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किसानों को भा रही अमरूद की खेती
Updated Mon, 24 Sep 2018 12:26 AM IST
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सहारनपुर। परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के चलते किसानों का रुझान कृषि विविधिकरण की ओर बढ़ रहा है। इसके कारण खेती में नए नए प्रयोग किए जा रहे हैं। जिले में बेहट के बाद अब नागल क्षेत्र मेें भी किसानों को अमरूद की बागवानी भा रही है। जनपद में लगभग 25 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में अमरूद की खेती हो रही है।
अच्छे मुनाफे के चलते किसान अब तेजी से अमरूद की बागवानी को अपना रहे हैं। अमरूद के बाग में छह गुणा छह मीटर की दूरी पर एक हेक्टेयर खेत में करीब 277 पौधे आसानी से लग जाते हैं। जबकि इसकी सघन बागवानी में तीन गुणा तीन मीटर की दूरी पर 1111 पौधे लगते हैं। सघन बागवानी में किसानों को अमरूद का अधिक उत्पादन प्राप्त होता है। इसमें एक हेक्टेयर में से करीब 500 क्विंटल अमरूद प्रतिवर्ष मिल जाते हैं जबकि दूसरी विधि से 120 से 140 क्विंटल अमरूद की प्राप्त होते हैं। अमरूद में वर्ष में दो बार फल लगते हैं। इसमें से बाजार में शरद ऋतु वाली फसल का बढ़िया दाम मिलता है। जनपद में बेहट के बाद अब मायाहेडी, पनियाली, गंझेडी, विलासपुर, गंगोह, मिर्जापुर और भागूवाला क्षेत्र में बडे स्तर पर अमरूद की बागवानी हो रही है। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि बढ़िया आमदनी के चलते जिले के किसानों का रूझान अमरूद की बागवानी की ओर बढ रहा है। अभी करीब 25 सौ हेक्टेयर में इसकी बागवानी हो रही है।
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अच्छे मुनाफे के चलते किसान अब तेजी से अमरूद की बागवानी को अपना रहे हैं। अमरूद के बाग में छह गुणा छह मीटर की दूरी पर एक हेक्टेयर खेत में करीब 277 पौधे आसानी से लग जाते हैं। जबकि इसकी सघन बागवानी में तीन गुणा तीन मीटर की दूरी पर 1111 पौधे लगते हैं। सघन बागवानी में किसानों को अमरूद का अधिक उत्पादन प्राप्त होता है। इसमें एक हेक्टेयर में से करीब 500 क्विंटल अमरूद प्रतिवर्ष मिल जाते हैं जबकि दूसरी विधि से 120 से 140 क्विंटल अमरूद की प्राप्त होते हैं। अमरूद में वर्ष में दो बार फल लगते हैं। इसमें से बाजार में शरद ऋतु वाली फसल का बढ़िया दाम मिलता है। जनपद में बेहट के बाद अब मायाहेडी, पनियाली, गंझेडी, विलासपुर, गंगोह, मिर्जापुर और भागूवाला क्षेत्र में बडे स्तर पर अमरूद की बागवानी हो रही है। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि बढ़िया आमदनी के चलते जिले के किसानों का रूझान अमरूद की बागवानी की ओर बढ रहा है। अभी करीब 25 सौ हेक्टेयर में इसकी बागवानी हो रही है।
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