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वीवी पैट की खराबी ने बिगाड दिए तमाम सियासी समीकरण
Updated Tue, 29 May 2018 12:32 AM IST
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वीवी पैट की खराबी ने बिगाड़ दिए सियासी समीकरण
सहारनपुर। गंगोह और नकुड़ विधानसभा में सोमवार को हुए मतदान के दौरान वीवी पैट मशीनों की खराबी ने सियासी समीकरण ध्वस्त कर दिए हैं। जातीय आंकड़ों के आधार पर अपनी-अपनी जीत का दावा करने वाले प्रत्याशी और उनके समर्थक भी संशय में हैं। अभी यह कह पाना मुश्किल है कि कौन प्रत्याशी जीत रहा है। दोनों विधानसभाओं में कई ऐसे इलाके हैं, जहां एक तरफ नल चलता तो दूसरी तरफ कमल का फूल खिलता नजर आया है। पुनर्मतदान की स्थिति में समीकरणों में और उलट फेर की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।
कैराना लोक सभा के उप चुनाव में पहले दिन से ही भाजपा की मृगांका सिंह और गठबंधन की तबस्सुम के बीच मुख्य मुकाबला है। रालोद, सपा, बसपा और कांग्रेस के साथ आने के बाद गठबंधन प्रत्याशी की जीत को लेकर पार्टी नेता सबसे ज्यादा आशान्वित थे। बाकायदा जातीय आधार पर जीत के आंकडे़ भी पेश किए जा रहे थे। भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में सूबे के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री के अलावा मंत्रियों और विधायकों की फौज उतरी थी। कई दिन से भाजपा भी अपनी जीत के लिए मतों के ध्रु्वीकरण में जुटी थी। काफी हद तक वह अपने प्रयासों में कामयाब भी हुई। इसी बीच रविवार को बसपा सुप्रीमो मायावती के बदले बयान का फायदा भी भाजपा को मिला है, क्योंकि दलित मतदाता ने मतदान में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। सोमवार को मतदान के दौरान गांव-गांव में खराब हुई वीवी पैट ने सियासी दलों द्वारा तैयार किए गए तमाम समीकरणों को ध्वस्त कर दिया। कई इलाकों में मतदान उम्मीद के अनुरूप नहीं हुआ। दोनों विधानसभाओं में गठबंधन प्रत्याशी और भाजपा प्रत्याशी के अपने-अपने गढ़ में ठीक-ठाक मतदान हुआ, जिससे चुनावी परिदृश्य पूरी तरह उलझा हुआ है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि तबस्सुम और मृगांका के बीच कांटे की टक्कर है।
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सहारनपुर। गंगोह और नकुड़ विधानसभा में सोमवार को हुए मतदान के दौरान वीवी पैट मशीनों की खराबी ने सियासी समीकरण ध्वस्त कर दिए हैं। जातीय आंकड़ों के आधार पर अपनी-अपनी जीत का दावा करने वाले प्रत्याशी और उनके समर्थक भी संशय में हैं। अभी यह कह पाना मुश्किल है कि कौन प्रत्याशी जीत रहा है। दोनों विधानसभाओं में कई ऐसे इलाके हैं, जहां एक तरफ नल चलता तो दूसरी तरफ कमल का फूल खिलता नजर आया है। पुनर्मतदान की स्थिति में समीकरणों में और उलट फेर की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।
कैराना लोक सभा के उप चुनाव में पहले दिन से ही भाजपा की मृगांका सिंह और गठबंधन की तबस्सुम के बीच मुख्य मुकाबला है। रालोद, सपा, बसपा और कांग्रेस के साथ आने के बाद गठबंधन प्रत्याशी की जीत को लेकर पार्टी नेता सबसे ज्यादा आशान्वित थे। बाकायदा जातीय आधार पर जीत के आंकडे़ भी पेश किए जा रहे थे। भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में सूबे के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री के अलावा मंत्रियों और विधायकों की फौज उतरी थी। कई दिन से भाजपा भी अपनी जीत के लिए मतों के ध्रु्वीकरण में जुटी थी। काफी हद तक वह अपने प्रयासों में कामयाब भी हुई। इसी बीच रविवार को बसपा सुप्रीमो मायावती के बदले बयान का फायदा भी भाजपा को मिला है, क्योंकि दलित मतदाता ने मतदान में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। सोमवार को मतदान के दौरान गांव-गांव में खराब हुई वीवी पैट ने सियासी दलों द्वारा तैयार किए गए तमाम समीकरणों को ध्वस्त कर दिया। कई इलाकों में मतदान उम्मीद के अनुरूप नहीं हुआ। दोनों विधानसभाओं में गठबंधन प्रत्याशी और भाजपा प्रत्याशी के अपने-अपने गढ़ में ठीक-ठाक मतदान हुआ, जिससे चुनावी परिदृश्य पूरी तरह उलझा हुआ है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि तबस्सुम और मृगांका के बीच कांटे की टक्कर है।
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