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बीमारी की हालत में जबरन रोजा रखना बड़ा गुनाह

Mon, 20 May 2019 12:07 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 20 May 2019 12:07 AM IST
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बीमारी की हालत में जबरन रोजा रखना बड़ा गुनाह
बीमारी की हालत में जबरन रोजा रखना बड़ा गुनाह
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सहारनपुर। हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए गए। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम कारी इसहाक गोरा ने कहा कि बीमारी की हालत में जबरन रोजा रखना और रखवाना बड़ा गुनाह है। अगर जिंदगी को खतरा हो तो रोजा कजा कर देना चाहिए। ऐसा न करना शरीयत में आत्महत्या जैसा करना माना गया है, जो बहुत बड़ा गुनाह है। उन्होंने कहा कि पवित्र रमजान का पहला अशराह पूरा हो कर दूसरा अशराह शुरू हो चुका है। रमजान माह बहुत तेजी से निकल रहा है। मुसलमानों को चाहिए इस पवित्र महीने का पूरा फायदा उठाएं और खुदा से अपने पड़ोसियों, रिश्तेदारों और खास लोगों सहित पूरे हिंदुस्तानियों के लिए दुआ करें। रमजान में मिलने वाले हर लाभ को जाया न होने दें, जितना हो सके अल्लाह से खूब मांगे।
सवाल :- हरियाणा के गांव मोई निवासी फरहा दिलशाद ने पूछा कि उनके परिवार के लोग और वह खुद भी काफी समय से कोयला चबा कर दांतों को साफ करते हैं। उनको इसी से साफ करना अच्छा लगता है। अब वह रोजे में भी ऐसा ही करते आ रहे है। उनके मामा ने बताया कि रोजे की हालत में कोयला चबा कर दांत साफ करने से रोजा टूट जाता है। शरीयत में इसके लिए क्या हुक्म है।
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जवाब :- कोयला चबाकर दांत साफ नहीं करने चाहिए। शरीयत के अनुसार अगर कोयले का अंश हलक के अंदर चला गया तो रोजा खत्म हो जाएगा।
सवाल:- बेहट निवासी सादिक सिद्दीकी ने पूछा कि वह रोज अपने घर से पांच किलोमीटर दूर रोजे की हालत में काम से जाते हैं। रास्ते में धूल और मिट्टी उनके मुंह और नाक जरिए हलक में जाती है। क्या इससे उनका रोजा तो नहीं टूटता है।
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जवाब:- शरीयत के अनुसार हलक में बिना इख्तियार गर्द, गुब्बार, धूल और मिट्टी जाने से रोजा नहीं टूटता है, लेकिन यदि किसी ने जान बूझकर रोजे की हालत में गर्द, ग़ुब्बार, धूल, मिट्टी को अपने हलक में लिया तो ऐसा करने से रोजा टूट जाएगा।
सवाल :- मुुजफ्फरनगर निवासी सरवर ने मालूम किया कि उनके चाचा माली हालत से बहुत परेशान हैं। क्या शरीयत के अनुसार वह अपने चाचा को जकात का पैसा दे सकते हैं?
जवाब:- जी हां! शरीयत के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति के चाचा या ताया जकात लेने के मुस्ताहिक हैं तो उनको जकात दी जा सकती है। इसीलिए आप भी अपने चाचा और ताया को जकात का पैसा दे सकते हैं। शरीयत में इसकी बिल्कुल इजाजत है।

सवाल:- माहीपुरा निवासी शालू ने पूछा कि वह रोजे की हालत में थी कि अचानक उनकी आंख में कुछ कचरा आकर गिर गया, जिस वजह से उनकी आंखों से बहुत पानी निकल रहा है। वह पूछना चाहती हैं कि क्या अब उनका रोजा खत्म हो गया है।
जवाब:- रोजे की हालत में आंख में कुछ गिर जाने की वजह से पानी बहने पर रोजा नहीं टूटता है। आपका रोजा सलामत है।
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