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कुतों के आतंक पर गंभीर नहीं नगर निगम
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सहारनपुर। आवारा कुत्ते शहरी क्षेत्र में हर दिन 40 से 45 लोगों पर हमला बोल रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम कुत्तों के आतंक को लेकर गंभीर नहीं है। दो साल से नगर निगम कुत्तों की नसबंदी का अभियान चला रहा है, जिस पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मगर उसके बावजूद कुत्तों की संख्या पर कोई अंकुश नजर नहीं आ रहा है। खास बात यह है कि कुत्ता पकड़ने वाली टीम कई दिन से काम बंद कर चली गई है।
जिले भर में कुत्तों का सबसे अधिक आतंक शहर में है। जिला अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन कुत्ता काटने के 40 से 45 मामले पहुंचते हैं। यह संख्या अस्पताल में पहुंचने वालों की है, जबकि अनेक सक्षम लोग प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज कराते हैं। इसके अलावा साल में एक या दो घटनाएं कुत्तों द्वारा बच्चों को नोंचकर मार डालने की आती हैं। नगर निगम में बोर्ड का गठन होने के बाद बोर्ड ने कुत्तों की लगातार बढ़ रही संख्या पर अंकुश लगाने के लिए कुत्तों की नसबंदी कराने का निर्णय लिया। पहले साल नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी पर लाखों रुपये खर्च किए। उम्मीद थी कि इस वर्ष कुत्तों की संख्या पर अंकुश लगेगा। मगर हैरत की बात यह है कि नगर निगम परिसर में ही मादा कुत्तों ने कई बच्चों को जन्म दिया, जो अब बड़े होकर नगर निगम के कार्यालयों में दिन भर मंडराते हैं। इस बार फिर से नगर निगम ने एक एजेंसी को कुत्तों की नसबंदी का ठेका दिया है। निगम सूत्रों ने बताया कि एजेंसी को पैसे का भुगतान देरी से होने के कारण एजेंसी ने टीम को वापस बुला लिया है। इसकी वजह से कई दिन से कुत्तों की नसबंदी का अभियान बंद पड़ा है।
कुत्तों की संख्या कम करने के लिए नगर निगम उनकी नसबंदी का अभियान चला रहा है। पिछले वर्ष भी हमने बड़ी संख्या में कुत्तों की नसबंदी कराई, जिसका असर देखने को मिला है। रही बात अभियान बंद होने की तो सहारनपुर में काम कर रही टीम कई अन्य शहरों में भी काम कर रही है। इसी वजह से वह इन दिनों सहारनपुर में नसबंदी नहीं कर रहे हैं। मगर जल्द ही दोबारा अभियान शुरू होगा।
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डॉक्टर गीताराम, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम।
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जिले भर में कुत्तों का सबसे अधिक आतंक शहर में है। जिला अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन कुत्ता काटने के 40 से 45 मामले पहुंचते हैं। यह संख्या अस्पताल में पहुंचने वालों की है, जबकि अनेक सक्षम लोग प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज कराते हैं। इसके अलावा साल में एक या दो घटनाएं कुत्तों द्वारा बच्चों को नोंचकर मार डालने की आती हैं। नगर निगम में बोर्ड का गठन होने के बाद बोर्ड ने कुत्तों की लगातार बढ़ रही संख्या पर अंकुश लगाने के लिए कुत्तों की नसबंदी कराने का निर्णय लिया। पहले साल नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी पर लाखों रुपये खर्च किए। उम्मीद थी कि इस वर्ष कुत्तों की संख्या पर अंकुश लगेगा। मगर हैरत की बात यह है कि नगर निगम परिसर में ही मादा कुत्तों ने कई बच्चों को जन्म दिया, जो अब बड़े होकर नगर निगम के कार्यालयों में दिन भर मंडराते हैं। इस बार फिर से नगर निगम ने एक एजेंसी को कुत्तों की नसबंदी का ठेका दिया है। निगम सूत्रों ने बताया कि एजेंसी को पैसे का भुगतान देरी से होने के कारण एजेंसी ने टीम को वापस बुला लिया है। इसकी वजह से कई दिन से कुत्तों की नसबंदी का अभियान बंद पड़ा है।
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कुत्तों की संख्या कम करने के लिए नगर निगम उनकी नसबंदी का अभियान चला रहा है। पिछले वर्ष भी हमने बड़ी संख्या में कुत्तों की नसबंदी कराई, जिसका असर देखने को मिला है। रही बात अभियान बंद होने की तो सहारनपुर में काम कर रही टीम कई अन्य शहरों में भी काम कर रही है। इसी वजह से वह इन दिनों सहारनपुर में नसबंदी नहीं कर रहे हैं। मगर जल्द ही दोबारा अभियान शुरू होगा।
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डॉक्टर गीताराम, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम।