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केन कमिश्नर ने किया गन्ना सट्टा नीति में बदलाव
Updated Sat, 26 Aug 2017 12:32 AM IST
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सहारनपुर। गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड़ी ने गन्ना सट्टा नीति में बदलाव किया है। अब किसानों को दो या तीन वर्ष नहीं बल्कि पांच वर्षों में की गई गन्ना आपूर्ति में से जिस वर्ष भी सप्लाई सर्वाधिक हो, उसे ही किसान का बेसिक कोटा माना जाएगा। इसके अलावा सीमांत किसानों की सट्टा सीमा 750 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की बजाए उपज बढ़ोत्तरी की दशा में अधिकतम 1300 क्विंटल तक कर दी है।
प्रदेश सरकार ने नई सट्टा नीति में कई बदलाव किए हैं। इसमें बेसिक कोटा और उपज बढ़ोत्तरी के मामले में किसानों को फायदा होगा। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि इस नीति में किसानों को अपेक्षाकृत अधिक पर्चियां मिलेंगी। इससे किसानों को चीनी मिलों में गन्ना सप्लाई करने में सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि पहले किसानों का बेसिक कोटा तय करने के लिए पिछले दो या तीन वर्षों की गन्ना सप्लाई देखी जाती थी। गन्ना आयुक्त ने इस समय सीमा को बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया है। इन वर्षों में जिस वर्ष भी सबसे अधिक गन्ना सप्लाई होगी, उसे ही किसान का बेसिक कोटा माना जाएगा।
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प्रदेश सरकार ने नई सट्टा नीति में कई बदलाव किए हैं। इसमें बेसिक कोटा और उपज बढ़ोत्तरी के मामले में किसानों को फायदा होगा। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि इस नीति में किसानों को अपेक्षाकृत अधिक पर्चियां मिलेंगी। इससे किसानों को चीनी मिलों में गन्ना सप्लाई करने में सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि पहले किसानों का बेसिक कोटा तय करने के लिए पिछले दो या तीन वर्षों की गन्ना सप्लाई देखी जाती थी। गन्ना आयुक्त ने इस समय सीमा को बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया है। इन वर्षों में जिस वर्ष भी सबसे अधिक गन्ना सप्लाई होगी, उसे ही किसान का बेसिक कोटा माना जाएगा।
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