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गायब रिकार्ड की तलाश में जुटा विद्युत निगम
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गायब रिकार्ड की तलाश में जुटा विद्युत निगम
सहारनपुर। विद्युत निगम पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक के गायब रिकॉर्ड को तलाशने में जुटा हुआ है। लेकिन अधिकारियों को या तो खुर्द-बुर्द रिकार्ड मिल रहा है, जिसमें कुछ समझ में नहीं आ रहा, या फिर रिकॉर्ड है ही नहीं। विद्युत निगम 1058 करोड़ रुपये के बकाया को कम करने के लिए एक-एक उपभोक्ता से पुरानी रसीदें मांग कर फीड करा रहे हैं। इनमें अधिकांश बकाया ऐसा है जिसका भुगतान एकमुश्त समाधान योजना के तहत लिया गया है।
विद्युत निगम के गायब हुए रिकॉर्ड को तलाशने में निगम के प्रत्येक स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। स्टोर के पुराने रिकॉर्ड को बड़ी सावधानी से खंगाला जा रहा है। लेकिन जो रसीदें निगम को मिलीं हैं, उनमें से अधिकांश खुर्द-बुर्द की जा चुकीं हैं। जिनमें न तो नाम समझ में आ पा रहा है और न ही भुगतान राशि पता लग पा रही है। जिनकी खातों में फीडिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे में बकाया राशि बढ़ती ही जा रही है। इसमें अधिकांश बकाया एकमुश्त समाधान योजना के तहत जमा कराई गई धनराशि का है। जिनकी रसीदों का कोई पता नही चल पा रहा है।
अब निगम द्वारा उपभोक्ताओं से पुरानी रसीदें तलाश करने के लिए कहा जा रहा है। जिससे उनकी फीडिंग उपभोक्ताओं के खातों में की जा सके और बकाया राशि कम हो सके। इससे उपभोक्ताओं पर बकाया वसूली की सख्ती रुक सकेगी और निगम को भी इससे राहत मिलेगी। अधीक्षण अभियंता ग्रामीण वीके शर्मा का कहना है कि शासन से इसकी रिपोर्ट मांगी जा चुकी है। पहले भी रिपोर्ट भेजी गई थी, अब फिर से रिपोर्ट तैयार कराई गई है। उन्होंने बताया कि अधिकांश बकाया वह दिखाया जा रहा है जो एकमुश्त समाधान योजना के तहत जमा किया जा चुका है। लेकिन रिकॉर्ड न होने के कारण खातों में फीडिंग नहीं हो पाई है।
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-- सामने आ रहे हैं विद्युत निगम के गोलमाल
विद्युत निगम में गोलमाल लगातार सामने आ रहे हैं। डार्क जोन होने के बावजूद कुछ ठेकेदारों ने अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को नलकूप के कनेक्शन जारी कर दिए गए, भुगतान लिया गया और उनकी रसीदें भी काटी गईं। लेकिन अभिलेख में उनका कनेक्शन ही नहीं खोला गया। इस मामले में लगभग 40 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया। अभी जांच चल रही है। इसके अलावा विद्युत वितरण खंड बेहट के उपखंड मुजफ्फराबाद के लगभग 250 किसानों से वसूली कर रसीदों में हेराफेरी कर मात्र छह महीने में ही 72 लाख रुपये का गबन का मामला पकड़ा गया था। जिसमें मुजफ्फराबाद के टीजी-टू के दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। देवबंद क्षेत्र में एक अवर अभियंता ने मानकों की अनदेखी कर बिजली की लाइन शिफ्ट कर दी गई। इससे करंट लगने पर एक छात्र की मौत हो गई थी। अवर अभियंता को निलंबित किया गया। एक अवर अभियंता ने बिना किसी अनुमति के ही अनधिकृत कालोनी में ट्रांसफार्मर लगवा दिया और बिजली की लाइन खिंचवाकर सप्लाई चालू करा दी। इस मामले की गाज भी अवर अभियंता पर गिरी थी।
