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शासन ने मांगी गड्ढामुक्त की गई सड़कों की रिपोर्ट
Updated Mon, 18 Sep 2017 12:59 AM IST
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शासन ने मांगी गड्ढामुक्त की गई सड़कों की रिपोर्ट
सहारनपुर। शासन ने शहर में सड़कों की वर्तमान स्थिति पर नगर निगम से रिपोर्ट मांगी है। कितनी सड़कों को गड्ढामुक्त किया गया है और कितनी सड़कें अभी बाकी हैं? नगर निगम के अधिकारी सड़कों की स्थिति की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी में हैं।
नगर क्षेत्र में तमाम सड़कों की मरम्मत कराने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, मगर नगर निगम कभी पीडब्ल्यूडी तो कभी एसडीए की सड़क बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता आया है। वर्तमान में शहर की तमाम सड़कों की हालत खस्ता हो चली है। प्रदेश में भाजपा की सरकार ने प्रदेश भर की तमाम सड़कों को 15 जून 2017 तक गड्ढामुक्त करने के आदेश दिए थे, मगर जनपद में किसी भी निर्माण विभाग द्वारा शायद ही किसी सड़क को गड्ढामुक्त बनाने के लिए कदम उठाया गया हो। कहना गलत न होगा कि नगर निगम ने भी सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। यही वजह है कि शहर की तमाम सड़कों में कदम-कदम पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। अब शासन ने नगर निगम से शहर की सड़कों की रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह भी पूछा गया है कि नगर निगम ने कितनी सड़कों को गड्ढामुक्त कराया है? इसके बाद से नगर निगम के अधिकारी रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं।
450 से अधिक सड़कों और अन्य निर्माण बाधित
जनपद में खनन बंद होने की वजह से हाथ पर हाथ धरे बैठे निर्माण विभाग
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। जनपद में खनन पूरी तरह बंद है, जिसकी वजह से रेत और बजरी की किल्लत बनी हुई है। ऐसे में अनेक विभागों के 450 से अधिक निर्माण कार्यों पर ब्रेक लगा है। इन कार्यों में सबसे अधिक सड़कें हैं, जिन पर या तो काम शुरू नहीं हुआ है या फिर उनका काम बीच में ही रुका हुआ है।
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बेहट रोड स्थित शंकरपुरी कॉलोनी से होकर गांव शंकलापुरी को जाने वाले मार्ग पर करीब 400 मीटर सड़क का टुकड़ा एसडीए बनवा रहा था। विधान सभा चुनाव से पहले इसपर पत्थर आदि डलवा दिए गए थे, मगर खनन बंद होने की वजह से सड़क का निर्माण बीच में ही रोक दिया गया। इसी प्रकार हनुमान नगर के बीच से होकर मूंगागढ़ की ओर निकलने वाली सड़क का निर्माण भी बजरी और रेत आदि नहीं मिलने की वजह से रुका हुआ है। यह केवल उदाहरण मात्र हैं। जनपद में करीब 450 सड़कें और पुलियाओं का निर्माण रुका हुआ है। इनमें अकेले विकास प्राधिकरण के 200 से अधिक काम हैं। शेेष काम नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के हैं। पीडब्ल्यूडी के अभियंता केके त्यागी का कहना है कि रेत, बजरी और पत्थर नहीं मिलने की वजह से सड़कों का निर्माण रुका हुआ है। पड़ोसी राज्यों से सामग्री दोगुने दाम में मिल रही है, जिसे खरीद पाना संभव नहीं है।
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सहारनपुर। शासन ने शहर में सड़कों की वर्तमान स्थिति पर नगर निगम से रिपोर्ट मांगी है। कितनी सड़कों को गड्ढामुक्त किया गया है और कितनी सड़कें अभी बाकी हैं? नगर निगम के अधिकारी सड़कों की स्थिति की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी में हैं।
नगर क्षेत्र में तमाम सड़कों की मरम्मत कराने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, मगर नगर निगम कभी पीडब्ल्यूडी तो कभी एसडीए की सड़क बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता आया है। वर्तमान में शहर की तमाम सड़कों की हालत खस्ता हो चली है। प्रदेश में भाजपा की सरकार ने प्रदेश भर की तमाम सड़कों को 15 जून 2017 तक गड्ढामुक्त करने के आदेश दिए थे, मगर जनपद में किसी भी निर्माण विभाग द्वारा शायद ही किसी सड़क को गड्ढामुक्त बनाने के लिए कदम उठाया गया हो। कहना गलत न होगा कि नगर निगम ने भी सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। यही वजह है कि शहर की तमाम सड़कों में कदम-कदम पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। अब शासन ने नगर निगम से शहर की सड़कों की रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह भी पूछा गया है कि नगर निगम ने कितनी सड़कों को गड्ढामुक्त कराया है? इसके बाद से नगर निगम के अधिकारी रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं।
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450 से अधिक सड़कों और अन्य निर्माण बाधित
जनपद में खनन बंद होने की वजह से हाथ पर हाथ धरे बैठे निर्माण विभाग
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। जनपद में खनन पूरी तरह बंद है, जिसकी वजह से रेत और बजरी की किल्लत बनी हुई है। ऐसे में अनेक विभागों के 450 से अधिक निर्माण कार्यों पर ब्रेक लगा है। इन कार्यों में सबसे अधिक सड़कें हैं, जिन पर या तो काम शुरू नहीं हुआ है या फिर उनका काम बीच में ही रुका हुआ है।
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बेहट रोड स्थित शंकरपुरी कॉलोनी से होकर गांव शंकलापुरी को जाने वाले मार्ग पर करीब 400 मीटर सड़क का टुकड़ा एसडीए बनवा रहा था। विधान सभा चुनाव से पहले इसपर पत्थर आदि डलवा दिए गए थे, मगर खनन बंद होने की वजह से सड़क का निर्माण बीच में ही रोक दिया गया। इसी प्रकार हनुमान नगर के बीच से होकर मूंगागढ़ की ओर निकलने वाली सड़क का निर्माण भी बजरी और रेत आदि नहीं मिलने की वजह से रुका हुआ है। यह केवल उदाहरण मात्र हैं। जनपद में करीब 450 सड़कें और पुलियाओं का निर्माण रुका हुआ है। इनमें अकेले विकास प्राधिकरण के 200 से अधिक काम हैं। शेेष काम नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के हैं। पीडब्ल्यूडी के अभियंता केके त्यागी का कहना है कि रेत, बजरी और पत्थर नहीं मिलने की वजह से सड़कों का निर्माण रुका हुआ है। पड़ोसी राज्यों से सामग्री दोगुने दाम में मिल रही है, जिसे खरीद पाना संभव नहीं है।