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फीस प्रकरण में अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
Updated Wed, 02 May 2018 12:16 AM IST
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सहारनपुर। एसडी कन्या इंटर कॉलेज में अनुसूचित जाति की छात्राओं से फीस वसूली का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शिकायतकर्ता ने डीआईओएस कार्यालय के अधिकारियों पर प्रधानाचार्य के साथ मिले होने का आरोप लगाया है। पोर्टल के जरिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रकरण से अवगत कराते हुए अधिकारी और प्रधानाचार्य के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है।
मंगलवार को दिलीप सोनकर, सोनू सैनी, सुशील पराशर, आजाद सिंह, अनिल गुप्ता, जितेंद्र नागर, गजेंद्र सैनी आदि डीआईओएस से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। आरोप लगाया कि एसडी कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य ने गलत तरीके से अनुसूचित जाति की छात्राओं से फीस वसूली की। बताया कि उन्होंने आरटीआई के तहत जानकारी पाई है, जिसमें बताया गया है कि अनुसूचित जाति की छात्राओं से 11 मदों में से केवल छह ही मद का शुल्क लिया जा सकता है। मगर कॉलेज में उनसे सामान्य वर्ग की छात्राओं के समान फीस वसूली गई। आरोप है कि एक बार प्रधानाचार्य के निलंबन के बाद दोबारा से विभागीय अधिकारी प्रधानाचार्य को बचाने में लगे हैं। इससे अधिकारियों के भी प्रधानाचार्य के साथ मिले होने की आशंका उजागर होती है। उन्होंने पोर्टल के जरिए मुख्यमंत्री को एक ओर शिकायत की है।
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अनुसूचित जाति की छात्राओं से जो भी फीस ली गई है वह शासन के आदेशों के अनुरूप ही ली गई है। शासन के आदेश की कॉपी भी हमारे पास उपलब्ध है, जिससे अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। साथ ही ली गई फीस कॉलेज के खाते में समय से जमा कराई जाती रही है। ऐसे में फीस के पैसे की बंदरबांट करने के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
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सरिता शर्मा, प्रधानाचार्य (निलंबित)।
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मंगलवार को दिलीप सोनकर, सोनू सैनी, सुशील पराशर, आजाद सिंह, अनिल गुप्ता, जितेंद्र नागर, गजेंद्र सैनी आदि डीआईओएस से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। आरोप लगाया कि एसडी कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य ने गलत तरीके से अनुसूचित जाति की छात्राओं से फीस वसूली की। बताया कि उन्होंने आरटीआई के तहत जानकारी पाई है, जिसमें बताया गया है कि अनुसूचित जाति की छात्राओं से 11 मदों में से केवल छह ही मद का शुल्क लिया जा सकता है। मगर कॉलेज में उनसे सामान्य वर्ग की छात्राओं के समान फीस वसूली गई। आरोप है कि एक बार प्रधानाचार्य के निलंबन के बाद दोबारा से विभागीय अधिकारी प्रधानाचार्य को बचाने में लगे हैं। इससे अधिकारियों के भी प्रधानाचार्य के साथ मिले होने की आशंका उजागर होती है। उन्होंने पोर्टल के जरिए मुख्यमंत्री को एक ओर शिकायत की है।
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अनुसूचित जाति की छात्राओं से जो भी फीस ली गई है वह शासन के आदेशों के अनुरूप ही ली गई है। शासन के आदेश की कॉपी भी हमारे पास उपलब्ध है, जिससे अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। साथ ही ली गई फीस कॉलेज के खाते में समय से जमा कराई जाती रही है। ऐसे में फीस के पैसे की बंदरबांट करने के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
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सरिता शर्मा, प्रधानाचार्य (निलंबित)।