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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सील को ठेंगा दिखा चल रहे घंटी कारखाने

Sun, 01 Jul 2018 11:40 PM IST
Updated Sun, 01 Jul 2018 11:40 PM IST
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सील को ठेंगा दिखा चल रहे घंटी कारखाने
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सील को ठेंगा दिखा चल रहे घंटी कारखाने
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छुटमलपुर (सहारनपुर)। भूलनी गांव में उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लगाई गई सील के बावजूद अफसरों को ठेंगा दिखाकर चल रहे घंटी कारखाने वायु और ध्वनि प्रदूषण ग्रामीणों को परोस रहे हैं। चौबीसों घंटे के शोर और धुएं से जहरीली हो चुकी हवा से पीड़ित ग्रामीण सहारनपुर से लेकर लखनऊ अधिकारियों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन इनपर लगाम नहीं लग पा रही है।
फतेहपुर थाना क्षेत्र के इस गांव में वर्ष 2014 में तीन घंटी कारखाने स्थापित हुए थे। आसपास की हवा में जहर घुलने और कान फोडू शोर से आजिज आए ग्रामीणों द्वारा वर्ष 2016 में इसकी शिकायत उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को की गई थी। डेढ़ साल तक तो इस पर ध्यान नहीं दिया गया। बाद में ग्रामीणों द्वारा फिर से प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा फरवरी 2018 में गांव के निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट बोर्ड के सदस्य सचिव आशीष तिवारी को सौंपी थी। तिवारी के आदेश पर इसी साल सात अप्रैल को टीम ने गांव पहुंच कर तीनों कारखानों की मशीनों पर सील लगा दी थी। परंतु गांव के तौकीर, जावेद, इरशाद, दिलशाद, शौकत, अल्ताफ, नसीम, जीशान, निन्ना आदि ग्रामीणों का कहना है कि सील लगाने के कुछ दिन बाद ही नई मशीनें ला कर फिर से कार्य शुरू कर दिया गया है। वैसे भी टीम ने हैमर, जनरेटर और अन्य टूल पर सील नहीं लगाई थी, केवल कुछ मशीनों को सील कर खानापूर्ति कर दी थी।
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ग्रामीणों का कहना है कि 20 घंटे चलने वाले इन कारखानों से निकलने वाले शोर से उन्हें बहरेपन की शिकायत हो गई है। इनमें से निकलने वाले धुएं की जद में आकर कई ग्रामीणों का टीबी हो गया है। इन कारखानों के पास एक अरबी मदरसा भी है, जिसमें डेढ़ सौ बच्चे पढ़ते हैं। मदरसे के जिंदा हसन का कहना है कि शोर में बच्चों को पढ़ा भी नहीं पाते हैं। ग्रामीणों ने अब डीएम से इन इकाईयों को आबादी से बाहर भिजवाने की गुहार लगाई है। डीएम ने मामले की जांच एसडीएम बेहट को सौंपी है।
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उधर, जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसआर मौर्य ने कहा कहना था कि यदि नई मशीनों को लगा कर काम हो रहा है तो गंभीर मामला है वे गांव में टीम भेज कर जांच कराएंगे।
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