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नगर निगम में तालाबंदी कर कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
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नगर निगम में तालाबंदी कर कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
सहारनपुर। प्रभारी नगरायुक्त एवं निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव को धमकी देने के मामले में नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने शनिवार को दफ्तरों पर ताले जड़ दिए। इसके बाद मुख्य बिल्डिंग के बाहर दरी बिछाकर धरना और पार्षद के खिलाफ प्रदर्शन किया। धरना दे रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच पहुंचे नगरायुक्त ने पार्षद के खिलाफ उचित कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।
अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव ने महापौर को पत्र लिखकर पार्षद गुलशेर पर उनके साथ बदसलूकी करने और धमकी देने का आरोप लगाया था। साथ ही शहर से बाहर रहे नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी थी। तब से नगर निगम के तमाम विभागों के अधिकारी और कर्मचारी पार्षद के खिलाफ लामबंद थे। शनिवार को सभी कर्मचारियों ने इकट्ठा होकर सभी दफ्तरों पर तालाबंदी शुरू कर दी। इसके बाद बिल्डिंग के बाहर दरी डालकर नारेबाजी शुरू कर दी। दोपहर करीब एक बजे नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह कर्मचारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने मामले की जांच कराकर दोषी पाए जाने पर पार्षद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद अधिकारी और कर्मचारी धरना समाप्त करते हुए काम पर लौटे। उधर, पार्षद गुलशेर का कहना है कि उनके क्षेत्र में एक ठेकेदार ने काम किया था। इसका भुगतान आलोक श्रीवास्तव नहीं कर रहे हैं। भुगतान कराने के लिए ही वह ठेकेदार के कहने पर आलोक श्रीवास्तव से मिले थे। मगर आलोक श्रीवास्तव ने उनके साथ बदसलूकी कर दी। गुलशेर ने धमकी देने की बात से इनकार किया है।
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तालाबंदी से आम लोग हुए परेशान
अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा दफ्तरों पर ताले जड़े जाने से नगर निगम में अलग-अलग कार्यों से पहुंचे लोगों को परेशानी हुई। संपत्ति संबंधी शिकायत लेकर पहुंचे वीर ने बताया कि उन्होंने संपत्ति का नामांतरण कराना है, मगर हड़ताल की वजह से काम नहीं हो सका है। एक व्यक्ति कॉलोनी में पथ प्रकाश के लिए लाइट लगवाने की मांग लेकर पहुंचा था। आरोप है कि वह 15 दिन से चक्कर काट रहा है। आज हड़ताल की वजह से कर्मचारी नहीं मिला है। अन्य लोग भी इसी तरह परेशान रहे।
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अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव का आरोप है कि पार्षद ने उन्हें धमकी दी है। मामले की जांच कराई जा रही है। पार्षद का पक्ष भी सुना जाएगा। यदि उनकी ओर से कोई गलत बात कही गई है तो महापौर से मशविरा कर उचित कार्रवाई कराई जाएगी। - ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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सहारनपुर। प्रभारी नगरायुक्त एवं निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव को धमकी देने के मामले में नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने शनिवार को दफ्तरों पर ताले जड़ दिए। इसके बाद मुख्य बिल्डिंग के बाहर दरी बिछाकर धरना और पार्षद के खिलाफ प्रदर्शन किया। धरना दे रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच पहुंचे नगरायुक्त ने पार्षद के खिलाफ उचित कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।
अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव ने महापौर को पत्र लिखकर पार्षद गुलशेर पर उनके साथ बदसलूकी करने और धमकी देने का आरोप लगाया था। साथ ही शहर से बाहर रहे नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी थी। तब से नगर निगम के तमाम विभागों के अधिकारी और कर्मचारी पार्षद के खिलाफ लामबंद थे। शनिवार को सभी कर्मचारियों ने इकट्ठा होकर सभी दफ्तरों पर तालाबंदी शुरू कर दी। इसके बाद बिल्डिंग के बाहर दरी डालकर नारेबाजी शुरू कर दी। दोपहर करीब एक बजे नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह कर्मचारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने मामले की जांच कराकर दोषी पाए जाने पर पार्षद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद अधिकारी और कर्मचारी धरना समाप्त करते हुए काम पर लौटे। उधर, पार्षद गुलशेर का कहना है कि उनके क्षेत्र में एक ठेकेदार ने काम किया था। इसका भुगतान आलोक श्रीवास्तव नहीं कर रहे हैं। भुगतान कराने के लिए ही वह ठेकेदार के कहने पर आलोक श्रीवास्तव से मिले थे। मगर आलोक श्रीवास्तव ने उनके साथ बदसलूकी कर दी। गुलशेर ने धमकी देने की बात से इनकार किया है।
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तालाबंदी से आम लोग हुए परेशान
अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा दफ्तरों पर ताले जड़े जाने से नगर निगम में अलग-अलग कार्यों से पहुंचे लोगों को परेशानी हुई। संपत्ति संबंधी शिकायत लेकर पहुंचे वीर ने बताया कि उन्होंने संपत्ति का नामांतरण कराना है, मगर हड़ताल की वजह से काम नहीं हो सका है। एक व्यक्ति कॉलोनी में पथ प्रकाश के लिए लाइट लगवाने की मांग लेकर पहुंचा था। आरोप है कि वह 15 दिन से चक्कर काट रहा है। आज हड़ताल की वजह से कर्मचारी नहीं मिला है। अन्य लोग भी इसी तरह परेशान रहे।
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अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव का आरोप है कि पार्षद ने उन्हें धमकी दी है। मामले की जांच कराई जा रही है। पार्षद का पक्ष भी सुना जाएगा। यदि उनकी ओर से कोई गलत बात कही गई है तो महापौर से मशविरा कर उचित कार्रवाई कराई जाएगी। - ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।