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दारुल उलूम के इजलास में देश के कोने कोने से पहुंचे साढ़े तीन हजार लोग: मोहतमिम

Thu, 08 Mar 2018 12:16 AM IST
Updated Thu, 08 Mar 2018 12:16 AM IST
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दारुल उलूम के इजलास में देश के कोने कोने से पहुंचे साढ़े तीन हजार लोग: मोहतमिम
देवबंद (सहारनपुर)। विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि दारुल उलूम में 11 मार्च से शुरू होने वाले राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के इजलास में देश के कोने कोने से करीब साढ़े तीन हजार लोग शिरकत करेंगे।
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दारुल उलूम के मोहतमिम एवं राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के इजलास के संयोजक मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने बताया कि दारुल उलूम में होने वाले इजलास में दीनी इदारों की व्यवस्था, छात्रों के रहन सहन समेत अन्य मामलों को लेकर देश के कोने कोने से आने वाले मदरसों के जिम्मेदारों के साथ विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इजलास में जिन प्रस्तावों को रखा जाएगा उसके लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है। जो उन पर काम कर रही है। इसके अलावा इजलास को लेकर विभिन्न कमेटियां बनाकर जिम्मेदारियों को बांट दिया गया है। ताकि बाहर से आने वाले मेहमानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
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महिला हज सेवक बनाना मोदी सरकार का स्वागत योग्य कदम : सिद्दीकी
देवबंद। मुकद्दस हज यात्रा के लिए मोदी सरकार द्वारा महिलाओं को खादिमुल हुज्जाज (हज सेवक) बनाए जाने पर ऑल इंडिया इक्तेसादी कौंसिल के चेयरमैन व हजसेवक मौलाना हसीब सिद्दीकी ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि ये व्यवस्था केवल महिला हज यात्रियों के लिए ही होनी चाहिए।
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बुधवार को मौलाना हसीब सिद्दीकी ने दूरभाष पर बात करते हुए कहा कि मोदी सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है। इससे हज यात्रा पर जाने वाली महिलाओं को बहुत आसानी होगी। लेकिन घोषणा में ये खुलासा नहीं किया गया है कि महिला हज सेवकों से कौन कौन से काम लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि महिला हज सेवकों को मर्दों की ड्यूटी पर न लगाया जाए। क्योंकि अगर महिला हज सेवकों को मर्दों की ड्यूटी पर लगाया जाएगा तो यह सरासर गैर शरई होगा। बता दें कि आजादी के बाद से यह परंपरा चली आ रही है कि हज यात्रा पर जाने वाले लोगों की सेवा के लिए केवल मर्द ही हज सेवक के रुप में जाते हैं। यह पहला अवसर है जब मोदी सरकार ने अच्छी पहल करते हुए हज यात्रा के लिए दो प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित किया है।
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