं। साथ ही उनका यह अमल नाजायज है। मुफ्ती अरशद ने कहा कि कुरआन सुनाने वाले हाफिज को ईद मनाने के लिए कुछ दिया जा सकता है, लेकिन नीयत में यह न हो कि वह हाफिज को कुरआन सुनाने के नाम पर पैसे या कपड़ा दे रहे हैं। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने भी कुरआन के नाम पर लेन देन तय करने को सरासर नाजायज बताते हुए कहा कि हाफिज से बात करते समय लेन देन का जिक्र नहीं होना चाहिए। क्योंकि कुरआन एक इबादत है और इबादत की कोई कीमत नहीं होती।
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अमर उजाला ब्यूरो
देवबंद(सहारनपुर)। मुकद्दस रमजान माह की तरावीह में रकम तय करके कुरआन पाक सुनाना नाजायज है। देवबंदी उलमा का कहना है कि जो हाफिज इस तरह का मामला करते हैं वो गुनाह में शामिल होते हैं। क्योंकि कुरआन सुनाना एक इबादत है और इबादत की कोई कीमत नहीं होती।
पवित्र रमजान के महीने में लोग मस्जिदों, घरों और प्रतिष्ठानों पर तरावीह का इंतजाम करते हैं। जिसमें कुरआन पाक सुनाने के लिए एक हाफिज रखा जाता है। जो सुविधा के मुताबिक 10, 15 या 28 दिन में कुरआन पाक पूरा करता है। कुरआन पाक सुनना रमजान माह का एक बड़ा हिस्सा है, लेकिन कुछ जगह पर देखने में आया है कि लोग कुरआन पाक सुनाने के लिए हाफिज से रकम तय कर लेते हैं या फिर कहीं बाहर जाने के लिए हाफिज स्वयं पैसे की बात तय कर लेता है। इस तरह का अमल करने के मामले में फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि तरावीह में कुरआन सुनाने के नाम पर पैसे देने और लेने वाला दोनों ही अल्लाह के नजदीक बड़े मुजरिम होते हैं। साथ ही उनका यह अमल नाजायज है। मुफ्ती अरशद ने कहा कि कुरआन सुनाने वाले हाफिज को ईद मनाने के लिए कुछ दिया जा सकता है, लेकिन नीयत में यह न हो कि वह हाफिज को कुरआन सुनाने के नाम पर पैसे या कपड़ा दे रहे हैं। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने भी कुरआन के नाम पर लेन देन तय करने को सरासर नाजायज बताते हुए कहा कि हाफिज से बात करते समय लेन देन का जिक्र नहीं होना चाहिए। क्योंकि कुरआन एक इबादत है और इबादत की कोई कीमत नहीं होती।
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