{"_id":"5bdded94bdec22698671f70c","slug":"11541270932-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संघ सरकार्यवाह भैयाजी जोशी का बयान निंदनीय, कोर्ट ले संज्ञान: उलमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संघ सरकार्यवाह भैयाजी जोशी का बयान निंदनीय, कोर्ट ले संज्ञान: उलमा
Updated Sun, 04 Nov 2018 12:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संघ सरकार्यवाह भैयाजी जोशी का बयान निंदनीय, कोर्ट ले संज्ञान: उलमा
देवबंद (सहारनपुर)। संघ के सरकार्यवाह भैया जी जोशी के मंदिर निर्माण को लेकर वर्ष 1992 की तरह आंदोलन किए जाने वाले बयान पर देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार किया है। उलमा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार इसका संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई करे। क्योंकि इस तरह के बयान मुल्क में नफरत फैलाने वाले और माहौल को खराब करने वाले हैं।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि जिस तरह वर्ष 1992 का काम निंदनीय था। उसी तरह का फिर से इरादा रखने वाले और उसका एलान करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बाबरी मस्जिद रामजन्मभूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तो फिर लगातार मुल्क का माहौल खराब करने वाली बयानबाजी क्यों की जा रही है। मुसलमानों ने हमेशा से कहा कि इस मामले में कोर्ट का जो भी फैसला होगा वो उन्हें स्वीकार होगा। लेकिन दूसरा पक्ष लगातार कोर्ट और सरकार पर दबाव बनाने के लिए गलत बयानबाजी कर रहा है। जिसका अदालत और सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। मुफ्ती अरशद ने कहा कि सरकार का काम है की मुल्क में अमनो अमान कायम रहे। लेकिन नफरत का जहर घोलने वाले लोग लगातार कोशिश में हैं कि इस भाईचारे को समाप्त किया जाए। जिसके बारे में अदालत और सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि अगर संघ फिर से 1992 जैसे आंदोलन को दोहराता है तो यह सरासर गलत होगा। जिस तरह मुल्क का मुसलमान सुप्रीम कोर्ट के फैसला का इंतजार कर रहा है उसी तरह दूसरे पक्ष को भी शांति के साथ निर्णय का इंतजार करना चाहिए। गलत बयानबाजी कर मुल्क के माहौल को खराब करने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। यह अदालत की भी तौहीन है। इसलिए अदालत को संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। संघ के सरकार्यवाह भैया जी जोशी के मंदिर निर्माण को लेकर वर्ष 1992 की तरह आंदोलन किए जाने वाले बयान पर देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार किया है। उलमा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार इसका संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई करे। क्योंकि इस तरह के बयान मुल्क में नफरत फैलाने वाले और माहौल को खराब करने वाले हैं।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि जिस तरह वर्ष 1992 का काम निंदनीय था। उसी तरह का फिर से इरादा रखने वाले और उसका एलान करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बाबरी मस्जिद रामजन्मभूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तो फिर लगातार मुल्क का माहौल खराब करने वाली बयानबाजी क्यों की जा रही है। मुसलमानों ने हमेशा से कहा कि इस मामले में कोर्ट का जो भी फैसला होगा वो उन्हें स्वीकार होगा। लेकिन दूसरा पक्ष लगातार कोर्ट और सरकार पर दबाव बनाने के लिए गलत बयानबाजी कर रहा है। जिसका अदालत और सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। मुफ्ती अरशद ने कहा कि सरकार का काम है की मुल्क में अमनो अमान कायम रहे। लेकिन नफरत का जहर घोलने वाले लोग लगातार कोशिश में हैं कि इस भाईचारे को समाप्त किया जाए। जिसके बारे में अदालत और सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि अगर संघ फिर से 1992 जैसे आंदोलन को दोहराता है तो यह सरासर गलत होगा। जिस तरह मुल्क का मुसलमान सुप्रीम कोर्ट के फैसला का इंतजार कर रहा है उसी तरह दूसरे पक्ष को भी शांति के साथ निर्णय का इंतजार करना चाहिए। गलत बयानबाजी कर मुल्क के माहौल को खराब करने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। यह अदालत की भी तौहीन है। इसलिए अदालत को संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।
विज्ञापन