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आम के बागों पर बढ़ा थ्रिप्स कीट का प्रकोप
Updated Sun, 20 May 2018 11:48 PM IST
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आम के बागों पर बढ़ा थ्रिप्स कीट का प्रकोप
सहारनपुर। लगातार मौसम में हो रहे उतार चढ़ाव के चलते आम के बागों पर कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। इसमें फ्रूट बोरर और थ्रिप्स कीट सबसे अधिक नुकसानदेह साबित हो रहे हैं।
पिछले दिनों मौसम में आए उतार चढ़ाव और आंधी के चलते आम के बागों को खासा नुकसान हुआ है। रही सही कसर कीटों के प्रकोप पूरी कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि आम की फ्रूट बोरर की गिड़ार आम के फल में प्रवेश कर छोटे और बडे़ फलों को नुकसान कर देती है। इसके नियंत्रण के लिए क्यूनॉलफॉस 25 ईसी की दो मिलीलीटर मात्रा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। आम का थ्रिप्स कीट बहुत ही छोटे आकार का होता है। यह कीट फलों की सतह को खुरचकर नुकसान करता है। इसके चलते प्रभावित फल पर भूरे रंग की सख्त सतह बन जाती है। जिससे फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस पर नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल स्टालेन एसएसी की डेढ़ लीटर या डिलीगेट स्पेनोटर्म की 360 एमएल मात्रा को 2000 लीटर पानी में घोलकर और सिलीकेट बेस स्टीकर में मिलाकर छिड़काव करना मुफीद रहता है। उन्होंने बताया कि यदि आम के फलों पर काले रंग के धब्बे दिखाई दे तो वह एंथ्रोक्नोज रोग का लक्षण है। इससे बचाव के लिए कार्बेडांजियम प्लस, मैंकोजेब या कैम्पेनियम की 1.50 किलो मात्रा को 2000 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करना लाभकारी साबित होता है।
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सहारनपुर। लगातार मौसम में हो रहे उतार चढ़ाव के चलते आम के बागों पर कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। इसमें फ्रूट बोरर और थ्रिप्स कीट सबसे अधिक नुकसानदेह साबित हो रहे हैं।
पिछले दिनों मौसम में आए उतार चढ़ाव और आंधी के चलते आम के बागों को खासा नुकसान हुआ है। रही सही कसर कीटों के प्रकोप पूरी कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि आम की फ्रूट बोरर की गिड़ार आम के फल में प्रवेश कर छोटे और बडे़ फलों को नुकसान कर देती है। इसके नियंत्रण के लिए क्यूनॉलफॉस 25 ईसी की दो मिलीलीटर मात्रा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। आम का थ्रिप्स कीट बहुत ही छोटे आकार का होता है। यह कीट फलों की सतह को खुरचकर नुकसान करता है। इसके चलते प्रभावित फल पर भूरे रंग की सख्त सतह बन जाती है। जिससे फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस पर नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल स्टालेन एसएसी की डेढ़ लीटर या डिलीगेट स्पेनोटर्म की 360 एमएल मात्रा को 2000 लीटर पानी में घोलकर और सिलीकेट बेस स्टीकर में मिलाकर छिड़काव करना मुफीद रहता है। उन्होंने बताया कि यदि आम के फलों पर काले रंग के धब्बे दिखाई दे तो वह एंथ्रोक्नोज रोग का लक्षण है। इससे बचाव के लिए कार्बेडांजियम प्लस, मैंकोजेब या कैम्पेनियम की 1.50 किलो मात्रा को 2000 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करना लाभकारी साबित होता है।
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