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साक्ष्य मिलते गए और परतें खुलती गईं
Updated Wed, 16 May 2018 12:20 AM IST
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सहारनपुर। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया की मौत के मामले में पुलिस को एक के बाद एक साक्ष्य मिलते गए और घटना की परतें खुलती चली गईं। दो वीडियो और दो ऑडियो ने पुलिस की जांच को न सिर्फ एक दिशा दी, बल्कि जिले को जातीय संघर्ष की आग में झुलसने से बचा लिया।
मल्हीपुर रोड पर एक ओर महाराणा प्रताप जयंती कार्यक्रम का आयोजन चल रहा था, जबकि एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित रामनगर में ठीक साढ़े ग्यारह बजे भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया को गोली लग गई। इस घटना ने पुलिस और प्रशासन के होश उड़ा दिए। भीम आर्मी ने राजपूत समाज के युवकों पर गोली मारने का आरोप लगा दिया तो दलितों में आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते अस्पताल में भीड़ लग गई।
घटना के एक घंटे के अंदर ही एक वीडियो वायरल हो गई। 27 सेकेंड के इस वीडियो के मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और सबसे पहले हंगामा कर रहे भीम आर्मी के लोगों को ही वीडियो दिखाकर घटना को संदिग्ध बता दिया। वीडियो में खून के धब्बे साफ नजर आ रहे थे। कुछ ही देर में नौ सेकेंड की एक और वीडियो वायरल हो गई। जिसमें महिलाएं वीडियो बनते देख झाड़ू लेकर भागती हुई एक मकान में घुसती नजर आईं। इन दोनों वीडियो के वायरल होने के बाद भी भीम आर्मी के कुछ लोग उसे सच मानने को तैयार नहीं हुुए। तीसरे दिन एक ऑडियो वायरल हो गई, जिसमें गांव के ही दो व्यक्ति आपस में घटना के बारे में बात कर रहे थे। जिसमें पूरी घटना का विवरण बता दिया गया। इस ऑडियो ने पुलिस की मुश्किल कुछ आसान कर दी। इस ऑडियो में उस मकान का भी जिक्र किया गया, जिसमें झाड़ू लेकर महिला प्रवेश करते हुए नजर आई थी। पुलिस ने उस मकान को टारगेट बनाया और भीम आर्मी के पदाधिकारियों को अपने पक्ष में करते हुए उस मकान को खुलवाया गया। यह मकान सचिन के साथी निहाल का था। हालांकि मकान पूरी तरह से धुला हुआ साफ था। एक बालिका ने खून पड़े होने एवं धोने की पूरी बात पुलिस को बताई। इसी दौरान एक और ऑडियो वायरल हुआ और उसमें भी घटना के बारे में गांव के लोगों की बातचीत आई।
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इसके बाद जब कमरे की तलाशी ली गई और मुरादाबाद से आई विशेष फोरेंसिक जांच टीम ने परीक्षण किया तो घटना की पूरी परतें खुल गईं। कमरे से फटा हुआ गद्दा, खून के धब्बे समेत पर्याप्त सबूत पुलिस के पास पहुंच गए। जिसके बाद घटना का खुलासा करना पुलिस के लिए आसान होता चला गया।
--------
--। भीम आर्मी से बात करके पुलिस ने पकड़ा आरोपी
पुलिस किसी बवाल से बचने के लिए साक्ष्य होने के बावजूद किसी को पकड़ने से पीछे हटती रही। पुलिस ने सबसे पहले भीम आर्मी के पदाधिकारियों को घटना के खुलासे के लिए अपने पक्ष में किया। उन्हें साक्ष्य दिखाए गए और वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया। पदाधिकारियों की पूरी सहमति होने के बाद पुलिस ने प्रवीण उर्फ मांडा को गिरफ्तार किया।
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मल्हीपुर रोड पर एक ओर महाराणा प्रताप जयंती कार्यक्रम का आयोजन चल रहा था, जबकि एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित रामनगर में ठीक साढ़े ग्यारह बजे भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया को गोली लग गई। इस घटना ने पुलिस और प्रशासन के होश उड़ा दिए। भीम आर्मी ने राजपूत समाज के युवकों पर गोली मारने का आरोप लगा दिया तो दलितों में आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते अस्पताल में भीड़ लग गई।
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घटना के एक घंटे के अंदर ही एक वीडियो वायरल हो गई। 27 सेकेंड के इस वीडियो के मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और सबसे पहले हंगामा कर रहे भीम आर्मी के लोगों को ही वीडियो दिखाकर घटना को संदिग्ध बता दिया। वीडियो में खून के धब्बे साफ नजर आ रहे थे। कुछ ही देर में नौ सेकेंड की एक और वीडियो वायरल हो गई। जिसमें महिलाएं वीडियो बनते देख झाड़ू लेकर भागती हुई एक मकान में घुसती नजर आईं। इन दोनों वीडियो के वायरल होने के बाद भी भीम आर्मी के कुछ लोग उसे सच मानने को तैयार नहीं हुुए। तीसरे दिन एक ऑडियो वायरल हो गई, जिसमें गांव के ही दो व्यक्ति आपस में घटना के बारे में बात कर रहे थे। जिसमें पूरी घटना का विवरण बता दिया गया। इस ऑडियो ने पुलिस की मुश्किल कुछ आसान कर दी। इस ऑडियो में उस मकान का भी जिक्र किया गया, जिसमें झाड़ू लेकर महिला प्रवेश करते हुए नजर आई थी। पुलिस ने उस मकान को टारगेट बनाया और भीम आर्मी के पदाधिकारियों को अपने पक्ष में करते हुए उस मकान को खुलवाया गया। यह मकान सचिन के साथी निहाल का था। हालांकि मकान पूरी तरह से धुला हुआ साफ था। एक बालिका ने खून पड़े होने एवं धोने की पूरी बात पुलिस को बताई। इसी दौरान एक और ऑडियो वायरल हुआ और उसमें भी घटना के बारे में गांव के लोगों की बातचीत आई।
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इसके बाद जब कमरे की तलाशी ली गई और मुरादाबाद से आई विशेष फोरेंसिक जांच टीम ने परीक्षण किया तो घटना की पूरी परतें खुल गईं। कमरे से फटा हुआ गद्दा, खून के धब्बे समेत पर्याप्त सबूत पुलिस के पास पहुंच गए। जिसके बाद घटना का खुलासा करना पुलिस के लिए आसान होता चला गया।
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--। भीम आर्मी से बात करके पुलिस ने पकड़ा आरोपी
पुलिस किसी बवाल से बचने के लिए साक्ष्य होने के बावजूद किसी को पकड़ने से पीछे हटती रही। पुलिस ने सबसे पहले भीम आर्मी के पदाधिकारियों को घटना के खुलासे के लिए अपने पक्ष में किया। उन्हें साक्ष्य दिखाए गए और वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया। पदाधिकारियों की पूरी सहमति होने के बाद पुलिस ने प्रवीण उर्फ मांडा को गिरफ्तार किया।