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सहारनपुर। विद्युत निगम पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक के गायब रिकॉर्ड को तलाशने में जुटा हुआ है। लेकिन अधिकारियों को या तो खुर्द-बुर्द रिकार्ड मिल रहा है, जिसमें कुछ समझ में नहीं आ रहा, या फिर रिकॉर्ड है ही नहीं। विद्युत निगम 1058 करोड़ रुपये के बकाया को कम करने के लिए एक-एक उपभोक्ता से पुरानी रसीदें मांग कर फीड करा रहे हैं। इनमें अधिकांश बकाया ऐसा है जिसका भुगतान एकमुश्त समाधान योजना के तहत लिया गया है।
विद्युत निगम के गायब हुए रिकॉर्ड को तलाशने में निगम के प्रत्येक स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। स्टोर के पुराने रिकॉर्ड को बड़ी सावधानी से खंगाला जा रहा है। लेकिन जो रसीदें निगम को मिलीं हैं, उनमें से अधिकांश खुर्द-बुर्द की जा चुकीं हैं। जिनमें न तो नाम समझ में आ पा रहा है और न ही भुगतान राशि पता लग पा रही है। जिनकी खातों में फीडिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे में बकाया राशि बढ़ती ही जा रही है। इसमें अधिकांश बकाया एकमुश्त समाधान योजना के तहत जमा कराई गई धनराशि का है। जिनकी रसीदों का कोई पता नही चल पा रहा है।
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अब निगम द्वारा उपभोक्ताओं से पुरानी रसीदें तलाश करने के लिए कहा जा रहा है। जिससे उनकी फीडिंग उपभोक्ताओं के खातों में की जा सके और बकाया राशि कम हो सके। इससे उपभोक्ताओं पर बकाया वसूली की सख्ती रुक सकेगी और निगम को भी इससे राहत मिलेगी। अधीक्षण अभियंता ग्रामीण वीके शर्मा का कहना है कि शासन से इसकी रिपोर्ट मांगी जा चुकी है। पहले भी रिपोर्ट भेजी गई थी, अब फिर से रिपोर्ट तैयार कराई गई है। उन्होंने बताया कि अधिकांश बकाया वह दिखाया जा रहा है जो एकमुश्त समाधान योजना के तहत जमा किया जा चुका है। लेकिन रिकॉर्ड न होने के कारण खातों में फीडिंग नहीं हो पाई है।
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-- सामने आ रहे हैं विद्युत निगम के गोलमाल
विद्युत निगम में गोलमाल लगातार सामने आ रहे हैं। डार्क जोन होने के बावजूद कुछ ठेकेदारों ने अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को नलकूप के कनेक्शन जारी कर दिए गए, भुगतान लिया गया और उनकी रसीदें भी काटी गईं। लेकिन अभिलेख में उनका कनेक्शन ही नहीं खोला गया। इस मामले में लगभग 40 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया। अभी जांच चल रही है। इसके अलावा विद्युत वितरण खंड बेहट के उपखंड मुजफ्फराबाद के लगभग 250 किसानों से वसूली कर रसीदों में हेराफेरी कर मात्र छह महीने में ही 72 लाख रुपये का गबन का मामला पकड़ा गया था। जिसमें मुजफ्फराबाद के टीजी-टू के दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। देवबंद क्षेत्र में एक अवर अभियंता ने मानकों की अनदेखी कर बिजली की लाइन शिफ्ट कर दी गई। इससे करंट लगने पर एक छात्र की मौत हो गई थी। अवर अभियंता को निलंबित किया गया। एक अवर अभियंता ने बिना किसी अनुमति के ही अनधिकृत कालोनी में ट्रांसफार्मर लगवा दिया और बिजली की लाइन खिंचवाकर सप्लाई चालू करा दी। इस मामले की गाज भी अवर अभियंता पर गिरी थी।