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रुका राघव का विजय रथ, भितरघात पड़ गई भारी
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सहारनपुर। भाजपा प्रत्याशी राघव लखनपाल शर्मा का विजय रथ रुक गया। इसके पीछे कई वजह भी है। लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी में गुटबाजी हावी रही।
अब तक सहारनपुर के सांसद रहे राघव लखनपाल शर्मा 2001 में सरसावा विधानसभा उपचुनाव लड़कर पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद 2007 में सहारनपुर शहर विधानसभा से विधायक बने थे और 2012 के विधानसभा चुनाव में भी राघव का विजय रथ दौड़ता रहा और वह विधायक बने। इसी को देखते हुए पार्टी ने उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था। लोकसभा चुनाव 2014 में पार्टी ने राघव लखनपाल शर्मा पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रत्याशी बनाया और वह जीत गए थे। लोकसभा चुनाव 2019 में राघव लखनपाल शर्मा को पार्टी हाईकमान ने चुनावी मैदान में उतार दिया, जबकि इस बार एक विधायक, तीन पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष ने भी उम्मीदवारी को लेकर ताल ठोकी थी। इसको लेकर पार्टी हाईकमान ने काफी मंथन किया, लेकिन राघव लखनपाल शर्मा की छवि को देखते हुए पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया। इसके बाद से ही पार्टी में गुटबाजी हावी हो गई, जिसको न ही पार्टी हाईकमान भांप सकी और न ही राघव लखनपाल शर्मा समझ पाए। राघव की टीम तो चुनावी मैदान में पूरी तैयारी के साथ उतर गई, लेकिन अंदरूनी कलह को न समझने की वजह से उनकी राह मुश्किल रही।
इसका उदाहरण यह है कि कई जगहों पर चुनाव को लेकर बस्ते ही नहीं बंटे। शहर विधानसभा में 155 जगहों पर बस्ते नहीं बंटे थे। ऐसी ही स्थिति बेहट विधानसभा क्षेत्र, सहारनपुर देहात और रामपुर मनिहारान क्षेत्र में भी सामने आई थी। चुनाव के दौरान यहां भी गुटबाजी नजर आई। पार्टी सूत्र बताते हैं कि कई जगहों पर पोलिंग एजेंट ही पार्टी पदाधिकारी नहीं बना पाए थे। इसकी शिकायत भी हाईकमान को की गई। इसके अलावा लोकसभा क्षेत्र की पांचों विधानसभाओं क्षेेत्रों को पूरी तरह पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता भ्रमण नहीं कर पाए। इसको लेकर जनता की नाराजगी भी जाहिर होने लगी थी, लेकिन पार्टी हाईकमान इसे भांप नहीं पाई, जिसका नतीजा यह हुआ कि भाजपा को देश में प्रचंड बहुमत मिलने पर भी सहारनपुर लोकसभा में हार का मुुंह देखना पड़ा है। उधर, जिलाध्यक्ष बिजेंद्र कश्यप का कहना है कि हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी। किसी पदाधिकारी और कार्यकर्ता की लापरवाही रही तो हाईकमान को इससे अवगत कराया जाएगा।
झोंक रखी थी ताकत, फिर विपरीत आए परिणाम
सहारनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां शाकंभरी देवी मंदिर में दर्शन कर प्रदेश में भाजपा की विजय संकल्प रैली की शुरूआत की थी। इसके साथ ही जनसभा की गई थी। इसके पश्चात नानौता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली भी हुई। इनके अलावा प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा को प्रभारी बनाया। राज्यसभा सांसद कांता कर्दम, क्षेत्रीय अध्यक्ष अश्वनी त्यागी, क्षेत्रीय महामंत्री मोहित बेनीवाल, लोकसभा प्रभारी सुभाष शर्मा सहित कई बड़े नेता भी सहारनपुर आए थे। लेकिन इसके बाद भी सहारनपुर सीट पर भाजपा जीत नहीं सकी।
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अब तक सहारनपुर के सांसद रहे राघव लखनपाल शर्मा 2001 में सरसावा विधानसभा उपचुनाव लड़कर पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद 2007 में सहारनपुर शहर विधानसभा से विधायक बने थे और 2012 के विधानसभा चुनाव में भी राघव का विजय रथ दौड़ता रहा और वह विधायक बने। इसी को देखते हुए पार्टी ने उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था। लोकसभा चुनाव 2014 में पार्टी ने राघव लखनपाल शर्मा पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रत्याशी बनाया और वह जीत गए थे। लोकसभा चुनाव 2019 में राघव लखनपाल शर्मा को पार्टी हाईकमान ने चुनावी मैदान में उतार दिया, जबकि इस बार एक विधायक, तीन पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष ने भी उम्मीदवारी को लेकर ताल ठोकी थी। इसको लेकर पार्टी हाईकमान ने काफी मंथन किया, लेकिन राघव लखनपाल शर्मा की छवि को देखते हुए पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया। इसके बाद से ही पार्टी में गुटबाजी हावी हो गई, जिसको न ही पार्टी हाईकमान भांप सकी और न ही राघव लखनपाल शर्मा समझ पाए। राघव की टीम तो चुनावी मैदान में पूरी तैयारी के साथ उतर गई, लेकिन अंदरूनी कलह को न समझने की वजह से उनकी राह मुश्किल रही।
इसका उदाहरण यह है कि कई जगहों पर चुनाव को लेकर बस्ते ही नहीं बंटे। शहर विधानसभा में 155 जगहों पर बस्ते नहीं बंटे थे। ऐसी ही स्थिति बेहट विधानसभा क्षेत्र, सहारनपुर देहात और रामपुर मनिहारान क्षेत्र में भी सामने आई थी। चुनाव के दौरान यहां भी गुटबाजी नजर आई। पार्टी सूत्र बताते हैं कि कई जगहों पर पोलिंग एजेंट ही पार्टी पदाधिकारी नहीं बना पाए थे। इसकी शिकायत भी हाईकमान को की गई। इसके अलावा लोकसभा क्षेत्र की पांचों विधानसभाओं क्षेेत्रों को पूरी तरह पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता भ्रमण नहीं कर पाए। इसको लेकर जनता की नाराजगी भी जाहिर होने लगी थी, लेकिन पार्टी हाईकमान इसे भांप नहीं पाई, जिसका नतीजा यह हुआ कि भाजपा को देश में प्रचंड बहुमत मिलने पर भी सहारनपुर लोकसभा में हार का मुुंह देखना पड़ा है। उधर, जिलाध्यक्ष बिजेंद्र कश्यप का कहना है कि हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी। किसी पदाधिकारी और कार्यकर्ता की लापरवाही रही तो हाईकमान को इससे अवगत कराया जाएगा।
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झोंक रखी थी ताकत, फिर विपरीत आए परिणाम
सहारनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां शाकंभरी देवी मंदिर में दर्शन कर प्रदेश में भाजपा की विजय संकल्प रैली की शुरूआत की थी। इसके साथ ही जनसभा की गई थी। इसके पश्चात नानौता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली भी हुई। इनके अलावा प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा को प्रभारी बनाया। राज्यसभा सांसद कांता कर्दम, क्षेत्रीय अध्यक्ष अश्वनी त्यागी, क्षेत्रीय महामंत्री मोहित बेनीवाल, लोकसभा प्रभारी सुभाष शर्मा सहित कई बड़े नेता भी सहारनपुर आए थे। लेकिन इसके बाद भी सहारनपुर सीट पर भाजपा जीत नहीं सकी।
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