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दारुल उलूम अपने मकसद से कभी नहीं भटका: मदनी

Fri, 11 Aug 2017 12:32 AM IST
Updated Fri, 11 Aug 2017 12:32 AM IST
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दारुल उलूम अपने मकसद से कभी नहीं भटका: मदनी
देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम में तबलीगी जमात की गतिविधियों पर पूर्णतया पाबंदी लगाए जाने के मामले पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष व दारुल उलूम के उस्ताद-ए-हदीस मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि तबलीगी जमात का दारुल उलूम से कोई विवाद नहीं है। जब तक उनका मसला हल नहीं हो जाता तब तक दारुल उलूम की चारदीवारी में तबलीगी जमात की सरगर्मियां बंद रहेंगी।
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बृहस्पतिवार को एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया में आयोजित कार्यक्रम में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि दारुल उलूम और मदारिस-ए-इस्लामिया एक दायरे में मखसूस है। तालीम व तरबियत का एक तरीके कार है और दारुल उलूम कभी इस दायरे से बाहर नहीं निकला। दारुल उलूम ने अपने रुख से हटकर कभी किसी सरगर्मी में हिस्सा नहीं लिया। दारुल उलूम का मकसद इस्लाम को जिंदा रखना और मुसलमानों को हक पर कायम रखने के साथ आने वाली नस्लों तथा दीन व इमान की हिफाजत करना है। क्योंकि हमारे बुजुर्गों ने हमें यही तरबियत (सीख) दी है जिस पर दारुल उलूम आज भी चल रहा है। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि इस वक्त फिरकापरस्त ताकतों की गहरी नजरें दारुल उलूम और मदारिस-ए-इस्लामिया पर लगी हुई हैं। इसलिए हम सभी को बहुत चौकन्ना होकर दीन की खिदमत को अंजाम देना है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक अरसा तक दारुल उलूम में तबलीगी जमात का काम होता रहा है, लेकिन आज हालात बदल गए हैं। जिसके चलते दारुल उलूम ने इदारे और छात्रों के हित में यह फैसला लिया है। इस मौके पर दारुल उलूम के उस्ताद व भारी संख्या में मदरसा छात्र मौजूद रहे।
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