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सड़कों पर घूम रहे गोवंश, अफसर अनजान
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सहारनपुर। सड़कों पर गोवंश घूमने से रोकने संबंधी आदेश के बावजूद प्रभावी रूप से अंकुश नहीं लग पा रहा है। अभी भी शहर में काफी स्थानों पर गोवंश खुले ही सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं, जबकि नगर निगम दावा करता है कि सड़कों से गोवंश को पकड़ने का अभियान चल रहा है।
आवारा घूमते गोवंश मुद्दा बन रहे हैं। एक तरफ इनकी वजह से फसलों को नुकसान होता है। जिले के विभिन्न इलाकों में किसान इससे परेशान हैं। क्योंकि इन दिनों खेतों में गेहूं की फसल तैयार हो रही है, लेकिन आवारा पशु खेतों में घुसकर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाक्टर वाईपी सिंह का कहना है कि जिले में पंजीकृत चार गौशाला हैं, जबकि कुछ अपंजीकृत गोशाला भी हैं। नया वृहद गो संरक्षण तीतरो में बनवाया जा रहा है, जिसका शिलान्यास हो चुका है। इसमें 300 गोवंश को रखने की व्यवस्था होगी।
देहात क्षेत्र की स्थिति
गागलहेड़ी के गांव गडोला में पांच वर्ष से श्री शिव गोरखनाथ गोशाला चल रही है, जिसमें 62 गोवंश रहते हैं। गोशाला के संचालक मोहर सिंह हैं, जो पूर्व में बीटेक करके गुरुग्राम स्थित कंपनी में नौकरी करते थे। नौकरी छोड़ने के बाद गोसेवा कर रहे हैं। सरकार की तरफ से सहायता नहीं मिलने पर आहत हैं। अंबेहटा के गांव रणदेवा में गोशाला है, जिसके अध्यक्ष चौधरी हरिपालसिंह और प्रबंधक संजीव चौधरी ने बताया कि गोशाला में एक हजार गोवंश रहते हैं, जिसका खर्च जनता के सहयोग से होता है। रामपुर मनिहारान के गांव बुड्ढाखेड़ा संतलाल में संचालित गोशाला को एक साल पूर्व तत्कालीन एसडीएम ने शिकायतों के चलते बंद करा दिया था। जिस भूमि पर गोशाला थी, वह गउचरान के नाम से अभिलेखों में दर्ज थी।
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नानौता के गांव भनेड़ा खेमचंद में सात साल पूर्व ग्राम समाज की भूमि पर गोशाला का उद्घाटन हुआ था, लेकिन निर्माण नहीं हो सका। देवबंद में श्रीकृष्ण गोशाला में 240 गोवंश रहते हैं। गोशाला में गोवंश की देखभाल के लिए 14 लोग लगाए गए हैं। संचालक श्याम कुमार अग्रवाल ने बताया कि गोवंश रखने में कोई परेशानी नहीं है। गोशाला में दूध न देने वाली गाय को रखने की एवज में 11 हजार रुपये लिए जाते हैं। बीते तीन महीने में इस गोशाला में बाहर से कोई गोवंश नहीं आया। बेहट क्षेत्र के गांव जाटोवाला में श्रीमती कस्तूरी देवी स्मारक गौशाला है। इसके अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि गोशाला में 44 गोवंश हैं, जिनमें चार गाय दूध देती हैं। चारे की व्यवस्था स्वयं ही की जाती है, सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिलती है।
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आवारा घूमते गोवंश मुद्दा बन रहे हैं। एक तरफ इनकी वजह से फसलों को नुकसान होता है। जिले के विभिन्न इलाकों में किसान इससे परेशान हैं। क्योंकि इन दिनों खेतों में गेहूं की फसल तैयार हो रही है, लेकिन आवारा पशु खेतों में घुसकर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाक्टर वाईपी सिंह का कहना है कि जिले में पंजीकृत चार गौशाला हैं, जबकि कुछ अपंजीकृत गोशाला भी हैं। नया वृहद गो संरक्षण तीतरो में बनवाया जा रहा है, जिसका शिलान्यास हो चुका है। इसमें 300 गोवंश को रखने की व्यवस्था होगी।
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देहात क्षेत्र की स्थिति
गागलहेड़ी के गांव गडोला में पांच वर्ष से श्री शिव गोरखनाथ गोशाला चल रही है, जिसमें 62 गोवंश रहते हैं। गोशाला के संचालक मोहर सिंह हैं, जो पूर्व में बीटेक करके गुरुग्राम स्थित कंपनी में नौकरी करते थे। नौकरी छोड़ने के बाद गोसेवा कर रहे हैं। सरकार की तरफ से सहायता नहीं मिलने पर आहत हैं। अंबेहटा के गांव रणदेवा में गोशाला है, जिसके अध्यक्ष चौधरी हरिपालसिंह और प्रबंधक संजीव चौधरी ने बताया कि गोशाला में एक हजार गोवंश रहते हैं, जिसका खर्च जनता के सहयोग से होता है। रामपुर मनिहारान के गांव बुड्ढाखेड़ा संतलाल में संचालित गोशाला को एक साल पूर्व तत्कालीन एसडीएम ने शिकायतों के चलते बंद करा दिया था। जिस भूमि पर गोशाला थी, वह गउचरान के नाम से अभिलेखों में दर्ज थी।
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नानौता के गांव भनेड़ा खेमचंद में सात साल पूर्व ग्राम समाज की भूमि पर गोशाला का उद्घाटन हुआ था, लेकिन निर्माण नहीं हो सका। देवबंद में श्रीकृष्ण गोशाला में 240 गोवंश रहते हैं। गोशाला में गोवंश की देखभाल के लिए 14 लोग लगाए गए हैं। संचालक श्याम कुमार अग्रवाल ने बताया कि गोवंश रखने में कोई परेशानी नहीं है। गोशाला में दूध न देने वाली गाय को रखने की एवज में 11 हजार रुपये लिए जाते हैं। बीते तीन महीने में इस गोशाला में बाहर से कोई गोवंश नहीं आया। बेहट क्षेत्र के गांव जाटोवाला में श्रीमती कस्तूरी देवी स्मारक गौशाला है। इसके अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि गोशाला में 44 गोवंश हैं, जिनमें चार गाय दूध देती हैं। चारे की व्यवस्था स्वयं ही की जाती है, सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिलती है।