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रेलवे
Updated Sat, 17 Jun 2017 12:47 AM IST
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रेलगाड़ियों में मारामारी, यात्रियों पर पड़ रही भारी
सहारनपुर। जनसेवा ट्रेन के कोच में खचाखच भीड़ के बीच दबकर और दम घुटने से हुई यात्री की मौत ने व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल यही है कि जिस देश में बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी चल रही हो। वहां पहले मौजूदा व्यवस्था में सुधार करना जरूरी है या बुलेट ट्रेन चलाना। अकेले जनसेवा ही नहीं, सहारनपुर से होकर गुजरने वाली ज्यादातर ट्रेनें इन दिनों खचाखच भरकर चल रही हैं। इसकी प्रमुख वजह इन दिनों स्कूलों की छुट्टियां होना है।
जालंधर से दिल्ली के बीच चलने वाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस सुबह साढ़े नौ बजे सहारनपुर पहुंचती है। इस ट्रेन में डेली पैसेंजर की संख्या अधिक होती है। सबसे पहले तो ट्रेन में सीट कब्जाने के लिए यात्रियों में हाथापाई तक होती है। इसके बाद ज्यादातर यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। दोपहर के समय गुजरने वाली जनसेवा एक्सप्रेस और गंगानगर एक्सप्रेस की हालत सबसे खराब है। जनसेवा एक्सप्रेस बिहार से ही फुल होकर आती है। इसमें कदम रखने तक की जगह नहीं रहती है। यहां तक की टॉयलेट में भी लोग घुसे होते हैं। गर्मी के दिनों में स्कूलों की छुट्टी होने की वजह से लोग सैर-सपाटे पर निकलते हैं, जिसकी वजह से ट्रेनों में 30 फीसदी तक भीड़ बढ़ जाती है। एक गर्मी और दूसरे कोच में डबल भीड़ होना कई बार यात्रियों के लिए मुसीबत बन जाता है।
रेल यात्रा सबसे बेहतर विकल्प
सहारनपुर को अन्य राज्यों और जिलों से जोड़ने वाली ज्यादातर सड़कों की हालत खराब है। साथ ही बस और कार का किराया भी ट्रेन की तुलना में तीन से चार गुणा अधिक है। ऐसे में आम आदमी के सामने ट्रेन का सफर सबसे सस्ता और सुलभ विकल्प रहता है। यही वजह है कि ट्रेनों में मारामारी की स्थिति रहती है।
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सहारनपुर। जनसेवा ट्रेन के कोच में खचाखच भीड़ के बीच दबकर और दम घुटने से हुई यात्री की मौत ने व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल यही है कि जिस देश में बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी चल रही हो। वहां पहले मौजूदा व्यवस्था में सुधार करना जरूरी है या बुलेट ट्रेन चलाना। अकेले जनसेवा ही नहीं, सहारनपुर से होकर गुजरने वाली ज्यादातर ट्रेनें इन दिनों खचाखच भरकर चल रही हैं। इसकी प्रमुख वजह इन दिनों स्कूलों की छुट्टियां होना है।
जालंधर से दिल्ली के बीच चलने वाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस सुबह साढ़े नौ बजे सहारनपुर पहुंचती है। इस ट्रेन में डेली पैसेंजर की संख्या अधिक होती है। सबसे पहले तो ट्रेन में सीट कब्जाने के लिए यात्रियों में हाथापाई तक होती है। इसके बाद ज्यादातर यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। दोपहर के समय गुजरने वाली जनसेवा एक्सप्रेस और गंगानगर एक्सप्रेस की हालत सबसे खराब है। जनसेवा एक्सप्रेस बिहार से ही फुल होकर आती है। इसमें कदम रखने तक की जगह नहीं रहती है। यहां तक की टॉयलेट में भी लोग घुसे होते हैं। गर्मी के दिनों में स्कूलों की छुट्टी होने की वजह से लोग सैर-सपाटे पर निकलते हैं, जिसकी वजह से ट्रेनों में 30 फीसदी तक भीड़ बढ़ जाती है। एक गर्मी और दूसरे कोच में डबल भीड़ होना कई बार यात्रियों के लिए मुसीबत बन जाता है।
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सहारनपुर को अन्य राज्यों और जिलों से जोड़ने वाली ज्यादातर सड़कों की हालत खराब है। साथ ही बस और कार का किराया भी ट्रेन की तुलना में तीन से चार गुणा अधिक है। ऐसे में आम आदमी के सामने ट्रेन का सफर सबसे सस्ता और सुलभ विकल्प रहता है। यही वजह है कि ट्रेनों में मारामारी की स्थिति रहती है।
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