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बरसात में पशुओं में तेजी से फैल रहा गलघोंटू
Updated Sun, 15 Jul 2018 12:52 AM IST
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बरसात में पशुओं में तेजी से फैल रहा गलघोंटू वायरस
सहारनपुर। बरसात में पशुओं में गलघोंटू का वायरस तेजी से फैल रहा है, जिससे पशु पालकों में दहशत का माहौल है। हालांकि, पशु पालन विभाग द्वारा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते अभियान की रफ्तार धीमी है।
टीकाकरण के अभाव में गलघोंटू वायरस की चपेट में आने वाले ज्यादातर पशुओं की मौत हो जाती है। गाय और भैंस में गलघोंटू वायरस तेजी से फैलता है। बरसात के मौसम में जनपद में गलघोंटू वायरस का प्रकोप बढ़ गया है। पुवांरका ब्लॉक के गांव टोपरी निवासी राहुल कुमार ने बताया कि उनकी दो भैंस और एक गाय गलघोंटू की चपेट में है। इसी तरह गांव आसनवाली निवासी रामकुमार सैनी की तीन भैंसें गलघोंटू वायरस से पीड़ित हैं। सूचना पर पशु पालन विभाग की टीमें टीके लगा चुकी हैं। गांव भऊपुर निवासी लियाकत हसन के चार पशु गलघोंटू की ग्रस्त हैं। यह उदाहरण मात्र है। इसी तरह पूरे जनपद में इन दिनों गलघोंटू वायरस का प्रकोप है। हालांकि, पशु पालन विभाग द्वारा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन पशु चिकित्सकों की कमी के चलते टीकाकरण अभियान की रफ्तार धीमी है। जनपद में 36 सरकारी पशु चिकित्सालय हैं, जिन पर मात्र 18 पशु चिकित्सक तैनात हैं।
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यह हैं गलघोंटू वायरस के लक्षण
सहारनपुर। पशु चिकित्सकों के मुताबिक गलघोंटू की वायरस की चपेट में आने पर पशु सुस्त हो जाता है। इसके साथ ही शरीर का तापमान बढ़ जाता है। नाक और मुंह से लार गिरने लगती है। आंख लाल हो जाती और पानी निकलता है। पशु के जबड़ों के बीच में सूजन आ जाती है। सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। पशु खाना-पीना कम कर देता है।
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सावधानी बरतने से होता है बचाव
सहारनपुर। गलघोंटू वायरस एक पशु से दूसरे पशु में तेजी से फैलता है। पशु चिकित्सकों के मुताबिक स्वस्थ पशु को बीमार पशु से अलग रखना चाहिए। बरसात से पहले पशु को टीका लगवाया जाए। पशुओं को एक साथ चारा न खिलाएं। बीमार पशु के मरने पर उस जगह को फिनाइल से अच्छी तरह धोएं। गलघोंटू लक्ष्ण दिखाई देते ही पशु चिकित्सक को सूचना दें।
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बरसात के दिनों में गलघोंटू वायरस का प्रकोप बढ़ गया है। विभाग द्वारा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। जिस गांव या क्षेत्र में गलघोंटू वायरस से पीड़ित पशु होने की जानकारी मिल रही है, वहां टीमें तुरंत पहुंचकर टीके लगा रही हैं। पशु पालकों को भी चाहिए कि वह समय रहते पशु चिकित्सक को जानकारी दें।
-------वाईपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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सहारनपुर। बरसात में पशुओं में गलघोंटू का वायरस तेजी से फैल रहा है, जिससे पशु पालकों में दहशत का माहौल है। हालांकि, पशु पालन विभाग द्वारा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते अभियान की रफ्तार धीमी है।
टीकाकरण के अभाव में गलघोंटू वायरस की चपेट में आने वाले ज्यादातर पशुओं की मौत हो जाती है। गाय और भैंस में गलघोंटू वायरस तेजी से फैलता है। बरसात के मौसम में जनपद में गलघोंटू वायरस का प्रकोप बढ़ गया है। पुवांरका ब्लॉक के गांव टोपरी निवासी राहुल कुमार ने बताया कि उनकी दो भैंस और एक गाय गलघोंटू की चपेट में है। इसी तरह गांव आसनवाली निवासी रामकुमार सैनी की तीन भैंसें गलघोंटू वायरस से पीड़ित हैं। सूचना पर पशु पालन विभाग की टीमें टीके लगा चुकी हैं। गांव भऊपुर निवासी लियाकत हसन के चार पशु गलघोंटू की ग्रस्त हैं। यह उदाहरण मात्र है। इसी तरह पूरे जनपद में इन दिनों गलघोंटू वायरस का प्रकोप है। हालांकि, पशु पालन विभाग द्वारा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन पशु चिकित्सकों की कमी के चलते टीकाकरण अभियान की रफ्तार धीमी है। जनपद में 36 सरकारी पशु चिकित्सालय हैं, जिन पर मात्र 18 पशु चिकित्सक तैनात हैं।
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यह हैं गलघोंटू वायरस के लक्षण
सहारनपुर। पशु चिकित्सकों के मुताबिक गलघोंटू की वायरस की चपेट में आने पर पशु सुस्त हो जाता है। इसके साथ ही शरीर का तापमान बढ़ जाता है। नाक और मुंह से लार गिरने लगती है। आंख लाल हो जाती और पानी निकलता है। पशु के जबड़ों के बीच में सूजन आ जाती है। सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। पशु खाना-पीना कम कर देता है।
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सावधानी बरतने से होता है बचाव
सहारनपुर। गलघोंटू वायरस एक पशु से दूसरे पशु में तेजी से फैलता है। पशु चिकित्सकों के मुताबिक स्वस्थ पशु को बीमार पशु से अलग रखना चाहिए। बरसात से पहले पशु को टीका लगवाया जाए। पशुओं को एक साथ चारा न खिलाएं। बीमार पशु के मरने पर उस जगह को फिनाइल से अच्छी तरह धोएं। गलघोंटू लक्ष्ण दिखाई देते ही पशु चिकित्सक को सूचना दें।
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बरसात के दिनों में गलघोंटू वायरस का प्रकोप बढ़ गया है। विभाग द्वारा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। जिस गांव या क्षेत्र में गलघोंटू वायरस से पीड़ित पशु होने की जानकारी मिल रही है, वहां टीमें तुरंत पहुंचकर टीके लगा रही हैं। पशु पालकों को भी चाहिए कि वह समय रहते पशु चिकित्सक को जानकारी दें।
-------वाईपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी