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प्रतिदिन पहुंच रहे 1200 मरीज, 150 से अधिक भर्ती
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जिला अस्पताल में भर्ती मरीज
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। बीमारियों का प्रकोप बना हुआ है। एसबीडी जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन 1200 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब 150 मरीजों को प्रतिदिन भर्ती किया जा रहा है। खास बात यह है कि इनमें से करीब 40 मरीजों को सांस लेने में तकलीफ है, जिनको ऑक्सीजन लगाई जा रही है।
इमरजेंसी वार्ड के रिकॉर्ड के अनुसार बीते करीब 15 दिन से प्रतिदिन 1000 से 1300 मरीज जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर गंभीर मरीज शामिल हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती कर प्राथमिक उपचार देकर कुछ देर बाद छुट्टी कर दी जाती है, मगर अति गंभीर मरीजों को ठीक होने तक भर्ती किया जाता है। प्रतिदिन भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी करीब 150 है। मगर इमरजेंसी वार्ड मात्र दस बेड का है। ऐेसे में मरीजों को ट्रामा सेंटर के बरामदे में लिटाया जाता है। बाकी को जनरल वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। बताया गया कि प्रतिदिन करीब 40 मरीज ऐसे भी पहुंच रहे हैं, जिनको सांस लेने में तकलीफ होती है। उन्हें तुरंत ऑक्सीजन सिलिंडर लगाया जाता है।
ओपीडी में 150 से 200 मरीज
जिला अस्पताल में फिजीशियन की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 20 फीसदी मरीज बुखार के बताए जा रहे हैं। शेष अन्य परेशानियां लेकर पहुंचते हैं, जिनकेे परामर्श के साथ ही दवा देकर घर भेज दिया जाता है।
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अपने वाहनों से पहुंच रहे मरीज
बीमारियों का आलम यह है कि फ्री एंबुलेंस सेवा होने के बाद भी ज्यादातर मरीज इमरजेंसी होने की वजह से अपने वाहनों से पहुंचते हैं। चूंकि निजी वाहन में ऑक्सीजन आदि की व्यवस्था नहीं हो पाती है। ऐसे में कई बार अस्पताल पहुंचने तक मरीजों की जान तक चली जाती है। शनिवार को भी ऐसे ही ई-रिक्शा से एक वृद्धा को लेकर परिजन पहुंचे थे, मगर वार्ड के बाहर ही डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यदि वह एंबुलेंस से आती तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
इन दिनों इमरजेंसी वार्ड में अधिक संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। जो भी मरीज भर्ती हो रहे हैं, उन्हें बेड मुहैया कराए जा रहे हैं। हमारे पास बीमारियों से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा और जरूरी संसाधन हैं।
डॉ. आभा वर्मा, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल
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इमरजेंसी वार्ड के रिकॉर्ड के अनुसार बीते करीब 15 दिन से प्रतिदिन 1000 से 1300 मरीज जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर गंभीर मरीज शामिल हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती कर प्राथमिक उपचार देकर कुछ देर बाद छुट्टी कर दी जाती है, मगर अति गंभीर मरीजों को ठीक होने तक भर्ती किया जाता है। प्रतिदिन भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी करीब 150 है। मगर इमरजेंसी वार्ड मात्र दस बेड का है। ऐेसे में मरीजों को ट्रामा सेंटर के बरामदे में लिटाया जाता है। बाकी को जनरल वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। बताया गया कि प्रतिदिन करीब 40 मरीज ऐसे भी पहुंच रहे हैं, जिनको सांस लेने में तकलीफ होती है। उन्हें तुरंत ऑक्सीजन सिलिंडर लगाया जाता है।
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ओपीडी में 150 से 200 मरीज
जिला अस्पताल में फिजीशियन की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 20 फीसदी मरीज बुखार के बताए जा रहे हैं। शेष अन्य परेशानियां लेकर पहुंचते हैं, जिनकेे परामर्श के साथ ही दवा देकर घर भेज दिया जाता है।
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अपने वाहनों से पहुंच रहे मरीज
बीमारियों का आलम यह है कि फ्री एंबुलेंस सेवा होने के बाद भी ज्यादातर मरीज इमरजेंसी होने की वजह से अपने वाहनों से पहुंचते हैं। चूंकि निजी वाहन में ऑक्सीजन आदि की व्यवस्था नहीं हो पाती है। ऐसे में कई बार अस्पताल पहुंचने तक मरीजों की जान तक चली जाती है। शनिवार को भी ऐसे ही ई-रिक्शा से एक वृद्धा को लेकर परिजन पहुंचे थे, मगर वार्ड के बाहर ही डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यदि वह एंबुलेंस से आती तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
इन दिनों इमरजेंसी वार्ड में अधिक संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। जो भी मरीज भर्ती हो रहे हैं, उन्हें बेड मुहैया कराए जा रहे हैं। हमारे पास बीमारियों से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा और जरूरी संसाधन हैं।
डॉ. आभा वर्मा, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल

जिला अस्पताल में बरामदे में भर्ती मरीज- फोटो : SAHARANPUR

जिला अस्पताल में बरामदे में भर्ती मरीज- फोटो : SAHARANPUR