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आयुष्मान भारत योजना में सहयोग नहीं कर रहे निजी अस्पताल
Updated Mon, 05 Nov 2018 12:23 AM IST
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आयुष्मान भारत योजना में सहयोग नहीं कर रहे निजी अस्पताल
सहारनपुर। आयुष्मान भारत योजना के पैनल में शामिल होने में निजी अस्पताल संचालक सहयोग नहीं कर रहे हैं। जिले में 150 से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल हैं। लेकिन योजना के पैनल में महज सात निजी अस्पताल ही अब तक शामिल हुए हैं। यदि निजी अस्पतालों की संख्या पैनल में बढ़ती है तो योजना के पात्रों तक अधिक से अधिक लाभ पहुंचेगा।
बता दें कि योजना के तहत समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा है। इसमें सरकारी अस्पतालों और राजकीय मेडिकल कालेजों के साथ ही निजी मेडिकल कालेजों और अस्पतालों को भी जोड़ा जाना है। इसका उद्देश्य नजदीक चिकित्सा उपलब्ध कराना और अधिक से अधिक पात्रों तक लाभ पहुंचाना शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग करीब दो माह से निजी अस्पतालों के साथ पत्र व्यवहार कर योजना के साथ जुड़ने की अपील कर रहा है। इसके लिए विभागीय अधिकारी निजी अस्पताल संचालकों से मिलकर भी योजना से जुड़ने पर जोर दे चुके हैं। मगर अब तक मात्र सात निजी अस्पताल ही जुड़ पाए हैं। बाकी जिन अस्पतालों से जुड़ने के लिए संपर्क किया जा रहा है, वे इससे इनकार कर रहे हैं।
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इलाज के बदले मिलने वाले खर्च से संतुष्ट नहीं
आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार ने अलग-अलग बीमारियों के इलाज का खर्च निर्धारित किया है। निजी अस्पतालों को खर्च पर आपत्ति है। उनका कहना है कि इलाज की स्थिति देखते हुए खर्च राशि को बढ़ाया जाना चाहिए।
जिले में एक लाख 38 हजार पात्र
- आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले में कुल एक लाख 38 हजार पात्र लोग सामने आए हैं। इनके कार्ड बनाने का कार्य इन दिनों, जिला अस्पताल, मेडिकल कालेज और सीएचसी और पीएचसी पर चल रहा है। कार्ड बनवाने के लिए पात्र व्यक्ति के पास सूचना पत्र होना जरूरी है, जिस पर पात्र व्यक्ति का आईडी नंबर लिखा है। ये सूचना पत्र आशाओं के माध्यम से पात्र परिवारों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
आयुष्मान भारत योजना से अभी तक सात निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है। अन्य अस्पतालों से भी संपर्क किया जा रहा है। कुछ अस्पताल संचालकों को इलाज की एवज में मिलने वाले खर्च पर आपत्ति है, जो खर्च को कम बता रहे हैं। प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा अस्पतालों को योजना के पैनल में शामिल कराया जाए। - डॉक्टर बीएस सोढी, सीएमओ।
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सहारनपुर। आयुष्मान भारत योजना के पैनल में शामिल होने में निजी अस्पताल संचालक सहयोग नहीं कर रहे हैं। जिले में 150 से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल हैं। लेकिन योजना के पैनल में महज सात निजी अस्पताल ही अब तक शामिल हुए हैं। यदि निजी अस्पतालों की संख्या पैनल में बढ़ती है तो योजना के पात्रों तक अधिक से अधिक लाभ पहुंचेगा।
बता दें कि योजना के तहत समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा है। इसमें सरकारी अस्पतालों और राजकीय मेडिकल कालेजों के साथ ही निजी मेडिकल कालेजों और अस्पतालों को भी जोड़ा जाना है। इसका उद्देश्य नजदीक चिकित्सा उपलब्ध कराना और अधिक से अधिक पात्रों तक लाभ पहुंचाना शामिल हैं।
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स्वास्थ्य विभाग करीब दो माह से निजी अस्पतालों के साथ पत्र व्यवहार कर योजना के साथ जुड़ने की अपील कर रहा है। इसके लिए विभागीय अधिकारी निजी अस्पताल संचालकों से मिलकर भी योजना से जुड़ने पर जोर दे चुके हैं। मगर अब तक मात्र सात निजी अस्पताल ही जुड़ पाए हैं। बाकी जिन अस्पतालों से जुड़ने के लिए संपर्क किया जा रहा है, वे इससे इनकार कर रहे हैं।
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इलाज के बदले मिलने वाले खर्च से संतुष्ट नहीं
आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार ने अलग-अलग बीमारियों के इलाज का खर्च निर्धारित किया है। निजी अस्पतालों को खर्च पर आपत्ति है। उनका कहना है कि इलाज की स्थिति देखते हुए खर्च राशि को बढ़ाया जाना चाहिए।
जिले में एक लाख 38 हजार पात्र
- आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले में कुल एक लाख 38 हजार पात्र लोग सामने आए हैं। इनके कार्ड बनाने का कार्य इन दिनों, जिला अस्पताल, मेडिकल कालेज और सीएचसी और पीएचसी पर चल रहा है। कार्ड बनवाने के लिए पात्र व्यक्ति के पास सूचना पत्र होना जरूरी है, जिस पर पात्र व्यक्ति का आईडी नंबर लिखा है। ये सूचना पत्र आशाओं के माध्यम से पात्र परिवारों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
आयुष्मान भारत योजना से अभी तक सात निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है। अन्य अस्पतालों से भी संपर्क किया जा रहा है। कुछ अस्पताल संचालकों को इलाज की एवज में मिलने वाले खर्च पर आपत्ति है, जो खर्च को कम बता रहे हैं। प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा अस्पतालों को योजना के पैनल में शामिल कराया जाए। - डॉक्टर बीएस सोढी, सीएमओ।