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बकरीद पर कुरबानी करना शरीयत और इस्लाम का अहम हिस्सा: उलमा
Updated Thu, 31 Aug 2017 01:52 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। ईद-उल-अजहा पर जानवरों की कुर्बानी को समाज में कुरीति बताने वाले लखनऊ के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के अध्यक्ष खुर्शीद आगा के बयान पर देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार किया है। उनका कहना है कि आगा को चाहिए कि वह पहले कुरआन को पढ़ें, फिर यह साबित करें कि कुर्बानी जायज है या नाजायज।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि खुर्शीद आगा जैसे लोग मुसलमानों को भ्रमित करने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। कुर्बानी शरीयत और इस्लाम का अहम हिस्सा है जो कुरआन व हदीस से भी साबित है। दारुल इल्म के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती आरिफ का कहना है कि अल्लाह ने हजरत इब्राहीम से अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करने को कहा। जिसके चलते उन्होंने अपने इकलौते बेटे हजरत इस्माइल को कुर्बान करने का फैसला किया। जब वह उनकी कुर्बानी कर रहे थे तब अल्लाह ने खुश होकर वहां एक दुंबा डाल दिया था। तभी से कुर्बानी का सिलसिला जारी है। फतवा ऑनलाइन के प्रभारी मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा कि कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए मजहब को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। ऐसे लोग अपने स्वार्थ की खातिर समाज में फितना पैदा करने का काम करते हैं। इसलिए सभी को चाहिए कि वह ऐसे लोगों से बचें और अल्लाह की रजा (खुशी) के लिए ईद-उल-अजहा पर कुरबानी करें।
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जमीयत उलमा-ए-हिंद के कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि खुर्शीद आगा जैसे लोग मुसलमानों को भ्रमित करने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। कुर्बानी शरीयत और इस्लाम का अहम हिस्सा है जो कुरआन व हदीस से भी साबित है। दारुल इल्म के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती आरिफ का कहना है कि अल्लाह ने हजरत इब्राहीम से अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करने को कहा। जिसके चलते उन्होंने अपने इकलौते बेटे हजरत इस्माइल को कुर्बान करने का फैसला किया। जब वह उनकी कुर्बानी कर रहे थे तब अल्लाह ने खुश होकर वहां एक दुंबा डाल दिया था। तभी से कुर्बानी का सिलसिला जारी है। फतवा ऑनलाइन के प्रभारी मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा कि कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए मजहब को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। ऐसे लोग अपने स्वार्थ की खातिर समाज में फितना पैदा करने का काम करते हैं। इसलिए सभी को चाहिए कि वह ऐसे लोगों से बचें और अल्लाह की रजा (खुशी) के लिए ईद-उल-अजहा पर कुरबानी करें।
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