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दीपावली पर 15 करोड़ की आतिशबाजी, धुआं-धुआं हुआ शहर
Updated Fri, 09 Nov 2018 01:24 AM IST
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दीपावली पर 15 करोड़ की आतिशबाजी, धुआं-धुआं हुआ शहर
सहारनपुर। खुशियों के पर्व दीपावली पर जिले भर में जमकर आतिशबाजी की गई। देर रात तक आसमान पटाखों की आवाज से गूंजता रहा। एक ही रात में सहारनपुर के लोगों ने करीब 15 करोड़ रुपये आतिशबाजी पर खर्च कर दिए। इस धूम धड़ाके से बेशक लोगों ने खुशी का इजहार किया, लेकिन इससे शहर से लेकर देहात तक जहरीला धुआं फैला रहा। दिवाली की रात शहर में मानक से चार गुना वायु प्रदूषण बढ़ गया।
दिवाली पर रोशनी करने के साथ लोगों को प्रदूषण के मद्देनजर आतिशबाजी कम करने अथवा न करने को लेकर इस बार खूब जागरूक किया गया। यहां तक कि एनसीआर क्षेत्र में तो आतिशबाजी निर्धारित समय में और निर्धारित आवाज के पटाखे छोड़ने की ही अनुमति दी गई, लेकिन इसका अपेक्षित असर नजर नहीं आया। यह बात अलग है कि पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार करीब 20 प्रतिशत तक आतिशबाजी कम हुई। जिले में आतिशबाजी की करीब 250 दुकानें हैं, जिनमें अधिकांश गलियों में हैं। सुभाष फायर वर्क्स के मालिक सुभाष चोपड़ा के अनुसार इस बार भी 15 से 20 करोड़ तक का जिले में आतिशबाजी का कारोबार हुआ है। हालांकि लोगों में काफी जागरूकता भी आई है। एनसीआर में पाबंदी का भी काफी असर रहा है। आतिशबाजी विक्रेता परवेज का कहना है कि इस बार लोग काफी जागरूक रहे। जिससे 20 प्रतिशत तक पटाखों की बिक्री में कमी आई है। इसके बावजूद आतिशबाजी से जिले की हवा प्रदूषित हो गई है। शहर सबसे अधिक प्रभावित रहा है। रात से ही शहर में धुआं-धुआं हो गया। सुबह भी धुआं नजर आया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दीपावली की रात 8 बजे से रात लगभग 12 बजे तक घंटाघर पर प्रदूषण की माप की गई। जो काफी चौंकाने वाली रही। दीपावली की रात शहर के वायु प्रदूषण का पीएम 10 -- 376 माइक्रोग्राम पर नार्मल मीटर क्यूब रिकार्ड किया गया, जबकि मानक के अनुसार 100 से अधिक नहीं होना चाहिए। इसका स्टैंडर्ड मानक 60 माइक्रोग्राम है। हालांकि घंटाघर पर सामान्य दिनों में भी 184 माइक्रोग्राम रहता है।
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ध्वनि प्रदूषण नवीन नगर में ज्यादा रहा
सहारनपुर। दीपावली पर सबसे अधिक नवीन नगर में धमाके हुए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार ध्वनि प्रदूषण आवासीय क्षेत्र में 55 डेेसीबल दिन में और रात में 45 डेसीबल से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि कामर्शियल इलाके में दिन में 65 और रात में 55 से अधिक नहीं हो। अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दिन में 50 और रात में 40 से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि सहारनपुर में काफी अधिक ध्वनि प्रदूषण रहा।
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--- स्थान -------------- ध्वनि प्रदूषण
- घंटाघर ---------------- 85.3 डेसीबल
- नवीननगर ------------90.4 डेसीबल
- आवास विकास--------81.5
- चंद्र नगर -------------73.4
- जिला अस्पताल -----72.8
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सेहत के लिए खतरनाक
आतिशबाजी से जहरीली हुई हवा सेहत के लिए हानिकारक है। जिला अस्पताल के डा. कुणाल जैन के अनुसार हवा में आतिशबाजी से फैले प्रदूषण के चलते कई बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है। चिकित्सक के अनुसार सांस के मरीजों के लिए बेहद नुकसानदायक है। इससे दमा की बीमारी, सांस की नली में सूजन, नजला, साइनोसाइटिस, लेरिन्जाइटिस जैसी बीमारी हो सकती है। फिजीशियन डा. संजीव मिगलानी के अनुसार कान की सुनने की क्षमता 60 डेसीबल होती है। अधिक तेज धमाकों से बहरापन आ सकता है। रक्तचाप बढ़ जाता है और हृदयाघात का खतरा होता है। बेचैनी और नींद नहीं आने की बीमारी भी हो जाती है।
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मानक से चार गुना तक बढ़ गया प्रदूषण
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी एसआर मौर्या का कहना है कि दीपावली की रात को सामान्य मानक से लगभग चार गुना तक वायु प्रदूषण बढ़ गया। जिससे हवा काफी प्रदूषित हो गई है। ध्वनि प्रदूषण भी काफी बढ़ गया है, जो लोगों की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है।
