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अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें लोग - डीआईजी

Thu, 01 Nov 2018 12:52 AM IST
Updated Thu, 01 Nov 2018 12:52 AM IST
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अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें लोग - डीआईजी
सहारनपुर। पुलिस उपमहानिरीक्षक शरद सचान ने कहा है कि लोग जितना अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं, उतना ही अपने कर्तव्यों को भी समझें। नियमों और कानून का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। डर के चलते लोग कानून का पालन करने की बजाय, व्यवस्था बनाने के लिए कानून का पालन करें। इससे न सिर्फ अपनी सुरक्षा होगी, बल्कि दूसरे भी सुरक्षित हो सकेंगे।
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बुधवार को मिशन कंपाउंड स्थित सेंट मैरी एकेडमी में अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा आयोजित पुलिस की पाठशाला में डीआईजी शरद सचान ने कहा कि दिल्ली में प्रवेश करते ही कार्रवाई के डर से लोग हेलमेट, सीट बेल्ट का प्रयोग करते हैं। लेकिन यहां पर हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग करना नहीं चाहते। नियमों का उल्लंघन करने से यातायात व्यवस्था बिगड़ जाती है, दुर्घटना का कारण भी यही बनता है। एक व्यक्ति नियम तोड़ता है, तो उसको देख दूसरा भी नियम तोड़ने लगता है और फिर भेड़चाल शुरू हो जाती है। ऐसे में दुर्घटनाएं होती हैं। जब कार्रवाई होती है तो सिफारिश शुरू कर दी जाती है।
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उन्होंने छात्र-छात्राओं के पुलिस की छवि को लेकर बनी धारणा के बारे में कहा कि पुलिस की छवि को बिना किसी व्यवहार के ही तय कर लिया गया है। पुलिस ही अपराधियों को रोकती है, नियमों और कानूनों का पालन करने पर लोगों को मजबूर करती है। पुलिस ऐसा न करे तो अपराधी निरंकुश हो जाएंगे और अव्यवस्था फैल जाएगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि बिगड़ी व्यस्था को ्संभालना सभी का दायित्व है। छात्र-छात्राओं को अपने परिजनों से व्यवस्था बनाने में सहयोग के लिए जागरूक करना होगा। बच्चे ही अपने अभिभावकों से स्वच्छता और सुरक्षा के साथ वाहनों की ओवरस्पीड रोकने, रोड साइड बोर्ड की ओर ध्यान देने जिद कर सकते हैं।
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इस मौके पर स्कूल के प्रधानाचार्य फादर थारसिस ने छात्र-छात्राओं से यातायात के नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने अधिकारियों का आभार जताया।

- केरल की तरह यूपी में भी शुरू होगा छात्रों का पुलिस प्रशिक्षण
डीआईजी शरद सचान ने कहा कि केरल में पुलिस कार्य प्रणाली की जानकारी देने के लिए छात्रों को पुलिस प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिससे व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है और छात्र भी पुलिस की कार्यशैली को समझ रहे हैं। वहां नियमों का पालन भी हो रहा है। जिससे प्रेरित होकर अन्य प्रदेशों में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कराए जाने को लेकर मंथन चल रहा है। उत्तर प्रदेश में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण को लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है।
इंग्लैंड में लोगों को नियमों का पालन करने की आदत
उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में सड़क के नियमों को देखा है। वहां वाहन चालक लाइट देखकर ही चलते हैं। चाहे उन्हें कोई देख रहा हो या न देख रहा हो। रात में दूर-दूर तक कोई भी नहीं हो और सिग्नल लाल हो रहा हो तो भी वाहन चालक अपने वाहनों को रोकते हैं।
100 और 1090 का करें प्रयोग
डीआईजी शरद सचान ने कहा कि किसी भी प्रकार की घटना होने पर डायल 100 पर तत्काल सूचना दें। यह कॉल लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम में रिसीव होती है और उसके बाद घटनास्थल की लोकेशन मालूम करने के बाद अधिकतम 10 मिनट के भीतर पुलिस मौके पहुंच जाती है। इसके साथ ही महिला उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई के लिए 1090 नंबर की सेवा दी गई है, जिसमें सूचना देने वाले का नाम पता भी गोपनीय रखा जाता है।
दुर्घटना में मौतों की संख्या अधिक
उप निरीक्षक यातायात तेज प्रताप सिंह ने कहा कि वाहन चलाने में लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं में मौतों का आंकड़ा अन्य सभी प्रकार से होने वाली मौतों के आंकड़ों से काफी अधिक है। इनमें भी 70 प्रतिशत मौतें बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट के कारण हो रहीं हैं। यातायात के नियमों का पालन न करना जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपील की कि अपने परिजनों, मित्रों को जागरूक करें। यातायात के नियमों का पालन करने, हेलमेट पहनने के लिए जिद करें। सिर्फ पुलिस को दिखाने के लिए नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए।
बच्चों ने पूछे सवाल, डीआईजी ने दिए जवाब।
छात्रा आस्था नायर-- चौराहों पर ट्रैफिक लाइट लगीं हैं, लेकिन बंद पड़ी है ?
जवाब - सहारनपुर स्मार्ट सिटी बन रहा है। इसके तहत चौराहों की लाइटें ही नहीं कई अन्य सुधार भी किए जाने हैं। इन लाइटों को जल्द ही संबंधित विभाग से ठीक कराया जाएगा।
छात्रा सिया शर्मा - सड़क से ओवरलोड वाहन गुजरते हैं, कुछ पुलिसकर्मी उन्हें रोक कर 20 रुपये लेकर छोड़ देते हैं। जिनसे सड़क टूटतीं हैं और दुर्घटनाएं होतीं हैं?
जवाब - ऐसी शिकायतें अक्सर आतीं हैं और उन पर कार्रवाई भी होती है। ओवरलोड वाहनों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। ऐसा कहीं मामला है तो उसे चेक कराकर कार्रवाई की जाएगी।

छात्र हार्दिक पंवार - सड़कों पर बनने वाले स्पीड ब्रेकर कितने ऊंचे होने चाहिए, कई जगह इतने ऊंचे हैं कि दुर्घटना हो जाती है।
जवाब - किसी भी राजमार्ग पर स्पीड ब्रेकर नहीं होना चाहिए। आबादी वाले क्षेत्रों में वाहनों को तेज चलने से रोकने के लिए स्पीड ब्रेकर निर्धारित ऊंचाई के होते हैं। वाहनों की गति धीमी हो तो दुर्घटना नहीं होगी।
छात्र देवांश - आबादी के बीच सड़क पर वाहन तेज गति से दौड़ते हैं, एक दूसरे को ओवरटेक करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं हो रहीं हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं?
जवाब- तेज गति और ओवरटेक ही दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। पकड़ में आने पर कार्रवाई होती है। लेकिन वाहन चालकों को इसकी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
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