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ग्लोकल इंडिया बिल्ड कंपनी को हाइकोर्ट ने दी राहत
Updated Sat, 06 Jan 2018 12:13 AM IST
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सहारनपुर। आरजी पैलेस के विवादित प्लाटों के मामले में हाईकोर्ट ने ग्लोकल इंडिया बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को राहत दी है। कोर्ट ने कंपनी को दो माह के अंदर जुर्माना जमा कराने और मंडलायुक्त को छह सप्ताह के अंदर मामले के निस्तारण के आदेश दिए।
बता दें कि रजिस्ट्री में स्टांप की कमी पाए जाने पर प्रशासन ने ग्लोकल इंडिया बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के आरजी पैलेस में स्थित दो प्लाटों पर करीब दो करोड़ का जुर्माना लगाया था। इस आदेश के खिलाफ कंपनी राजस्व परिषद में गई थी। राजस्व परिषद ने करोड़ों का जुर्माना लाखों में कर दिया था। इसमें कोर्ट रोड स्थित आरजी पैलेस परिसर में स्थित 1450 वर्ग के प्लाट का एक करोड़ 16 लाख 42 हजार 440 रुपये जुर्माने को केवल छह लाख 85 हजार 230 रुपये कर दिया। इसी तरह दूसरे भूूभाग के 1250 गज के प्लाट पर लगे जुर्माने 45 लाख 57 हजार 600 रुपये को 17 लाख दो हजार 538 रुपये कर दिया। उधर, प्रशासन ने जुर्माना ना जमा होने पर प्लाटों की नीलामी कराकर एक व्यापारी और उसके रिश्तेदार के पक्ष में बैनामा करा दिया था। कब्जे की गरज से व्यापारी और उसके रिश्तेदार ने दोनों प्लाटों पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया, जबकि विकास प्राधिकरण ने नक्शा पास ना होने की वजह से निर्माण पर रोक लगा रखी है, लेकिन इसके बाद भी ग्लोकल इंडिया बिल्ड कंपनी को प्रशासन की ओर से राहत नहीं मिली। कंपनी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए अपना पक्ष रखा। कंपनी के अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि आरजी पैलेस के दोनों प्लाट उनके हैं। प्रशासन ने स्टांप ड्यूटी का जुर्माना जमा ना होने का हवाला देते हुए प्लाटों की नीलामी करा दी, जबकि राजस्व परिषद 29 दिसंबर को जुर्माने को कम कर चुका है, लेकिन प्रशासन ने इसी दिन व्यापारी और उसके रिश्तेदार के नाम बैनामा करा दिया। शुक्रवार को ग्लोकल इंडिया कंपनी को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कंपनी दो सप्ताह के अंदर जुर्माना जमा कराए। इसके साथ ही मंडलायुक्त को आदेश दिए गए कि वह छह सप्ताह में मामले का निस्तारण कराए और प्लाटों पर यथा स्थिति बनी रही। अग्रिम आदेश तक किसी भी प्रकार का निर्माण कराए ना कराया जाए।
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हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद हो रहा काम
सहारनपुर। हाईकोर्ट ने ग्लोकल इंडिया बिल्ड कंपनी के पक्ष में कोर्ट ने स्टे दिया है, लेकिन दोनों प्लाटों पर निर्माण कार्य जारी है। निर्माणकर्ता प्लाट अपना होने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में कोर्ट के स्टे के बावजूद निर्माण होने से प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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बता दें कि रजिस्ट्री में स्टांप की कमी पाए जाने पर प्रशासन ने ग्लोकल इंडिया बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के आरजी पैलेस में स्थित दो प्लाटों पर करीब दो करोड़ का जुर्माना लगाया था। इस आदेश के खिलाफ कंपनी राजस्व परिषद में गई थी। राजस्व परिषद ने करोड़ों का जुर्माना लाखों में कर दिया था। इसमें कोर्ट रोड स्थित आरजी पैलेस परिसर में स्थित 1450 वर्ग के प्लाट का एक करोड़ 16 लाख 42 हजार 440 रुपये जुर्माने को केवल छह लाख 85 हजार 230 रुपये कर दिया। इसी तरह दूसरे भूूभाग के 1250 गज के प्लाट पर लगे जुर्माने 45 लाख 57 हजार 600 रुपये को 17 लाख दो हजार 538 रुपये कर दिया। उधर, प्रशासन ने जुर्माना ना जमा होने पर प्लाटों की नीलामी कराकर एक व्यापारी और उसके रिश्तेदार के पक्ष में बैनामा करा दिया था। कब्जे की गरज से व्यापारी और उसके रिश्तेदार ने दोनों प्लाटों पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया, जबकि विकास प्राधिकरण ने नक्शा पास ना होने की वजह से निर्माण पर रोक लगा रखी है, लेकिन इसके बाद भी ग्लोकल इंडिया बिल्ड कंपनी को प्रशासन की ओर से राहत नहीं मिली। कंपनी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए अपना पक्ष रखा। कंपनी के अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि आरजी पैलेस के दोनों प्लाट उनके हैं। प्रशासन ने स्टांप ड्यूटी का जुर्माना जमा ना होने का हवाला देते हुए प्लाटों की नीलामी करा दी, जबकि राजस्व परिषद 29 दिसंबर को जुर्माने को कम कर चुका है, लेकिन प्रशासन ने इसी दिन व्यापारी और उसके रिश्तेदार के नाम बैनामा करा दिया। शुक्रवार को ग्लोकल इंडिया कंपनी को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कंपनी दो सप्ताह के अंदर जुर्माना जमा कराए। इसके साथ ही मंडलायुक्त को आदेश दिए गए कि वह छह सप्ताह में मामले का निस्तारण कराए और प्लाटों पर यथा स्थिति बनी रही। अग्रिम आदेश तक किसी भी प्रकार का निर्माण कराए ना कराया जाए।
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हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद हो रहा काम
सहारनपुर। हाईकोर्ट ने ग्लोकल इंडिया बिल्ड कंपनी के पक्ष में कोर्ट ने स्टे दिया है, लेकिन दोनों प्लाटों पर निर्माण कार्य जारी है। निर्माणकर्ता प्लाट अपना होने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में कोर्ट के स्टे के बावजूद निर्माण होने से प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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