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तीस-तीस रुपये में खरीदा मौत का सामान
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सहारनपुर। गांव के लोगों ने मात्र तीस-तीस रुपये में अपनी ही मौत का सामान खरीद लिया। गांव में ही आसानी से मिली सस्ती शराब के चक्कर में खुद ही मौत के शिकंजे में जा फंसे। कई घर बर्बाद हो गए, दर्जनों लोगों की जान पर बन गई।
ग्राम उमाही और सलेमपुर ही नहीं जिले के अलग-अलग गांवों के लगभग डेढ़ दर्जन लोगों पर जहरीली शराब ने न सिर्फ मौत का झपट्टा मारा, बल्कि कई लोगों अभी भी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सस्ती शराब इतनी महंगी पड़ी कि मौत के आगोश में जा फंसे। मौत का सामान लेने के लिए उन्हें कहीं और नहीं जाना पड़ा, गांव में ही उपलब्ध हो गया। वह भी मात्र तीस-तीस रुपये में। इतनी सस्ती और सुलभ शराब मिल जाने के कारण अपने को पीने से रोक नहीं पाए।
जिला अस्पताल में उपचाराधीन हरीचंद ने बताया कि गांव का ही पिंटू शराब बेचता था। बृहस्पतिवार दोपहर लगभग तीन बजे ही उन्होंने तीस रुपये का पव्वा खरीदा था। शाम को उसने शराब पी। उत्तराखंड में राज मिस्त्री का काम करने के कारण अधिक आमदनी नहीं थी। गांव में ही सस्ती शराब मिल रही थी। रात में लगभग दो बजे उसकी तबियत खराब होनी शुरू हुई। वह तड़प उठा। लगा कि अब उसका बचना मुश्किल है। रात में ही परिजन उसे अस्पताल ले जाने के लिए तैयार हुए, लेकिन मौसम बिगड़ा हुआ था। सुबह ही उसे अस्पताल में भर्ती भर्ती कराया। अस्पताल में भर्ती राजकुमार ने बताया कि उसके भतीजे पिंटू से ही उसने शराब ली थी। शाम लगभग चार-पांच बजे उसने शराब पी। ठेके से शराब काफी महंगी मिलती है, इसलिए पिंटू से ही तीस रुपये में शराब ले ली थी। सुबह लगभग तीन बजे उसकी हालत बिगड़ने लगी। उसे पता चला कि रात में ही उसके भतीजे पिंटू की शराब पीने से मौत हो गई है तो वह और भी घबरा गया। तड़के ही उसे परिजन उसे अस्पताल में लेकर आए और भर्ती कराया। सिर्फ ये ही नहीं अस्पताल में भर्ती गांव के डेढ़ दर्जन लोगों में से अधिकांश ने गांव की सस्ती शराब के चक्कर में अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। एसपी देहात विद्यासागर मिश्र का कहना है कि गांव के कुछ लोगों का कहना है कि पिंटू कहीं से शराब लाया था, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि बाहर से ही पीकर आए थे। इस मामले की जांच कराई जा रही है।
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ग्राम उमाही और सलेमपुर ही नहीं जिले के अलग-अलग गांवों के लगभग डेढ़ दर्जन लोगों पर जहरीली शराब ने न सिर्फ मौत का झपट्टा मारा, बल्कि कई लोगों अभी भी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सस्ती शराब इतनी महंगी पड़ी कि मौत के आगोश में जा फंसे। मौत का सामान लेने के लिए उन्हें कहीं और नहीं जाना पड़ा, गांव में ही उपलब्ध हो गया। वह भी मात्र तीस-तीस रुपये में। इतनी सस्ती और सुलभ शराब मिल जाने के कारण अपने को पीने से रोक नहीं पाए।
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जिला अस्पताल में उपचाराधीन हरीचंद ने बताया कि गांव का ही पिंटू शराब बेचता था। बृहस्पतिवार दोपहर लगभग तीन बजे ही उन्होंने तीस रुपये का पव्वा खरीदा था। शाम को उसने शराब पी। उत्तराखंड में राज मिस्त्री का काम करने के कारण अधिक आमदनी नहीं थी। गांव में ही सस्ती शराब मिल रही थी। रात में लगभग दो बजे उसकी तबियत खराब होनी शुरू हुई। वह तड़प उठा। लगा कि अब उसका बचना मुश्किल है। रात में ही परिजन उसे अस्पताल ले जाने के लिए तैयार हुए, लेकिन मौसम बिगड़ा हुआ था। सुबह ही उसे अस्पताल में भर्ती भर्ती कराया। अस्पताल में भर्ती राजकुमार ने बताया कि उसके भतीजे पिंटू से ही उसने शराब ली थी। शाम लगभग चार-पांच बजे उसने शराब पी। ठेके से शराब काफी महंगी मिलती है, इसलिए पिंटू से ही तीस रुपये में शराब ले ली थी। सुबह लगभग तीन बजे उसकी हालत बिगड़ने लगी। उसे पता चला कि रात में ही उसके भतीजे पिंटू की शराब पीने से मौत हो गई है तो वह और भी घबरा गया। तड़के ही उसे परिजन उसे अस्पताल में लेकर आए और भर्ती कराया। सिर्फ ये ही नहीं अस्पताल में भर्ती गांव के डेढ़ दर्जन लोगों में से अधिकांश ने गांव की सस्ती शराब के चक्कर में अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। एसपी देहात विद्यासागर मिश्र का कहना है कि गांव के कुछ लोगों का कहना है कि पिंटू कहीं से शराब लाया था, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि बाहर से ही पीकर आए थे। इस मामले की जांच कराई जा रही है।
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