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स्मार्ट बनेंगे शहर के स्कूल और मदरसे
Updated Thu, 22 Feb 2018 12:56 AM IST
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स्मार्ट बनेंगे शहर के स्कूल और मदरसे
सहारनपुर। शहर के सरकारी मदरसों और स्कूलों में टाट पट्टी पर बैठ कर पढ़ाई करना अब गुजरे जमाने की बात होगी। शहर के स्मार्ट सिटी योजना में चयनित होने के बाद शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार होना लाजिमी है। नगर निगम ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। योजना के तहत शहर के केवल सरकारी स्कूल ही नहीं बल्कि मदरसों को भी आधुनिक बनाया जाएगा। स्कूलों और मदरसों में इंटरनेट सुविधा से लैस लैब बनाने के साथ ही कक्षों में बदलाव, बच्चों के बैठने की व्यवस्था और कक्षाओं में डिजिटल बोर्ड लगाए जाएंगे।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए नगर निगम तैयारी में जुट गया है। शहर में कितने सरकारी स्कूल हैं और उनको आधुनिक बनाने के लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता होगी। इसके लिए सर्वे कराया जाएगा। शिक्षा विभाग से भी इसमें डाटा मांगा जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार शहर में बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 80 के करीब हैं। मदरसों की संख्या का पता लगाया जा रहा है। शहर में कुल मदरसों की संख्या 500 के करीब है। इनमें से अनेक सहायता प्राप्त मदरसे स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकास होने का इंतजार भी अभी से करने लगे हैं। नगरायुक्त का कहना है कि मदरसों को स्मार्ट बनाने के लिए पहले मदरसों से जुड़े अधिकारियों और उनके प्रमुखों के साथ बैठक की जाएगी। उसके बाद ही स्थिति का सही पता चल सकेगा कि मदरसों को स्मार्ट बनाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है। निगम की तैयारियों से यह उम्मीद बंधी है कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से लैस मदरसों के बच्चे शानदार फर्नीचर पर बैठकर कंप्यूटर की कीबोर्ड पर उंगलियां दौड़ाते नजर आएंगे। वहीं कक्षाओं में लटके ब्लैक बोर्ड का स्थान डिजिटल बोर्ड या प्रोजेक्टर लेंगे। निश्चित ही आधुनिक बनने के बाद सरकारी स्कूलों और मदरसों के बच्चे भी आधुनिकता की दौड़ में किसी से पीछे नहीं रहेंगे।
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अनेक स्कूलों के पास अपने भवन तक नहीं
शहर में संचालित परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की बात करें तो अनेक विद्यालयों के पास अपने भवन नहीं हैं। वह शुरू से ही किराये के भवनों में चल रहे हैं। इसके अलावा अनेक विद्यालयों के भवन बेहद जर्जर हो चुके हैं जो कभी भी धराशाही हो सकते हैं। ऐसे कुछ भवनों को विभाग ने छोड़ भी दिया है। यानी इन भवनों में पढ़ने वाले बच्चों को अन्य जगह पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। ऐसे में स्मार्ट सिटी योजना के तहत सबसे पहले जरूरत विद्यालयों को अच्छे भवन देने की होगी जो बड़े बजट का काम रहेगा।
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मोहल्ला क्लीनिक बनेंगे मरीजों के साथी
स्मार्ट सिटी योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा। इसके लिए एक ओर जहां सरकारी अस्पताल में सुविधाएं बढ़ेंगी। वहीं शहर भर में मोहल्ला क्लीनिक खोलने की भी तैयारी है। मोहल्ला क्लीनिकों पर लोग प्राथमिक उपचार पा सकेंगे। निश्चित ही मोहल्ला क्लीनिक मरीजों के साथी बनेंगे।
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स्मार्ट सिटी योजना के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार होगा। इन दोनों क्षेत्रों में काम कराना सरकार के साथ ही हमारी भी प्राथमिकता में है, क्योंकि इससे प्रत्येक परिवार जुड़ा है। संबंधित विभागों से डाटा लेना बाकी है। साथ ही बैठक भी होनी है। इसका पूरा खाका मगर जैसे ही शासन से पैसा रिलीज होगा तो काम भी होगा।
गौरव वर्मा, नगरायुक्त।
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सहारनपुर। शहर के सरकारी मदरसों और स्कूलों में टाट पट्टी पर बैठ कर पढ़ाई करना अब गुजरे जमाने की बात होगी। शहर के स्मार्ट सिटी योजना में चयनित होने के बाद शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार होना लाजिमी है। नगर निगम ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। योजना के तहत शहर के केवल सरकारी स्कूल ही नहीं बल्कि मदरसों को भी आधुनिक बनाया जाएगा। स्कूलों और मदरसों में इंटरनेट सुविधा से लैस लैब बनाने के साथ ही कक्षों में बदलाव, बच्चों के बैठने की व्यवस्था और कक्षाओं में डिजिटल बोर्ड लगाए जाएंगे।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए नगर निगम तैयारी में जुट गया है। शहर में कितने सरकारी स्कूल हैं और उनको आधुनिक बनाने के लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता होगी। इसके लिए सर्वे कराया जाएगा। शिक्षा विभाग से भी इसमें डाटा मांगा जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार शहर में बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 80 के करीब हैं। मदरसों की संख्या का पता लगाया जा रहा है। शहर में कुल मदरसों की संख्या 500 के करीब है। इनमें से अनेक सहायता प्राप्त मदरसे स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकास होने का इंतजार भी अभी से करने लगे हैं। नगरायुक्त का कहना है कि मदरसों को स्मार्ट बनाने के लिए पहले मदरसों से जुड़े अधिकारियों और उनके प्रमुखों के साथ बैठक की जाएगी। उसके बाद ही स्थिति का सही पता चल सकेगा कि मदरसों को स्मार्ट बनाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है। निगम की तैयारियों से यह उम्मीद बंधी है कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से लैस मदरसों के बच्चे शानदार फर्नीचर पर बैठकर कंप्यूटर की कीबोर्ड पर उंगलियां दौड़ाते नजर आएंगे। वहीं कक्षाओं में लटके ब्लैक बोर्ड का स्थान डिजिटल बोर्ड या प्रोजेक्टर लेंगे। निश्चित ही आधुनिक बनने के बाद सरकारी स्कूलों और मदरसों के बच्चे भी आधुनिकता की दौड़ में किसी से पीछे नहीं रहेंगे।
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अनेक स्कूलों के पास अपने भवन तक नहीं
शहर में संचालित परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की बात करें तो अनेक विद्यालयों के पास अपने भवन नहीं हैं। वह शुरू से ही किराये के भवनों में चल रहे हैं। इसके अलावा अनेक विद्यालयों के भवन बेहद जर्जर हो चुके हैं जो कभी भी धराशाही हो सकते हैं। ऐसे कुछ भवनों को विभाग ने छोड़ भी दिया है। यानी इन भवनों में पढ़ने वाले बच्चों को अन्य जगह पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। ऐसे में स्मार्ट सिटी योजना के तहत सबसे पहले जरूरत विद्यालयों को अच्छे भवन देने की होगी जो बड़े बजट का काम रहेगा।
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मोहल्ला क्लीनिक बनेंगे मरीजों के साथी
स्मार्ट सिटी योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा। इसके लिए एक ओर जहां सरकारी अस्पताल में सुविधाएं बढ़ेंगी। वहीं शहर भर में मोहल्ला क्लीनिक खोलने की भी तैयारी है। मोहल्ला क्लीनिकों पर लोग प्राथमिक उपचार पा सकेंगे। निश्चित ही मोहल्ला क्लीनिक मरीजों के साथी बनेंगे।
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स्मार्ट सिटी योजना के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार होगा। इन दोनों क्षेत्रों में काम कराना सरकार के साथ ही हमारी भी प्राथमिकता में है, क्योंकि इससे प्रत्येक परिवार जुड़ा है। संबंधित विभागों से डाटा लेना बाकी है। साथ ही बैठक भी होनी है। इसका पूरा खाका मगर जैसे ही शासन से पैसा रिलीज होगा तो काम भी होगा।
गौरव वर्मा, नगरायुक्त।