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सहारनपुर। खुशियों के पर्व दीपावली पर जिले भर में जमकर आतिशबाजी की गई। देर रात तक आसमान पटाखों की आवाज से गूंजता रहा। एक ही रात में सहारनपुर के लोगों ने करीब 15 करोड़ रुपये आतिशबाजी पर खर्च कर दिए। इस धूम धड़ाके से बेशक लोगों ने खुशी का इजहार किया, लेकिन इससे शहर से लेकर देहात तक जहरीला धुआं फैला रहा। दिवाली की रात शहर में मानक से चार गुना वायु प्रदूषण बढ़ गया।
दिवाली पर रोशनी करने के साथ लोगों को प्रदूषण के मद्देनजर आतिशबाजी कम करने अथवा न करने को लेकर इस बार खूब जागरूक किया गया। यहां तक कि एनसीआर क्षेत्र में तो आतिशबाजी निर्धारित समय में और निर्धारित आवाज के पटाखे छोड़ने की ही अनुमति दी गई, लेकिन इसका अपेक्षित असर नजर नहीं आया। यह बात अलग है कि पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार करीब 20 प्रतिशत तक आतिशबाजी कम हुई। जिले में आतिशबाजी की करीब 250 दुकानें हैं, जिनमें अधिकांश गलियों में हैं। सुभाष फायर वर्क्स के मालिक सुभाष चोपड़ा के अनुसार इस बार भी 15 से 20 करोड़ तक का जिले में आतिशबाजी का कारोबार हुआ है। हालांकि लोगों में काफी जागरूकता भी आई है। एनसीआर में पाबंदी का भी काफी असर रहा है। आतिशबाजी विक्रेता परवेज का कहना है कि इस बार लोग काफी जागरूक रहे। जिससे 20 प्रतिशत तक पटाखों की बिक्री में कमी आई है। इसके बावजूद आतिशबाजी से जिले की हवा प्रदूषित हो गई है। शहर सबसे अधिक प्रभावित रहा है। रात से ही शहर में धुआं-धुआं हो गया। सुबह भी धुआं नजर आया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दीपावली की रात 8 बजे से रात लगभग 12 बजे तक घंटाघर पर प्रदूषण की माप की गई। जो काफी चौंकाने वाली रही। दीपावली की रात शहर के वायु प्रदूषण का पीएम 10 -- 376 माइक्रोग्राम पर नार्मल मीटर क्यूब रिकार्ड किया गया, जबकि मानक के अनुसार 100 से अधिक नहीं होना चाहिए। इसका स्टैंडर्ड मानक 60 माइक्रोग्राम है। हालांकि घंटाघर पर सामान्य दिनों में भी 184 माइक्रोग्राम रहता है।
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ध्वनि प्रदूषण नवीन नगर में ज्यादा रहा
सहारनपुर। दीपावली पर सबसे अधिक नवीन नगर में धमाके हुए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार ध्वनि प्रदूषण आवासीय क्षेत्र में 55 डेेसीबल दिन में और रात में 45 डेसीबल से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि कामर्शियल इलाके में दिन में 65 और रात में 55 से अधिक नहीं हो। अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दिन में 50 और रात में 40 से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि सहारनपुर में काफी अधिक ध्वनि प्रदूषण रहा।
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--- स्थान -------------- ध्वनि प्रदूषण
- घंटाघर ---------------- 85.3 डेसीबल
- नवीननगर ------------90.4 डेसीबल
- आवास विकास--------81.5
- चंद्र नगर -------------73.4
- जिला अस्पताल -----72.8
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सेहत के लिए खतरनाक
आतिशबाजी से जहरीली हुई हवा सेहत के लिए हानिकारक है। जिला अस्पताल के डा. कुणाल जैन के अनुसार हवा में आतिशबाजी से फैले प्रदूषण के चलते कई बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है। चिकित्सक के अनुसार सांस के मरीजों के लिए बेहद नुकसानदायक है। इससे दमा की बीमारी, सांस की नली में सूजन, नजला, साइनोसाइटिस, लेरिन्जाइटिस जैसी बीमारी हो सकती है। फिजीशियन डा. संजीव मिगलानी के अनुसार कान की सुनने की क्षमता 60 डेसीबल होती है। अधिक तेज धमाकों से बहरापन आ सकता है। रक्तचाप बढ़ जाता है और हृदयाघात का खतरा होता है। बेचैनी और नींद नहीं आने की बीमारी भी हो जाती है।
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मानक से चार गुना तक बढ़ गया प्रदूषण
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी एसआर मौर्या का कहना है कि दीपावली की रात को सामान्य मानक से लगभग चार गुना तक वायु प्रदूषण बढ़ गया। जिससे हवा काफी प्रदूषित हो गई है। ध्वनि प्रदूषण भी काफी बढ़ गया है, जो लोगों की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है।