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सरकारी स्कूलों में धोती-कुर्ता नहीं पहनेंगे शिक्षक
Updated Tue, 17 Jul 2018 12:36 AM IST
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सरकारी स्कूलों में धोती-कुर्ता नहीं पहनेंगे शिक्षक
सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अब स्मार्ट लुक अपनाना होगा। इसके लिए अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसका अनुपालन कराने के निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारियों केे दिए गए हैं। इतना ही नहीं, आदेशों का पालन न करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी बात कही गई है।
अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में बेसिक शिक्षकों के पहनावे, व्यवहार, साफ-सफाई और भाषा में सुधार लाने की बात कही गई है। शिक्षकों को कांवेंट स्कूलों के शिक्षकों की तरह साफ पेंट और शर्ट तथा जूते पहनकर स्कूल पहुंचना होगा। बढ़ी हुई दाढ़ी लेकर भी शिक्षक स्कूल नहीं जा सकेंगे। यानी उन्हें क्लीन सेव करके ही जाना होगा। साथ ही बढ़े बाल, कुर्ता पायजामा या धोती कुर्ता भी नहीं चलेगा। इनके अलावा शिक्षकों को अपनी ठेठ भाषा को छोड़कर पढ़े लिखे लोगों की भाषा अपनानी होगी। व्यवहार में भी विनम्रता लानी होगी। शासन का मानना है कि बच्चे तीन से चार घंटे शिक्षक के पास रहते हैं। ऐसे में शिक्षक की बोलचाल, पहनावे और उसकी तमाम गतिविधियों का बच्चों पर पूरा असर रहता है। यदि शिक्षक स्मार्ट बनकर स्कूल जाएंगे तो निश्चित रूप से बच्चों पर इसका अच्छा असर पड़ेगा। इतना ही नहीं, महिला शिक्षकों को भी अपने व्यवहार और साफ सफाई तथा पहनावे को सामान्य और आदर्श महिलाओं वाला रखना होगा।
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नशीले पदार्थों का सेवन भी त्यागना होगा
कुछ शिक्षकों को पान, पान मसाला या फिर बीड़ी और सिगरेट आदि पीने की लत रहती है। इसे वह स्कूलों में पढ़ाने के दौरान भी छोड़ नहीं पाते हैं। शासन का मानना है कि शिक्षक बच्चों के लिए आदर्श होते हैं। यदि वह नशे की किसी भी चीज का सेवन करते हैं तो बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ता है। अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों को स्कूल टाइम में नशीले पदार्थों का सेवन न करने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई शिक्षक नशीने पदार्थ का सेवन करता मिलता है तो उक्त शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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नए शिक्षक हैं स्मार्ट
विभागीय सूत्रों ने बताया कि परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात नए शिक्षकों में से ज्यादातर स्मार्ट ही हैं। उनके पहवाने से लेकर शिक्षा का स्तर बेहतर है। कुछ पुराने शिक्षक हैं, जो कुर्ता पायजामा या साधारण लुक में रहते हैं। उनके लिए अपने आप में ज्यादा बदलाव कर पाना संभव भी नहीं है। मगर वह अपना व्यवहार और कार्य और बेहतर जरूर बना सकते हैं।
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कुछ दिन पहले लखनऊ में बैठक हुई थी। इसमें शिक्षकों के पहनावे, भाषा शैली आदि में सुधार पर चर्चा हुई थी। यह अच्छी बात भी है। शिक्षक वैसे भी समाज का सम्मानित व्यक्ति होता है, जिसपर राष्ट्र के निर्माण का सबसे अधिक जिम्मा है। यदि शिक्षक अच्छे पहनावे के साथ स्कूल पहुंचेंगे और अच्छा व्यवहार बच्चों के साथ रखेंगे तो निश्चित ही बच्चों पर इसका अच्छा असर पड़ेगा।
रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए।
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सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अब स्मार्ट लुक अपनाना होगा। इसके लिए अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसका अनुपालन कराने के निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारियों केे दिए गए हैं। इतना ही नहीं, आदेशों का पालन न करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी बात कही गई है।
अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में बेसिक शिक्षकों के पहनावे, व्यवहार, साफ-सफाई और भाषा में सुधार लाने की बात कही गई है। शिक्षकों को कांवेंट स्कूलों के शिक्षकों की तरह साफ पेंट और शर्ट तथा जूते पहनकर स्कूल पहुंचना होगा। बढ़ी हुई दाढ़ी लेकर भी शिक्षक स्कूल नहीं जा सकेंगे। यानी उन्हें क्लीन सेव करके ही जाना होगा। साथ ही बढ़े बाल, कुर्ता पायजामा या धोती कुर्ता भी नहीं चलेगा। इनके अलावा शिक्षकों को अपनी ठेठ भाषा को छोड़कर पढ़े लिखे लोगों की भाषा अपनानी होगी। व्यवहार में भी विनम्रता लानी होगी। शासन का मानना है कि बच्चे तीन से चार घंटे शिक्षक के पास रहते हैं। ऐसे में शिक्षक की बोलचाल, पहनावे और उसकी तमाम गतिविधियों का बच्चों पर पूरा असर रहता है। यदि शिक्षक स्मार्ट बनकर स्कूल जाएंगे तो निश्चित रूप से बच्चों पर इसका अच्छा असर पड़ेगा। इतना ही नहीं, महिला शिक्षकों को भी अपने व्यवहार और साफ सफाई तथा पहनावे को सामान्य और आदर्श महिलाओं वाला रखना होगा।
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नशीले पदार्थों का सेवन भी त्यागना होगा
कुछ शिक्षकों को पान, पान मसाला या फिर बीड़ी और सिगरेट आदि पीने की लत रहती है। इसे वह स्कूलों में पढ़ाने के दौरान भी छोड़ नहीं पाते हैं। शासन का मानना है कि शिक्षक बच्चों के लिए आदर्श होते हैं। यदि वह नशे की किसी भी चीज का सेवन करते हैं तो बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ता है। अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों को स्कूल टाइम में नशीले पदार्थों का सेवन न करने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई शिक्षक नशीने पदार्थ का सेवन करता मिलता है तो उक्त शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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नए शिक्षक हैं स्मार्ट
विभागीय सूत्रों ने बताया कि परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात नए शिक्षकों में से ज्यादातर स्मार्ट ही हैं। उनके पहवाने से लेकर शिक्षा का स्तर बेहतर है। कुछ पुराने शिक्षक हैं, जो कुर्ता पायजामा या साधारण लुक में रहते हैं। उनके लिए अपने आप में ज्यादा बदलाव कर पाना संभव भी नहीं है। मगर वह अपना व्यवहार और कार्य और बेहतर जरूर बना सकते हैं।
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कुछ दिन पहले लखनऊ में बैठक हुई थी। इसमें शिक्षकों के पहनावे, भाषा शैली आदि में सुधार पर चर्चा हुई थी। यह अच्छी बात भी है। शिक्षक वैसे भी समाज का सम्मानित व्यक्ति होता है, जिसपर राष्ट्र के निर्माण का सबसे अधिक जिम्मा है। यदि शिक्षक अच्छे पहनावे के साथ स्कूल पहुंचेंगे और अच्छा व्यवहार बच्चों के साथ रखेंगे तो निश्चित ही बच्चों पर इसका अच्छा असर पड़ेगा।
रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए।