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मतदाताओं की चुप्पी से असमंजस में सियासी दल
Updated Tue, 28 Nov 2017 12:58 AM IST
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मतदाताओं की चुप्पी से असमंजस में सियासी दल
सहारनपुर। मतदाताओं की चुप्पी से राजनीतिक दल पूरी तरह से असमंजस में हैं। निकाय चुनाव में प्रचार का शोर थमने के बाद अब राजनीतिक दल अपने वोट बैंक को बूथ पर पहुंचाने की जुगत में जुटे हैं। दूसरी तरफ मतदाताओं को रिझाने की आखिरी कोशिश में जुटे राजनीतिक दल अब गुपचुप बैठकों में जुटे हैं। देर रात कमेटियां बनाकर मतदाताओं को पाले में साधे रखने की रणनीति बनाई गई। नगर निगम सहित जिले भर के 11 निकायों में राजनीतिक दल ध्रुवीकरण की भी आस लगाए हुए हैं। ऐसे में जीत की राह तलाश रहे दावेदार अब ऐड़ी चोटी का जोर लगाने में जुट गए हैं।
पहली बार हो रहे नगर निगम चुनाव में भाजपा से संजीव वालिया, बसपा से हाजी फजलुर्रहमान, कांग्रेस से शशि वालिया और सपा से साजिद चौधरी मैदान में उतरे हैं। भाजपा हर हाल में हिंदू मतों को एकजुट कर अपने पाले में रखना चाहती है। बसपा दलित-मुस्लिम गठजोड़ के फार्मूले को हर हाल में लागू करना चाहती है। कांग्रेस इमरान मसूद के जरिए मुस्लिम मतों को साधने के साथ ही हिंदू मतों में सेंधमारी की योजना में है। विधानसभा चुनाव में जीत से उत्साहित सपा संजय गर्ग के जरिए हिंदू मतों को मुस्लिम मतों के साथ अपनी राह आसान करना चाहती है। फिलहाल चुनाव में प्रचार थमने के बाद अब मतदाताओं के पत्ते साफ नहीं होने से राजनीतिक दल अब भी असमंजस में हैं। उधर, अब मतदान प्रतिशत को लेकर भी प्रत्याशी तैयारी में जुटने लगे हैं। निकाय चुनाव में पहली बार सपा और बसपा अपने चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव के ठीक बाद हो रहे निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपना सियासी जमीन नापने में जुटे हैं। ऐसे में अब 29 नवंबर को मतदाताओं का मूड भांपने से पहले मैदान में जुटे प्रत्याशी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।
दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर
इस चुनाव में अब सभी दलों के दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। निकाय चुनाव के लिए भाजपा ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही को मैदान में उतारा। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में जीते चार विधायक और सांसद सहित अन्य नेताओं की परीक्षा है। कांग्रेस में इमरान मसूद को एक बार फिर अपने राजनीतिक वजूद को साबित करना है। बसपा अपने दलित मुस्लिम फार्मूले को हर हाल में सही साबित करने की अग्निपरीक्षा में हैं। इसके अलावा हाल ही बसपा का दामन थामे रशीद मसूद को भी अपने राजनीतिक कद को दिखाना होगा। सपा में विधायक संजय गर्ग, एमएलसी उमर अली खान और साहब सिंह सैनी की प्रतिष्ठा दांव पर है।
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सहारनपुर। मतदाताओं की चुप्पी से राजनीतिक दल पूरी तरह से असमंजस में हैं। निकाय चुनाव में प्रचार का शोर थमने के बाद अब राजनीतिक दल अपने वोट बैंक को बूथ पर पहुंचाने की जुगत में जुटे हैं। दूसरी तरफ मतदाताओं को रिझाने की आखिरी कोशिश में जुटे राजनीतिक दल अब गुपचुप बैठकों में जुटे हैं। देर रात कमेटियां बनाकर मतदाताओं को पाले में साधे रखने की रणनीति बनाई गई। नगर निगम सहित जिले भर के 11 निकायों में राजनीतिक दल ध्रुवीकरण की भी आस लगाए हुए हैं। ऐसे में जीत की राह तलाश रहे दावेदार अब ऐड़ी चोटी का जोर लगाने में जुट गए हैं।
पहली बार हो रहे नगर निगम चुनाव में भाजपा से संजीव वालिया, बसपा से हाजी फजलुर्रहमान, कांग्रेस से शशि वालिया और सपा से साजिद चौधरी मैदान में उतरे हैं। भाजपा हर हाल में हिंदू मतों को एकजुट कर अपने पाले में रखना चाहती है। बसपा दलित-मुस्लिम गठजोड़ के फार्मूले को हर हाल में लागू करना चाहती है। कांग्रेस इमरान मसूद के जरिए मुस्लिम मतों को साधने के साथ ही हिंदू मतों में सेंधमारी की योजना में है। विधानसभा चुनाव में जीत से उत्साहित सपा संजय गर्ग के जरिए हिंदू मतों को मुस्लिम मतों के साथ अपनी राह आसान करना चाहती है। फिलहाल चुनाव में प्रचार थमने के बाद अब मतदाताओं के पत्ते साफ नहीं होने से राजनीतिक दल अब भी असमंजस में हैं। उधर, अब मतदान प्रतिशत को लेकर भी प्रत्याशी तैयारी में जुटने लगे हैं। निकाय चुनाव में पहली बार सपा और बसपा अपने चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव के ठीक बाद हो रहे निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपना सियासी जमीन नापने में जुटे हैं। ऐसे में अब 29 नवंबर को मतदाताओं का मूड भांपने से पहले मैदान में जुटे प्रत्याशी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।
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दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर
इस चुनाव में अब सभी दलों के दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। निकाय चुनाव के लिए भाजपा ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही को मैदान में उतारा। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में जीते चार विधायक और सांसद सहित अन्य नेताओं की परीक्षा है। कांग्रेस में इमरान मसूद को एक बार फिर अपने राजनीतिक वजूद को साबित करना है। बसपा अपने दलित मुस्लिम फार्मूले को हर हाल में सही साबित करने की अग्निपरीक्षा में हैं। इसके अलावा हाल ही बसपा का दामन थामे रशीद मसूद को भी अपने राजनीतिक कद को दिखाना होगा। सपा में विधायक संजय गर्ग, एमएलसी उमर अली खान और साहब सिंह सैनी की प्रतिष्ठा दांव पर है।
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