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मेला पंडाल में अजीमुशान मुशायरा आयोजित
Updated Sat, 14 Apr 2018 12:24 AM IST
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देवबंद (देवबंद)। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मेला पंडाल में बृहस्पतिवार की रात मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने अपने पसंदीदा कलाम प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुशायरे का उद्घाटन बसपा नेता हारून काजमी, शमा रोशन मुमताज अहमद और दीप प्रज्ज्वलित ऋषभ त्यागी ने किया। कार्यक्रम का आगाज नाते पाक से किया गया। मेरठ के शुभम त्यागी ने कुछ यूं कहा लगाकर ताज को ठोकर जो सूली पर चढ़े हंसकर, हमारे नौजवानों की जवानी हो तो ऐसी हो, लिए तलवार हाथों में चली आई थी जो रण में, उसे शत-शत नमन मेरा वो रानी हो तो ऐसी हो। नैनीताल की तरन्नुम निशात ने पढ़ा, हाथों से तलवारें सिर से दस्तारें गिर जाती हैं, जुल्म के बल पर चलने वाली सरकारें गिर जाती हैं। चांद देवबंदी ने कहा मिटा देना हर एक दिल से अदावत चाहता हूं मैं, मोहब्बत है मेरा मजहब, मोहब्बत चाहता हूं मैं। उस्ताद शायर शम्स देवबंदी ने पढ़ा मेरे जुनू मेरी वहशत की खैर हो या रब, मैं आसमान जमीन पर झुकाना चाहता हूं। अब्दुल्ला राज ने कहा अगर सर की जरूरत है तो फिर सिर भी काटकर हम, वतन के रास्ते हर रास्ता आसान कर देंगे, तिरंगे की हमें अजमत है जान से प्यारी अपनी, तिरंगे के लिए हम जान भी अपनी कुरबान कर देंगे। वली देवबंदी ने पढ़ा जिंदगी के अगर चार दिन नफरतों में गुजर जाएंगे, एक होकर रहो दोस्तों वरना एक दिन बिखर जाएंगे। तनवीर अजमल ने पढ़ा जो तेरा हाल है उस हाल में ढल जाऊं क्या, बेवफा तेरी तरह में भी बदल जाऊं क्या। इनके अलावा चौकस देवबंदी डा. सलमान दिलकश आदि ने भी कलाम प्रस्तुत किए। अध्यक्षता भाजपा नेता राकेश गांगुली व संचालन जिगर देवबंदी ने किया। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी, शहनवाज खान, गौरव विवेक, माहिर हसन, महबूब हसन, नसीर अंसारी, जावेद अंसारी, फैसल नूर, नवाजिश खान आदि रहे।
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मुशायरे का उद्घाटन बसपा नेता हारून काजमी, शमा रोशन मुमताज अहमद और दीप प्रज्ज्वलित ऋषभ त्यागी ने किया। कार्यक्रम का आगाज नाते पाक से किया गया। मेरठ के शुभम त्यागी ने कुछ यूं कहा लगाकर ताज को ठोकर जो सूली पर चढ़े हंसकर, हमारे नौजवानों की जवानी हो तो ऐसी हो, लिए तलवार हाथों में चली आई थी जो रण में, उसे शत-शत नमन मेरा वो रानी हो तो ऐसी हो। नैनीताल की तरन्नुम निशात ने पढ़ा, हाथों से तलवारें सिर से दस्तारें गिर जाती हैं, जुल्म के बल पर चलने वाली सरकारें गिर जाती हैं। चांद देवबंदी ने कहा मिटा देना हर एक दिल से अदावत चाहता हूं मैं, मोहब्बत है मेरा मजहब, मोहब्बत चाहता हूं मैं। उस्ताद शायर शम्स देवबंदी ने पढ़ा मेरे जुनू मेरी वहशत की खैर हो या रब, मैं आसमान जमीन पर झुकाना चाहता हूं। अब्दुल्ला राज ने कहा अगर सर की जरूरत है तो फिर सिर भी काटकर हम, वतन के रास्ते हर रास्ता आसान कर देंगे, तिरंगे की हमें अजमत है जान से प्यारी अपनी, तिरंगे के लिए हम जान भी अपनी कुरबान कर देंगे। वली देवबंदी ने पढ़ा जिंदगी के अगर चार दिन नफरतों में गुजर जाएंगे, एक होकर रहो दोस्तों वरना एक दिन बिखर जाएंगे। तनवीर अजमल ने पढ़ा जो तेरा हाल है उस हाल में ढल जाऊं क्या, बेवफा तेरी तरह में भी बदल जाऊं क्या। इनके अलावा चौकस देवबंदी डा. सलमान दिलकश आदि ने भी कलाम प्रस्तुत किए। अध्यक्षता भाजपा नेता राकेश गांगुली व संचालन जिगर देवबंदी ने किया। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी, शहनवाज खान, गौरव विवेक, माहिर हसन, महबूब हसन, नसीर अंसारी, जावेद अंसारी, फैसल नूर, नवाजिश खान आदि रहे।
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