{"_id":"5b7b0d8f42c792465326922d","slug":"111534791055-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्मार्ट सिटी में मच्छरों का प्रकोप, फॉगिंग के लिए नहीं बजट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्मार्ट सिटी में मच्छरों का प्रकोप, फॉगिंग के लिए नहीं बजट
Updated Tue, 21 Aug 2018 12:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्मार्ट सिटी में मच्छरों का प्रकोप, फॉगिंग के लिए नहीं बजट
सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना में शामिल होने के बावजूद शहर में कुछ नहीं बदला है। वर्तमान में शहर में मच्छरों का प्रकोप है। मलेरिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डेंगू का भी मरीज सामने आ चुका है। मगर मच्छरों के खात्मे के लिए नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के पास कोई कार्ययोजना अभी तक नहीं है। रोस्टर भी अभी तक नहीं बना है। अधिकारियों का कहना है कि उनके पास फॉगिंग के लिए बजट नहीं है।
बरसात के मौसम में शहर में जगह-जगह जलभराव और गंदगी के कारण मच्छर पैदा हो रहे हैं। मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए लोग अपने स्तर से कदम उठा रहे हैं। मगर नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग अभी सोया है। गर्मी लगभग बीत चुकी हैं। मगर शहर में अभी तक फॉगिंग नहीं हुई है। शहर के लोग प्रार्थना पत्र देकर अपने मोहल्लों में फॉगिंग की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम ने हाथ खड़े किए हुए हैं। विभागीय सूत्रों ने बताया कि फॉगिंग आदि के लिए निगम के पास अलग से कोई बजट नहीं है। चूंकि हाथ में बजट नहीं है। ऐसे में अभी तक फॉगिंग के लिए रोस्टर भी नहीं बनाया गया है।
---
इस बार नहीं हुई नाले और नालियों की सफाई
नगर क्षेत्र में चार बड़े नालों के अलावा 150 से अधिक छोटे नाले और हजारों नालियां हैं। नगर निगम का जिम्मा है कि वह बरसात से पहले इन नाले और नालियों की सफाई कराए, जिससे बरसात में जलभराव की समस्या न हो और पानी जमा न हो सके। इसके अलावा संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए मच्छरों के खात्मे के प्रयास किए जाते हैं। इसके लिए एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जाता है। मगर इस बार शहर के किसी नाले या नाली की सफाई निगम की ओर से नहीं कराई गई है। दरअसल, नगर निगम ने नाले और नालियों की सफाई के टेंडर की प्रक्रिया में देरी कर दी, जिसके बाद कमिश्नर से नाले और नालियों की सफाई से जुड़े दस बड़े टेंडर निरस्त करा दिए। मच्छरों के पनपने की एक वजह नाले और नालियों की सफाई न हो पाना भी है।
विज्ञापन
---------------------------------------------
शहर में शामिल 32 गांवों का हाल बेहाल
जिन 32 गांवों को शहर में शामिल कर नगर निगम की स्थापना की गई थी। उन गांवों में नगर निगम में शामिल होने के बाद आज तक फॉगिंग या एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हुआ है। चकदेवली निवासी प्रदीप, ज्ञानागढ़ निवासी भगत और बिशनपुर निवासी अमरेश ने बताया कि निगम में शामिल होने से पहले गांवों में दवाओं का छिड़काव हुआ करता था, मगर निगम में शामिल होने के बाद वह भी बंद हो गया। उन्होंने बताया कि निगम में शामिल होने के बाद आज तक गांवों में फॉगिंग नहीं हुई है। एंटी लार्वा का छिड़काव तो दूर की बात है।
---------------------------------------------
फॉगिंग के लिए हमारे पास अलग से बजट नहीं है। इसलिए हमें फॉगिंग की व्यवस्था अपने स्तर से करनी होती है। फॉगिंग के लिए अभी तक रोस्टर नहीं बना है। जल्द ही रोस्टर बना लिया जाएगा। हमारी कोशिश है कि एक सितंबर से हम फॉगिंग शुरू करा दें। हालांकि शहर के ढमोला नदी से सटे कुछ इलाकों में हमने फॉगिंग कराई भी है।
-- डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
विज्ञापन
सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना में शामिल होने के बावजूद शहर में कुछ नहीं बदला है। वर्तमान में शहर में मच्छरों का प्रकोप है। मलेरिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डेंगू का भी मरीज सामने आ चुका है। मगर मच्छरों के खात्मे के लिए नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के पास कोई कार्ययोजना अभी तक नहीं है। रोस्टर भी अभी तक नहीं बना है। अधिकारियों का कहना है कि उनके पास फॉगिंग के लिए बजट नहीं है।
बरसात के मौसम में शहर में जगह-जगह जलभराव और गंदगी के कारण मच्छर पैदा हो रहे हैं। मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए लोग अपने स्तर से कदम उठा रहे हैं। मगर नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग अभी सोया है। गर्मी लगभग बीत चुकी हैं। मगर शहर में अभी तक फॉगिंग नहीं हुई है। शहर के लोग प्रार्थना पत्र देकर अपने मोहल्लों में फॉगिंग की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम ने हाथ खड़े किए हुए हैं। विभागीय सूत्रों ने बताया कि फॉगिंग आदि के लिए निगम के पास अलग से कोई बजट नहीं है। चूंकि हाथ में बजट नहीं है। ऐसे में अभी तक फॉगिंग के लिए रोस्टर भी नहीं बनाया गया है।
विज्ञापन
---
इस बार नहीं हुई नाले और नालियों की सफाई
नगर क्षेत्र में चार बड़े नालों के अलावा 150 से अधिक छोटे नाले और हजारों नालियां हैं। नगर निगम का जिम्मा है कि वह बरसात से पहले इन नाले और नालियों की सफाई कराए, जिससे बरसात में जलभराव की समस्या न हो और पानी जमा न हो सके। इसके अलावा संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए मच्छरों के खात्मे के प्रयास किए जाते हैं। इसके लिए एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जाता है। मगर इस बार शहर के किसी नाले या नाली की सफाई निगम की ओर से नहीं कराई गई है। दरअसल, नगर निगम ने नाले और नालियों की सफाई के टेंडर की प्रक्रिया में देरी कर दी, जिसके बाद कमिश्नर से नाले और नालियों की सफाई से जुड़े दस बड़े टेंडर निरस्त करा दिए। मच्छरों के पनपने की एक वजह नाले और नालियों की सफाई न हो पाना भी है।
विज्ञापन
---------------------------------------------
शहर में शामिल 32 गांवों का हाल बेहाल
जिन 32 गांवों को शहर में शामिल कर नगर निगम की स्थापना की गई थी। उन गांवों में नगर निगम में शामिल होने के बाद आज तक फॉगिंग या एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हुआ है। चकदेवली निवासी प्रदीप, ज्ञानागढ़ निवासी भगत और बिशनपुर निवासी अमरेश ने बताया कि निगम में शामिल होने से पहले गांवों में दवाओं का छिड़काव हुआ करता था, मगर निगम में शामिल होने के बाद वह भी बंद हो गया। उन्होंने बताया कि निगम में शामिल होने के बाद आज तक गांवों में फॉगिंग नहीं हुई है। एंटी लार्वा का छिड़काव तो दूर की बात है।
---------------------------------------------
फॉगिंग के लिए हमारे पास अलग से बजट नहीं है। इसलिए हमें फॉगिंग की व्यवस्था अपने स्तर से करनी होती है। फॉगिंग के लिए अभी तक रोस्टर नहीं बना है। जल्द ही रोस्टर बना लिया जाएगा। हमारी कोशिश है कि एक सितंबर से हम फॉगिंग शुरू करा दें। हालांकि शहर के ढमोला नदी से सटे कुछ इलाकों में हमने फॉगिंग कराई भी है।
-- डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।