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मजहबी मामलों में किसी को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं: संभली
Updated Wed, 10 Jan 2018 12:17 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक संभली ने कहा कि केंद्र सरकार मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप कर और ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों में उलझा कर देश की जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटका रही है।
मंगलवार को ईदगाह मार्ग स्थित दारुल उलूम फारुखिया में आयोजित कार्यक्रम में मौलाना अब्दुल खालिक संभली ने कहा कि भारत में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं और सबको संविधान के तहत धार्मिक नियमों पर चलने की आजादी मिली हुई है। मुसलमान भी अपने धर्म पर जिस प्रकार चाहे अमल कर सकते हैं। इसलिए इसमें किसी को भी हस्तक्षेप करने का कोई अधिकारी नहीं है। अध्यक्षता कर रहे संस्था के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी ने कहा कि वर्तमान में हर तरफ इस्लाम और मुसलमानों को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा की जा रही है। जो बहुत शर्मनाक है। इसलिए मुसलमानों की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस्लाम मुखालिफ ताकतों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए मुहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलकर जिंदगी गुजारें। कार्यक्रम में इस्लाही मुआशरा (समाज सुधार) व मुस्लिम समाज की समस्याओं को लेकर विचार विमर्श भी किया गया। अंत में मौलाना नूरुलहुदा ने मुल्क में अमनो अमान व आपसी सौहार्द के लिए दुआ कराई। संचालन मौलाना मेराज ने किया। इस मौके पर दारुल उलूम के उस्ताद मुफ्ती आदिल, मौलाना रहमतुल्लाह नूर, मौलाना इमदादुल्लाह कासमी, मौलाना रहमान, कारी आसिम, मौ. नदीम, फिरोज कासमी, असद रहमान आदि मौजूद रहे।
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मंगलवार को ईदगाह मार्ग स्थित दारुल उलूम फारुखिया में आयोजित कार्यक्रम में मौलाना अब्दुल खालिक संभली ने कहा कि भारत में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं और सबको संविधान के तहत धार्मिक नियमों पर चलने की आजादी मिली हुई है। मुसलमान भी अपने धर्म पर जिस प्रकार चाहे अमल कर सकते हैं। इसलिए इसमें किसी को भी हस्तक्षेप करने का कोई अधिकारी नहीं है। अध्यक्षता कर रहे संस्था के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी ने कहा कि वर्तमान में हर तरफ इस्लाम और मुसलमानों को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा की जा रही है। जो बहुत शर्मनाक है। इसलिए मुसलमानों की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस्लाम मुखालिफ ताकतों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए मुहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलकर जिंदगी गुजारें। कार्यक्रम में इस्लाही मुआशरा (समाज सुधार) व मुस्लिम समाज की समस्याओं को लेकर विचार विमर्श भी किया गया। अंत में मौलाना नूरुलहुदा ने मुल्क में अमनो अमान व आपसी सौहार्द के लिए दुआ कराई। संचालन मौलाना मेराज ने किया। इस मौके पर दारुल उलूम के उस्ताद मुफ्ती आदिल, मौलाना रहमतुल्लाह नूर, मौलाना इमदादुल्लाह कासमी, मौलाना रहमान, कारी आसिम, मौ. नदीम, फिरोज कासमी, असद रहमान आदि मौजूद रहे।
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