{"_id":"5a775dac4f1c1b86268b84aa","slug":"161517772204-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अद्भुत समाज सुधारक और साधक थे महर्षि दयानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अद्भुत समाज सुधारक और साधक थे महर्षि दयानंद
Updated Mon, 05 Feb 2018 01:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खेड़ा अफगान (सहारनपुर)। आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्मोत्सव रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर यज्ञ हुआ। वक्ताओं ने समाज सुधार की दिशा में दयानंद सरस्वती द्वारा किए गए कार्यों की चर्चा की।
आर्य समाज मंदिर में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। इसके बाद प्रवचन करते हुए आर्य समाज के प्रधान आदित्य प्रकाश गुप्ता ने कहा कि दयानंद सरस्वती ने वेदों का प्रचार प्रसार कर समाज से अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर किया। नारी उत्थान के लिए काम किया। वे बचपन से ही होनहार थे। उन्होंने कहा कि दयानंद सरस्वती एक दार्शनिक, अद्भुत समाज सुधारक व साधक थे। उनका जन्म 1824 में गुजरात प्रांत के टंकारा नामक ग्राम में हुआ था। समाज की दुर्दशा देख दयानंद सरस्वती ने समाज सुधार का संकल्प लिया। उन्होेंने बताया कि दयानंद सरस्वती ने 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की और लोगों को पाखंड से मुक्ति दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे।
पूर्व मंत्री अमित कुमार आर्य ने मधुर भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के दौरान कुंवर पाल आर्य, वेदमुनि, सुरेंद्र कुमार, राजेश आर्य, यशपाल गुप्ता, नरेश कुमार, श्रवण कुमार, सत्यवीर, सन्नी, मोहित कुमार, वेद भूषण गुप्ता, शशिकांत आर्य, सतीश कुमार आदि उपस्थित रहे
विज्ञापन
विज्ञापन
आर्य समाज मंदिर में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। इसके बाद प्रवचन करते हुए आर्य समाज के प्रधान आदित्य प्रकाश गुप्ता ने कहा कि दयानंद सरस्वती ने वेदों का प्रचार प्रसार कर समाज से अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर किया। नारी उत्थान के लिए काम किया। वे बचपन से ही होनहार थे। उन्होंने कहा कि दयानंद सरस्वती एक दार्शनिक, अद्भुत समाज सुधारक व साधक थे। उनका जन्म 1824 में गुजरात प्रांत के टंकारा नामक ग्राम में हुआ था। समाज की दुर्दशा देख दयानंद सरस्वती ने समाज सुधार का संकल्प लिया। उन्होेंने बताया कि दयानंद सरस्वती ने 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की और लोगों को पाखंड से मुक्ति दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे।
विज्ञापन
पूर्व मंत्री अमित कुमार आर्य ने मधुर भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के दौरान कुंवर पाल आर्य, वेदमुनि, सुरेंद्र कुमार, राजेश आर्य, यशपाल गुप्ता, नरेश कुमार, श्रवण कुमार, सत्यवीर, सन्नी, मोहित कुमार, वेद भूषण गुप्ता, शशिकांत आर्य, सतीश कुमार आदि उपस्थित रहे
विज्ञापन