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कई अनसुलझे सवालों का जवाब नहीं दे पाई पुलिस
Updated Wed, 16 May 2018 12:20 AM IST
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सहारनपुर। भीम आर्मी जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया की मौत के मामले में वो ही कहानी सामने आई है, जो पहले दिन से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। पुलिस ने मंगलवार को एक आरोपी को गिरफ्तार दर्शाकर घटना का खुलासा कर दिया, मगर कई ऐसे सवाल है, जिनके पुलिस स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई।
रामनगर के सचिन वालिया की मौत की कहानी पहले दिन ही साफ हो गई थी, मगर भीम आर्मी कार्यकर्ताओं के आंदोलन के चलते जल्दबाजी में खुलासा नहीं करना चाहती थी। सचिन की मौत की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो पुलिस सक्रिय हुई। आखिरकार निहाल के उस मकान तक पहुंच गई, जहां पर सचिन वालिया को गोली लगी थी। साक्ष्यों के संकलन से कहानी पूरी तरह पुष्ट हो गई थी। पुलिस अधिकारियों ने विरोध की आशंका के चलते पहले भीम आर्मी के पदाधिकारियों को विश्वास में लिया, तब जाकर मंगलवार को घटना का खुलासा कर दिया, मगर केस से जुड़े कुछ सवाल बने हुए हैं।
पुलिस अधिकारी यह नहीं बता पाए कि नौ मई को तमंचा लेकर कमरे में बैठने के पीछे क्या प्लान था। अधिकारी एक दूसरे से इसका जवाब मांगते रहे। ऐसा ही कमरे में मौजूद अन्य युवकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अधिकारियों को जवाब गोल-मोल था। एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह ने पहले यह कहकर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया कि वे क्यों आरोपी बनेंगे। बाद में डीआईजी ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि विवेचना में जिस तरह के तथ्य आएंगे, उस पर कार्रवाई होगी। पुलिस यह भी नहीं बता पाई कि सचिन की मौत जिस तमंचे से हुई, वह किसका था और कहां से लाया था। जब गोली हादसे में लगी थी तो हत्या दर्शाकर जान बूझकर दूसरा रंग देने वालों पर क्या कार्रवाई होगी।
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रामनगर के सचिन वालिया की मौत की कहानी पहले दिन ही साफ हो गई थी, मगर भीम आर्मी कार्यकर्ताओं के आंदोलन के चलते जल्दबाजी में खुलासा नहीं करना चाहती थी। सचिन की मौत की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो पुलिस सक्रिय हुई। आखिरकार निहाल के उस मकान तक पहुंच गई, जहां पर सचिन वालिया को गोली लगी थी। साक्ष्यों के संकलन से कहानी पूरी तरह पुष्ट हो गई थी। पुलिस अधिकारियों ने विरोध की आशंका के चलते पहले भीम आर्मी के पदाधिकारियों को विश्वास में लिया, तब जाकर मंगलवार को घटना का खुलासा कर दिया, मगर केस से जुड़े कुछ सवाल बने हुए हैं।
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पुलिस अधिकारी यह नहीं बता पाए कि नौ मई को तमंचा लेकर कमरे में बैठने के पीछे क्या प्लान था। अधिकारी एक दूसरे से इसका जवाब मांगते रहे। ऐसा ही कमरे में मौजूद अन्य युवकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अधिकारियों को जवाब गोल-मोल था। एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह ने पहले यह कहकर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया कि वे क्यों आरोपी बनेंगे। बाद में डीआईजी ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि विवेचना में जिस तरह के तथ्य आएंगे, उस पर कार्रवाई होगी। पुलिस यह भी नहीं बता पाई कि सचिन की मौत जिस तमंचे से हुई, वह किसका था और कहां से लाया था। जब गोली हादसे में लगी थी तो हत्या दर्शाकर जान बूझकर दूसरा रंग देने वालों पर क्या कार्रवाई होगी।
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