फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   क़ुरान सुनाने वाले को उजरत लेना ओर देना हराम

क़ुरान सुनाने वाले को उजरत लेना ओर देना हराम

Sat, 17 Jun 2017 12:59 AM IST
Updated Sat, 17 Jun 2017 12:59 AM IST
विज्ञापन
क़ुरान सुनाने वाले को उजरत लेना ओर देना हराम
कुरान सुनाने वाले को उजरत लेना और देना हराम
विज्ञापन

सहारनपुर। रोजेदारों के सवालों के जवाब व उनकी शंकाओं को दूर करने के लिए बनाई गई हेल्पलाइन पर जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक कारी इसहाक गोरा ने शुक्रवार को भी काफी रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए और शरीयत की रोशनी में उनकी शंकाओं का समाधान किया।
प्रश्न- अमंशा सिद्दीकी ने मालूम किया कि उनकी माताजी की उम्र 52 वर्ष है। 6 माह से काफी बीमार हैं। उन्हें डॉक्टर ने रोजा रखने को सख्ती से मना किया है, परंतु वह जबरदस्ती रोजा रखती हैं और इससे उनकी हालत बिगड़ जाती है। ऐसी सूरत में उनको कैसे समझया जाए?
विज्ञापन

जवाब- यदि कोई व्यक्ति ज्यादा बीमार है। रोजा रखने से रोग बढ़ने का खतरा हो जाता है और वह जबरदस्ती रोजा रखता है, ऐसा करना गलत है। बल्कि शरीयत उसको सहूलत की इजाजत देती है कि वह रोजा न रखे, ठीक होने के बाद रोजे की कजा अदा करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

----------
प्रश्न- चिलकाना के डॉक्टर अरशद ने पूछा कि मेरे पड़ोस की मस्जिद तीन मंजिला है, जिसमें दो जगह अलग-अलग कुरान ए पाक सुने और सुनाए जा रहे हैं, अक्सर लोगों को आपत्ति है कि ये गलत है, शरीयत की रोशनी में लोग आपसे पूछना चाहते हैं क्या गलत है या नहीं?
जवाब- एक मस्जिद में दो हाफिज अलग-अलग नमाज ए तारावीह पढ़ा सकते हैं, परन्तु शर्त ये है कि एक दूसरे की आवाज न टकराए, बेहतर तरीका ये ही है कि तमाम लोग एक ही हाफिज के पीछे नमाज ए तरावीह अदा करें।
--------
प्रश्न- हसीन अहमद ने देवबंद से पूछा कि वह 60 हजार प्रतिमाह के नौकरी पेशा व्यक्ति हैं। परन्तु साल भर तक उनके पास निसाब की मिकदार जमा नही होती, क्या ऐसी सूरत में भी उन पर जकात फर्ज होती है?

जवाब - जी नहीं! जिस व्यक्ति की आमदनी माकूल है, परंतु साल भर तक उसके पास निसाब की मिकदार जमा नहीं रहती तो उस पर जकात वाजिब नहीं है।
-----------
प्रशन-मोहल्ला शाहमादार से अनीस अंसारी ने पूछा अगर कोई व्यक्ति तारावीह में कुरान ए पाक सुनाने पर पैसों की मांग करता है तो क्या करें।
जवाब -हाफिज ए कुरान मिले या ना मिले, यदि कोई व्यक्ति कुरान पाक सुनाने पर उजरत या पैसे मांगता है, तो ऐसे हाफिज के बजाए छोटी सूरतों से नमाज ए तारावीह अदा कर लेना बेहतर है। पैसा दे कर कुरान ना सुनें, क्यूंकि कुरान सुनाने पर उजरत लेना और देना दोनों हराम है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed