{"_id":"5a4536cc4f1c1b0e788b5692","slug":"171514485452-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अजमेर शरीफ दरगाह गिराने के बयान पर उलमा नाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अजमेर शरीफ दरगाह गिराने के बयान पर उलमा नाराज
Updated Thu, 28 Dec 2017 11:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवबंद (सहारनपुर)। पिछले आठ सौ वर्षों से अजमेर में हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह को शिवसेना हिंदुस्तान नामक संगठन द्वारा गिराए जाने का बयान देने पर देवबंदी उलमा ने कड़ी निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने तथा इस प्रकार के संगठनों को प्रतिबंधित करने की मांग की है।
मदरसा दारुल उलूम रशीदिया के मोहतमिम मौलाना मसरूर अहमद कासमी का कहना है कि अजमेर शरीफ की दरगाह का इतिहास हजारों साल पुराना है। जो हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक कही जाती है। इस दरगाह पर पहली बार इस तरह की बयानबाजी सुनने को मिल रही है। इससे पूर्व ही कुछ हिंदू संगठन ताजमहल को मंदिर बताकर विवाद खड़ा कर चुके हैं। इसलिए देश के प्रधानमंत्री को चाहिए कि वह इस तरह के मामलों को गंभीरता से लें और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इनके संगठनों पर प्रतिबंध लगाएं। मदरसा जामिया-उल-मारिफ के चेयरमैन मुफ्ती अहमद का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ सबका विकास के नारे पर केंद्र में सरकार बनाई है। इसलिए उन्हें सब के बारे में सोचना चाहिए। हिंदू संगठन आए दिन मुसलमान और मुस्लिम संस्थाओं को लेकर प्रदर्शन करते हैं तथा ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को तोड़ने की बात करते हैं। जिस पर केंद्र सरकार को कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इन पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
विज्ञापन
मदरसा दारुल उलूम रशीदिया के मोहतमिम मौलाना मसरूर अहमद कासमी का कहना है कि अजमेर शरीफ की दरगाह का इतिहास हजारों साल पुराना है। जो हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक कही जाती है। इस दरगाह पर पहली बार इस तरह की बयानबाजी सुनने को मिल रही है। इससे पूर्व ही कुछ हिंदू संगठन ताजमहल को मंदिर बताकर विवाद खड़ा कर चुके हैं। इसलिए देश के प्रधानमंत्री को चाहिए कि वह इस तरह के मामलों को गंभीरता से लें और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इनके संगठनों पर प्रतिबंध लगाएं। मदरसा जामिया-उल-मारिफ के चेयरमैन मुफ्ती अहमद का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ सबका विकास के नारे पर केंद्र में सरकार बनाई है। इसलिए उन्हें सब के बारे में सोचना चाहिए। हिंदू संगठन आए दिन मुसलमान और मुस्लिम संस्थाओं को लेकर प्रदर्शन करते हैं तथा ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को तोड़ने की बात करते हैं। जिस पर केंद्र सरकार को कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इन पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
विज्ञापन